बेअदबी और बहबलकलां गोलीकांड:फायरिंग में मारे गए कृष्ण भगवान सिंह के बेटे और गुरजीत के पिता बोले-इंसाफ दिलाने की हो रही राजनीति, वोट मांगने वालों का करेंगे बहिष्कार, सिद्धू खेल रहे ट्विट-ट्विट

 

मीडिया से बात करते अजीत सिंह, सुखराज सिंह और साधु सिंह(लेफ्ट टू राइट) - Dainik Bhaskar

मीडिया से बात करते अजीत सिंह, सुखराज सिंह और साधु सिंह(लेफ्ट टू राइट)

बहबलकलां गोलीकांड में पुलिस की गोली- से मारे गए कृष्ण भगवान सिंह और गुरजीत सिंह के परिवारों का कहना है कि 6 महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में अगर किसी सियासी दल ने इस मुद्दे पर वोट मांगे तो उसका बहिष्कार किया जाएगा। दोनों युवकों के परिवार ने आरोप लगाया कि मौजूदा कांग्रेस सरकार के साढ़े 4 साल पूरे हो गए हैं लेकिन अभी तक उन्हें इंसाफ नहीं मिला है। मामले की जांच तक पूरी नहीं हो पाई है। राजनीतिक पार्टियां इस मुद्दे पर बार-बार राजनीति कर रही हैं।

बहबलकलां गोलीकांड में मारे गए कृष्ण भगवान सिंह के बेटे सुखराज सिंह और गुरजीत सिंह के पिता सरदार साधु सिंह और गोलीकांड में घायल हुए अजीत सिंह ने शनिवार को चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बेअदबी और बहबलकलां गोलीकांड पर हो रही राजनीति पर अपना विरोध जताया।

अब सिद्धू और जाखड़ को भी आ गई याद

इन परिवारों ने पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व प्रधान सुनील जाखड़ और मौजूदा कांग्रेस प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू को भी घेरा। सुखराज सिंह, सरदार साधु सिंह और अजीत सिंह ने कहा कि नवजोत सिद्धू साढ़े 4 साल घर बैठे रहे और अब ट्वीट-ट्वीट खेलकर इंसाफ दिलाने की बात कर रहे हैं तो हम उन्हें ता देना चाहते हैं कि ट्वीटर या FB पर इंसाफ नहीं मिलते। चुनाव में 6 महीने रह गए हैं और अब बोलने लगे हैं। जब सरकार बने 6 महीने ही हुए थे तक चुप क्यों थे? सिद्धू के तजापोशी समारोह में सुनील जाखड़ कहते हैं कि पंजाब की सत्ता का रास्ता कोटकपूरा और बहबलकलां से आता ऐसे में कांग्रेसी उन्हें इंसाफ क्या दिलाएंगे, वो तो इसपर राजनीति कर रहे हैं। अगर वाकई में पंजाब की राजनीति का रास्ता बहबलकलां और कोटकपूरा से होकर आता है तो कांग्रेस सरकार उन्हें इंसाफ दिलवाए।

बार-बार छिड़का जाता है जख्मों पर नमक

सुखराज और साधु सिंह ने कहा कि न गोलियां चलाने वालों को सजा दी गई और न बेअदबी करने वालों को। 2017 में चुनाव से पहले कैप्टन अमरिंदर ने गुटका साहब की कसम खाकर हमें इंसाफ दिलाने की बात कही थी और अब फिर चुनाव आ रहे हैं। मौजूदा सरकार की नाकामी रही कि न सही दोषियों की पहचान की और न ही उन्हें सलाखाें के पीछे बंद किया जबकि CCTV फुटेज में सब क्लियर है और जिन्होंने किया वो भी बता रहे हैं कि किसके कहने पर उन्होंने ये सब किया। बावजूद इसके सरकार मास्टरमाइंड को ढूंढने की जगह बार-बार नई SIT बना देती हैं। तीन आरोपियों को भगौड़े भी घोषित कर दिया गया लेकिन आज तक उनकी अरेस्ट नहीं हो सकी। हमारे जख्मों पर बार-बार नमक छिड़का जाता है। ऐसे में वह सभी राजनीतिक दलों से कहना चाहते है कि राजनीति करने के लिए और बड़े मुद्दे हैं, बेअदबी और बहबलकलां पर न करो। अगर इन मुद्दों पर वोट मांगे तो वे विरोध करेंगे।

कुंवर विजय प्रताप को भी लिया आड़े हाथों

सुखराज सिंह ने कहा कि इस मामले की जांच के लिए तीन-तीन SIT बन चुकी हैं मगर कोई हल नहीं निकला। SIT ने जो जांच की तो दोषी पुलिस वाले बाहर निकल गए। पूर्व DGP सुमेध सैनी, पूर्व SSP चरनजीत शर्मा और बर्खास्त किए गए IGP परमराज उमरानंगल की अरेस्ट नहीं डाली गई। सिखों के साथ 1978 से धक्का हो रहा है और आगे भी होता रहेगा। तीनों परिवारों ने SIT के हेड रहे कुंवर विजय प्रताप सिंह को भी आड़े हाथों लिया और कहा कि अब राजनीतिक दल में शामिल होकर वह भी वहीं खड़े हैं जहां बाकी राजनेता। उन्होंने आगे कहा कि जब तक पंजाब सरकार ने पहले वाली SIT को हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज नहीं किया तो नई पर कैसे बहस होगी? अब तक 5 डेराप्रेमियों के इर्द-गिर्द ही जांच घुमाई जा रही है और डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को इस मामले से बाहर ही निकाल दिया।

जब जुडीशियरी में दखल-अंदाजी नहीं कर सकते तो इसके नाम पर वोट न मांगें

सुखराज ने कहा कि एक बार वह कैप्टन से मिले तो उन्होंने कहा कि हम जुडीशियरी में दखल-अंदाजी नहीं कर सकते। अगर वाकई में ऐसा ही है तो इस मुद्दे पर वोट क्यों मांगते हैं? पंजाब के लोगों ने 2017 में अकालियों को साइड पर लगा दिया अब 2022 में इनकी बारी है।

हमारे तो बयान तक नहीं लिए गए

बहबलकलां गोलीकांड में मारे गए 25 साल के गुरजीत सिंह के पिता साधु सिंह ने कहा कि शुरुआत से ही इस मुद्दे पर राजनीति की जा रही है। अकाली झूठ बोलकर जांच में रुकावटें डालते रहे और कांग्रेस नेता सुनील जाखड़ ने ये कह दिया कि यह मुद्दा पंजाब की राजनीति में वापस लाएगा। अगर सच में ऐसा है तो हमें इंसाफ दिलाओ, हम आपकी सरकार के साथ हैं। साधु सिंह ने आगे कहा कि हमें आज भी इंसाफ मिलने की उम्मीद है। लेकिन एक सच ये भी है कि आज तक न कोई नेता, न कमीशन और न ही SIT से किसी ने आकर उनके बयान लिए हैं।

सोच-समझकर दिया गया गोलीकांड को अंजाम

वहीं इस घटना में घायल हुए अजीत सिंह ने बताया कि उनकी दोनों जांघों में गोलियां बरसाई गई थीं। एक जांघ में प्लेट्स डाली गई हैं। पुलिस ने सब सोच-समझकर ही गोलीकांड और लाठीचार्ज को अंजाम दिया था। अरेस्ट करेंगे ये बोलकर 12 और 13 अक्टूबर को इकट्‌ठ को कम किया फिर 14 की सुबह गोलियां बरसाने लगे और लाठियां चलाने लगे। आज भी वो मंजर मेरे सामने आता है ताे रुक कांप जाती है पर इंसाफ की उम्मीद अभी भी कायम है।

 

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