‘आर्मी डे परेड’ में कदम से कदम मिलाते दिखे सेना के जांबाज जवान

नई दिल्ली, 15 जनवरी (हि.स.)। लोकतांत्रिक भारत का पहला भारतीय थल सेना प्रमुख नियुक्त किये जाने की याद में शनिवार को भारतीय सेना अपना 74वां ‘आर्मी डे’ मना रही है। आज के ही दिन 1949 में लेफ्टिनेंट जनरल केएम करियप्पा ने ब्रिटिश राज में भारतीय सेना के अंतिम अंग्रेज शीर्ष कमांडर जनरल रॉय फ्रांसिस बुचर से कमांडर इन चीफ का पदभार ग्रहण किया था। वर्ष 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच ऐतिहासिक युद्ध का मुख्य केंद्र रहे लोंगेवाला स्मारक में दुनिया का सबसे बड़ा राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में शहीदों को श्रद्धांजलि दी। थल सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे ने भारतीय सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन पर स्मारक डाक टिकट जारी किया।

दिल्ली के करियप्पा परेड ग्राउंड में शानदार परेड का आयोजन किया गया, जिसमें जवान कदम से कदम मिलाते दिखे। इसके अलावा भारत-पाकिस्तान सीमा पर जैसलमेर में स्थित लोंगेवाला स्मारक पर भारतीय सेना ने खादी के कपड़े से बना दुनिया का सबसे बड़ा राष्ट्रीय ध्वज (225 फीट लंबा और 150 फीट चौड़ा) फहराया। यह स्थान 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच ऐतिहासिक युद्ध का मुख्य केंद्र था। सेना दिवस पर थल सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे, नौसेना अध्यक्ष एडमिरल आर. हरि कुमार और वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों की स्मृति में माल्यार्पण किया। जनरल नरवणे ने भारतीय सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन दिए जाने की याद में आज एक स्मारक डाक टिकट जारी किया। इस अवसर पर लेफ्टिनेंट जनरल एसएस मिश्रा, क्यूएमजी और मेजर जनरल डीवी महेश, अतिरिक्त महानिदेशक एपीएस भी उपस्थित थे।

जनरल एमएम नरवणे ने 74वें सेना दिवस पर भारतीय सेना के सभी रैंकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि मैं उन सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान को नमन करता हूं, जिनकी वीरता और कर्तव्य के प्रति अद्वितीय प्रतिबद्धता हमें प्रेरित करती रहेगी। हमारी उत्तरी सीमा पर महामारी और विकास की दोहरी चुनौतियों के बावजूद भारतीय सेना ने शांति और सुरक्षा बनाए रखते हुए राष्ट्र की क्षेत्रीय अखंडता की दृढ़ता से रक्षा की है। हमारे सैनिकों के असीम साहस को गंभीरता से याद करता है और स्वीकार करता है। हमारे सैनिक उग्रवाद और छद्म युद्ध का मुकाबला करने और जरूरत के समय नागरिकों की सहायता करने के लिए सीमाओं की रक्षा के लिए डटे रहते हैं। उन्होंने सभी रैंकों को अपने राष्ट्र की सेवा के लिए खुद को फिर से समर्पित करने का आह्वान किया।

थलसेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे ने सेना दिवस की पूर्व संध्या पर आकाशवाणी पर प्रसारित संदेश में कहा कि सेना बातचीत के जरिये विवादों के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। भारतीय सेना सीमाओं पर यथास्थिति में ‘एकपक्षीय बदलाव के किसी भी प्रयास के खिलाफ दृढ़ता से खड़ी रहेगी और अमन-चैन की उसकी इच्छा को कमजोरी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सेना शत्रुओं की साजिश का त्वरित और निर्णायक जवाब देने में सक्षम रही है और उसी समय उसने पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध को और बढ़ने से भी रोका है। पाकिस्तान से सीमापार आतंकवाद का जिक्र करते हुए सेना प्रमुख ने कहा कि सेना भारत के हितों की रक्षा के लिए आतंकवाद के स्रोत पर ही हमला करने में संकोच नहीं करेगी। जनरल नरवणे ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने, मजबूत अनुशासन और दक्ष पेशेवर कार्यशैली पर आधारित सेना का सैन्य चरित्र उभरते भारत की आकांक्षाओं को पूरा करने में बल को शक्ति प्रदान करता रहेगा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेना दिवस पर भारतीय सेना के सभी रैंकों और उनके परिवारों को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि भारतीय सेना हमारे नागरिकों के बीच विश्वास को प्रेरित करती है क्योंकि यह राष्ट्र की सीमाओं पर एक निरंतर निगरानी रखती है। भारतीय सेना नई उभरती हुई बहु-क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करने के लिए एक बढ़ी हुई परिचालन भूमिका की तैयारी कर रही है। सरकार भारतीय सेना के क्षमता विकास के साथ-साथ उसके रैंक, उनके परिवारों, दिग्गजों और ‘वीर नारियों’ के कल्याण के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध है। भारत उन परिवारों के प्रति एकजुट है, जिन्होंने अपने प्रियजनों के नुकसान को साहस और धैर्य के साथ सहा है। मुझे पूरा भरोसा है कि भारतीय सेना ताकत से ताकत की ओर बढ़ेगी और देश को गौरवान्वित करती रहेगी।

सेना दिवस की पूर्व संध्या पर लेफ्टिनेंट जनरल सीपी मोहंती ने भूमि युद्ध अध्ययन केंद्र (सीएलएडब्ल्यूएस), नई दिल्ली में 48 नियमित और 32 तकनीकी स्नातक पाठ्यक्रम के गोल्डन जुबली बैच द्वारा लिखित और संकलित ‘बैप्टाइज्ड इन बैटल’ शीर्षक वाली कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया। भारतीय सेना के विशिष्ट सैनिकों ने रैपिड रिस्पांस क्षमताओं को मान्य करने के लिए पूर्वी थिएटर में एयरबोर्न असॉल्ट युद्धाभ्यास का आयोजन किया। इस अभ्यास में स्टेटिक लाइन और कॉम्बैट फ्री फॉल, सटीक स्टैंड-ऑफ ड्रॉप्स, रैपिड ग्रुपिंग और उद्देश्यों को पकड़ने का उपयोग करते हुए मल्टी-मोडल इंसर्शन शामिल था।

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