कुतुब मीनार से डेढ़ गुना ऊंचा होगा कर्ण प्रयाग रेलवे स्टेशन का ब्रिज, अलकनंदा नदी पर चल रहा कार्य

मुरादाबाद : चारधाम रेल मार्ग के अंतिम पड़ाव पर कुतुब मीनार से डेढ़ गुना ऊंचे पुल पर गर्डर (लोहे का ढांचा) रखने का काम शुरु हो गया है। यह पुल कर्ण प्रयाग के पास अलकनंदा नदी पर बनाया जा रहा है। इस पुल का निर्माण जुलाई 22 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

प्रधानमंत्री इन दिनों उत्तराखंड में रेल के विकास पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। यहां चल रहे निर्माण कार्य में तेजी लाने के लिए अग्रिम बजट आवंटित कर दिया गया है। चारधाम रेल यात्रा के प्रथम चरण में योगनगरी से कर्ण प्रयाग तक 125 किलोमीटर रेल मार्ग तैयार किया जाना है। इसमें गुफाएं, दो पहाड़ को जोड़ने के लिए कई पुल का निर्माण कराया जाना है। रेलवे ने आधार स्टेशन योगनगरी बनाने के साथ ट्रेन संचालन शुरू कर दिया है। इसके आगे रेल मार्ग व पुल का निर्माण कराया जा रहा है। यहां पहला रेल मार्ग तैयार हो चुका है। वर्ष 2024 तक इस मार्ग पर ट्रेन संचालन शुरू क‍िया जाना है। इसी कारण एक साथ छह स्थानों पर गुफा और पुल का निर्माण तेजी से किया जा रहा है।

 

प्रथम चरण का अंतिम स्टेशन कर्ण प्रयाग सबसे अधिक ऊंचाई वाले स्थान पर बनाया जा रहा है। रेलवे स्टेशन और राष्ट्रीय राज मार्ग 58 के बीच अलकनंदा नदी है। इसके लिए कर्ण प्रयाग के पास सिवई कालेश्वर के पास 125 मीटर ऊंचाई पर इसे बनाया जा रहा है। कुतुब मीनार की ऊंचाई 72.5 मीटरहै, यानी रेल पुल की ऊंचाई कुतुब मीनार से लगभग डेढ़ गुणा अधिक है। पुल के निर्माण में लोहे का गर्डर (लोहा का ढांचे) का प्रयोग किया जा रहा है। इस पुल के निर्माण पर 60 फीसद से अधिक काम पूरा हो चुका है। पुल का निर्माण कार्य जुलाई तक पूरा करने का लक्ष्य है। इस पुल का निर्माण तेजी से शुरू होने के बाद रेल मंत्रालय ने ट्वीट किया है और निर्माणाधीन पुल का फोटो भी जारी किया है। प्रवर मंडल वाणिज्य प्रबंधक सुधीर सिंह ने बताया कि कार्य रेल विकास निगम द्वारा कराया जा रहा है। छह स्थानों पर काम चल रहा है। कर्ण प्रयाग के पास तेजी से पुल का निर्माण कराया जा रहा है।

 

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