नई दिल्ली : कोरोना के मरीजों में दिख रहे हैं हार्ट अटैक जैसे लक्षणहमारी सांसों पर हरदम कोराना वायरस का खतरा मंडरा रहा है। क्योंकि यह सांस के जरिए ही हमारे शरीर में प्रवेश करता है। इस Virus के बारे में आये दिन नई-नई जानकारी मेडिकल सायंटिस्ट्स द्वारा दी जा रही है। अमेरिका, इटली और चीन में Corona के कुछ ऐसे मरीज मिले, जिनमें शुरुआती स्तर पर इस बीमारी के लक्षण नजर ही नहीं आ रहे थे। बल्कि उनमें हार्ट अटैक के लक्षण थे…
दिल पर कोरोना का असर
-शुरुआती जांच और मरीजों में नजर आ रहे लक्षणों के आधार पर यही माना जा रहा था कि कोरोना व्यक्ति के रेस्पिरेट्री ट्रैक्ट और लंग्स को ही इंफेक्ट करता है। लेकिन जैसे-जैसे कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ते चले गए, वैसे-वैसे इसके बारे में नई जानकारियां भी सामने आने लगीं।

-कोरोना, हार्ट की मांसपेशियों में सूजन बढ़ा देता है, जिससे हार्ट को पंपिंग करने और ब्लड सप्लाई में दिक्कत होती है। इस कारण सीने में तेज दर्द हो जाता है। कभी-कभी धड़कनों की गति भी प्रभावित होती है।

डॉक्टर्स का अनुभव
-हमारे देश में पॉलिटिकल लीडरशिप इस पेंडेमिक को समय रहते काफी हद तक कंट्रोल करने में सफल रही है। इसलिए अपने यहां कोरोना संक्रमित लोगों के केस शुरुआती स्तर पर उतनी तेजी से नहीं आए, जितनी तेजी से दूसरे देशों में देखने को मिले।

– चीन, इटली और अमेरिका जैसे देशों में जो कोरोना केस सामने आए हैं, उनकी स्टडी के आधार पर यह कहा जा रहा है कि इस वायरस से संक्रमित होनेवाले लोगों में जो गंभीर स्थिति में पहुंचनेवाले पेशंट्स होते हैं, उनमें से करीब 15 प्रतिशत को आईसीयू की जरूरत पड़ती है और टोटल मरीजों में 3 से 5 प्रतिशत को वेंटिलेटर्स की जरूरत पड़ती है। वहीं, कोरोना के कुल मरीजों में से 3 से 4 प्रतिशत को मृत्यु की संभावना रहते हैं।

हार्ट पेशंट्स में बढ़ जाता है रिस्क
हार्ट पेशंट्स को कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए अपना अतिरिक्त ध्यान रखने की जरूरत है। क्योंकि सामान्य लोगों की तुलना में हार्ट पेशंट्स को अगर कोरोना का संक्रमण हो जाता है तो उनकी लाइफ के लिए रिस्क 10 प्रतिशत तक हो जाता है। यानी सामान्य लोगों की तुलना में उनके लिए रिस्क डबल हो जाता है।

इन बीमारियों में बढ़ जाता है जान को खतरा
– कार्डियॉलजिस्ट डॉक्टर सजल गुप्ता का कहना है कि हार्ट पेशंट्स के साथ ही डायबीटीज, हाइपरटेंशन या ब्लड प्रेशर के मरीजों को भी कोरोना के संक्रमण से जान का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

-अगर सामान्य लोगों से तुलना की जाए तो दिल के मरीजों की ही तरह डायबीटीज के पेशंट्स में इस संक्रमण से जान का खतरा 6 प्रतिशत तक बढ़ जाता है और हाई बीपी होने पर यह खतरा 7.3 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।

दिल के मरीज ऐसे करें देखभाल
-डॉक्टर सजल का कहना है कि हार्ट पेशंट्स के लिए इस वक्त सबसे जरूरी दो ही चीजें हैं। नंबर एक कि आप लोग घर पर रहें यानी सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखें। दूसरी बात यह है कि आप टेंशन ना लें।

-जबसे ये संक्रमण हमारे देश में फैलना शुरू हुआ है, मेरे पास कई पेशंट्स के फोन आ चुके हैं कि सर खबरों में तो इस वायरस के बारे में जानकर डर लग रहा है। यह नॉर्मल लोगों के लिए इतना हानिकारक है तो हमारा क्या होगा?

– ऐसे में मैं हार्ट डिजीज के हर पेशंट से यही कहना चाहता हूं कि घर पर रहिए, फैमिली के साथ समय बिताइए और टेंशन फ्री रहिए। क्योंकि आप लोग अधिक टेंशन लेंगे तो कोरोना से कुछ हो ना हो हार्ट को जरूर समस्या हो सकती है!

-इसलिए सामान्य लोगों के साथ ही सभी हार्ट पेशंट अपना अतिरिक्त ध्यान रखें। लॉकडाउन के नियमों का पालन करें। साथ ही लॉकडाउन के इस समय को फैमिली के साथ समय बिताकर यादगार बनाएं।

– जब आप परिवार के साथ होते हैं तो वर्क प्लेस और सोसायटी के दूसरे तनावों से मुक्त होते हैं। यह स्थिति आपके दिल की सेहत के लिए अच्छी होती है।