CG में जासूसी के शिकार हुए समाजिक कार्यकर्ता:3 साल पहले आदिवासियों के लिए काम करने वाले 7 लोगों के फोन हैक हुए, प्रभावितों ने कहा- हमसे राष्ट्रीय सुरक्षा को कौन सा खतरा

इजराइली कंपनी एनओएस और उसके पेगासिस स्पाईवेयर से दुनिया भर के लोगों के सेलफोन हैक कर जासूसी कराने के खुलासे के बाद विवाद जारी है। ग्लोबल मीडिया रिपोर्ट में देश के जिन लोगों के नाम इस जासूसी कांड के प्रभावितों की सूची में आए हैं, उनमें से 7 छत्तीसगढ़ से संबंधित हैं। सभी बस्तर, सरगुजा और बिलासपुर संभाग के आदिवासी समूहों के साथ काम करने वाले मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं।

दैनिक भास्कर ने इनमें से एक और छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के संयोजक मंडल के आलोक शुक्ला से बात की। इस दौरान आलोक शुक्ला ने सवाल उठाया कि आदिवासी अधिकारों, जंगलों की सुरक्षा और पर्यावरण का मुद्दा उठा रहे लोगों से राष्ट्रीय सुरक्षा को कौन सा खतरा पैदा हो गया, जो सरकार को उनका फोन हैक करने की जरूरत पड़ गई।

आलोक बताते हैं, यह 2018 की बात है। उनके पास वॉट्सएप पर अनजान और अजीब सिरियल वाले नंबरों से वीडियो कॉल आते थे। ऐसा लगातार चार दिनों तक हुआ। उस दौरान दिन भर में ऐसे कॉल कई-कई बार आते रहे। उन्होंने उन्हें कभी रिसीव नहीं किया। उसकी गंभीरता पर ध्यान भी नहीं दिया। 2018 के आखिर में उनके पास वॉट्सएप की ओर से ही एक मैसेज आया कि आपके फोन को हैक करने की कोशिश हुई है।

वॉट्सएप ने उसकी कोशिश नाकाम कर दी है। अधिक जानकारी के लिए वॉट्सएप की सुरक्षा से जुड़ी टीम से संपर्क करने को कहा गया। उस समय हम में से किसी ने ऐसे फोन हैक होने की बात सुनी नहीं थी। वॉट्सएप के संदेश को हमने भी बहुत गंभीरता से नहीं लिया। इस विषय पर बहुत चर्चा भी नहीं हुई। मई 2019 में जब अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इसकी जांच शुरू की और मेरा नंबर वहां पाकर संपर्क किया तब मुझे पहली बार पता चला कि मेरा फोन कितने सोफिस्टिकेटेड साइबर जासूसों के निशाने पर था। उस बार यहां से मेरे साहित पांच लोगों, बेला भाटिया, शालिनी गेरा, डिग्री प्रसाद चौहान और शुभ्रांशु चौधरी का नाम आया था।

आलोक कहते हैं, यह जो हुआ है वह मामूली जासूसी हमला नहीं है। सोचिए एक विदेशी एजेंसी नागरिकों के फोन हैक कर रही है। उन नागरिकों में मंत्री, सैन्य बलों के प्रमुख, चुनाव आयुक्त, जज, पत्रकार, विपक्षी दलों के नेता और सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता तक हैं। इनसे जुड़ी सारी जानकारी, इनकी निजी बातचीत और वीडियो-तस्वीरें तक विदेशी एजेंसी के पास मौजूद हैं। यह राष्ट्रीय सुरक्षा पर असल खतरा है।

छत्तीसगढ़ में बनी समिति ने पीड़ितों से तो पूछा ही नहीं

आलोक शुक्ला छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार की नीयत पर भी सवाल उठाते हैं। उन्होंने कहा, अक्टूबर 2019 में वॉट्सएप हैकिंग कांड में पेगासस का नाम सबसे पहले सामने आया था। उसके बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गृह विभाग के सचिव की अध्यक्षता में एक जांच समिति बनाई थी। उस समिति ने कुछ भी नहीं किया। यहां तक की जिनके फोन हैक हुए थे या हैक करने की कोशिश हुई थी, उनसे कोई बात भी नहीं की। आलोक शुक्ला ने कहा, उनकी जानकारी में इस समिति ने सरकार को सौंपी अपनी रिपोर्ट में कह दिया है कि उन्हें ऐसा कुछ मिला ही नहीं है।

आरोप, इनका फोन हैक कर रहा है पेगासिस

बेला भाटिया:

लेखक-पत्रकार, शोधकर्ता, मानवाधिकार वकील और कार्यकर्ता हैं। वे सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज, दिल्ली में एसोसिएट फेलो और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, बॉम्बे में मानद प्रोफेसर रही हैं। 2006 से बस्तर में सक्रिय बेला, 2015 के बाद यहां स्थायी तौर पर रह रही हैं। भाजपा शासन के दौरान यह बस्तर पुलिस और स्थानीय संगठनों के निशाने पर भी रहीं।

शालिनी गेरा:

बस्तर में काम करने वाली मानवाधिकार कार्यकर्ता और वकील है। उन्होंने 2013 में जगदलपुर लीगल एड ग्रुप बनाया था। इसके जरिए आदिवासियों पर पुलिस प्रताड़ना के मामलों को ऊपरी अदालतों तक पहुंचाया जाता रहा है। नक्सल विरोधी अभियान में लगी बस्तर पुलिस लीगल एड ग्रुप को अपनी राह का रोड़ा मानती रही है। शालिनी पर कई तरह के हमले भी होते रहे हैं।

आलोक शुक्ला:

राजधानी रायपुर रहते हैं। छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के संयोजकों में से एक हैं। बिलासपुर और सरगुजा संभाग के खनन प्रभावित क्षेत्रों में आदिवासी अधिकारों, पेसा कानून और वन अधिकार कानून पर बहुत काम किया है। विधानसभा चुनाव से पहले जब राहुल गांधी हसदेव अरण्य क्षेत्र में आए थे तो वहां की चौपाल का मंच आलोक शुक्ला ने ही संभाला था। उन्हाेंने राहुल के सामने हसदेव अरण्य क्षेत्र में खनन के दुष्परिणाम बताए थे।

सोनी सोरी :

बस्तर की आदिवासी सामाजिक-राजनीति कार्यकर्ता हैं। नक्सलियों से संबंध के आरोपों में दो बार जेल जा चुकी हैं। आरोप है कि जेल में पुलिस ने उनको प्रताड़ित किया था। आम आदमी पार्टी से लोक सभा का चुनाव लड़ चुकी हैं। आदिवासियों के साथ उत्पीड़न आदि के मामले में बस्तर क्षेत्र की सबसे मुखर आवाजों में से एक हैं।

लिंगाराम कोडाेपी:

सोनी सोरी के भतीजे हैं। आदिवासियों के मुद्दों, उनके संघर्षों को सोशल मीडिया के जरिए दुनिया भर में प्रचारित-प्रसारित करते रहते हैं। सोनी सोरी के साथ संघर्षों में साथ रहते हैं और उनके सामाजिक-राजनीतिक कार्यक्रमों का प्रबंधन भी देखते हैं।

डिग्री प्रसाद चौहान:

पीयूसीएल छतीसगढ के उपाध्यक्ष हैं। वे पिछले दो दशकों से रायगढ़ में आदिवासियों के मुद्दों और खनन कंपनियाें की मनमानी के खिलाफ सक्रिय हैं। चौहान ने पिछले कई साल से आदिवासियों की जमीनों का गैर आदिवासियों द्वारा कंपनियों के लिये फर्जी खरीद फरोख्त के मामलों को उजागर किया है। इनमें से कई मामले एसडीएम कोर्ट, जिला न्यायालय और उच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं।

शुभ्रांशु चौधरी:

पत्रकार रहे हैं। बस्तर के माओवाद की पृष्ठभूमि पर उनकी एक किताब भी आई है। पिछले करीब दो दशकों से छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय हैं। बस्तर इलाके में वे कम्युनिटी रेडियो का संचालन भी करते रहे हैं। पिछले वर्ष उन्होंने बस्तर में एक शांति मार्च निकालकर बस्तर क्षेत्र में हथियारबंद संघर्ष खत्म करने का आग्रह किया था। उसके बाद ये नक्सलियों के निशाने पर रहे।

क्या है यह पेगासस और कैसे करता है काम?
पेगासस इजराइली कंपनी एनओएस का एक स्पायवेयर है। यह किसी के भी मोबाईल में उसकी मर्जी के बगैर घुसकर उसे हैक कर सकता है। इससे प्रभावित मोबाईल का कैमरा, माइक, कॉन्टैक्ट लिस्ट, फोटो, वीडियो, डॉक्यूमेंट और सभी जानकारी तक यह आसानी से पहुंच जाएगा। इसके जरिए बिना आपकी जानकारी के आपके माइक्रोफोन और कैमरों का इस्तेमाल कर गतिविधियों को देखा-सुना जा सकता है। आरोप तो यह भी लगे हैं कि इसी के जरिए भीमा कोरेगांव केस के आरोपियों के कम्प्यूटर में छेड़छाड़ की गई थी।

 

खबरें और भी हैं…

Check Also

लॉकडाउन से तमिलनाडु में राहत नहीं, 9 अगस्त तक बढ़ी पाबंदी

चेन्नई. कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए तमिलनाडु सरकार ने शुक्रवार को राज्य में जारी …