गुजरात विधानसभा के इतिहास में अब तक केवल 111 महिलाएं ही विधायक बनी…..

गुजरात का नाम देश में राजनीतिक क्षेत्र में सबसे आगे है। जहां से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह जैसे मजबूत नेता मिले हैं। लेकिन जब राजनीति में महिला सशक्तिकरण की बात आती है तो गुजरात में महिलाएं पिछड़ रही हैं। 1960 में गुजरात के राज्य बनने के बाद 1962 में हुए पहले चुनाव में गुजरात में 154 सीटें थीं। उस समय 11 महिलाएं सभा में पहुंचीं। आज भी यह संख्या 10 प्रतिशत के आंकड़े तक नहीं पहुंची है। वर्ष 1962 से अब तक विधान सभा के लिए 13 चुनाव हो चुके हैं जिनमें केवल 111 महिलाएं ही विधान सभा तक पहुंच पाई हैं। जबकि 2196 पुरुष विधायक बने हैं। चुनाव के इतिहास में अब तक केवल तीन मौके ऐसे ही आए हैं, जब महिला विधायकों की संख्या 9 फीसदी के करीब पहुंच गई है. 1985, 2007 और 2012 के विधानसभा चुनावों में 16 महिला विधायक चुनी गईं। 2017 के चुनाव में इसकी संख्या घटाकर 13 कर दी गई थी।

गुजरात विधानसभा चुनाव में महिला उम्मीदवार

1962 के पहले चुनाव में 19 महिलाओं ने चुनाव लड़ा था। जिसमें से 11 महिलाएं जीतने में सफल रहीं। हालांकि, उसके बाद 1962 के चुनाव में सीटों की संख्या 154 से बढ़कर 168 हो गई, लेकिन 14 में से 8 महिलाएं ही विधानसभा में पहुंच पाईं। 1972 के चुनाव में केवल 1 महिला विधायक चुनी गई थीं। जबकि 21 महिलाओं ने चुनावी मैदान में प्रवेश किया। वर्ष 1975 में विधान सभा में सीटों की संख्या फिर से बढ़ाकर 181 कर दी गई, लेकिन महिला विधायकों की संख्या में वृद्धि नहीं हो सकी। चुनाव लड़ने वाली 14 महिलाओं में से केवल 3 जीतीं। वर्ष 1980 में सीटों की संख्या फिर से 181 से बढ़कर 182 हो गई। विधानसभा चुनाव में 182 सदस्यों में से केवल 5 महिलाएं जीतीं। 1990 में 53 में से 4 महिलाएं, 1995 में 94 में से केवल 2 महिलाएं ही चुनाव जीती और विधान सभा में पहुंचीं। 1998 में चुनाव लड़ने वाली 49 में से 4 महिलाओं ने जीत हासिल की। 2002 में 37 महिलाओं में से 12 महिलाओं ने जीत हासिल की थी। 2007 और 2012 के चुनावों में एक बार फिर 16-16 महिलाएं विधान सभा के लिए चुनी गईं। वर्ष 2017 में 88 जबकि वर्ष 2012 में 97 महिलाएं चुनावी मैदान में थीं। 2017 के चुनाव में 120 महिला उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था, जिनमें से 13 सफल रहीं।

गुजरात को अपनी पहली महिला मुख्यमंत्री वर्ष 2014 में मिली

साल 2014 में गुजरात की आनंदीबेन पटेल के रूप में पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं। यह तब संभव हुआ जब नरेंद्र मेडी ने 2014 का लोकसभा चुनाव जीता और प्रधानमंत्री बने। हालांकि, आनंदीबेन ने अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले इस्तीफा दे दिया। आनंदी बेन 22 मई 2014 से 7 अगस्त 2016 तक गुजरात की मुख्यमंत्री रहीं। हालांकि, वह वर्तमान में 29 जुलाई 2019 से उत्तर प्रदेश के राज्यपाल हैं।

2021 में गुजरात को मिलेगी पहली महिला स्पीकर

डॉ. विधान सभा की पहली महिला अध्यक्ष होंगी। निमाबेन आचार्य। गुजरात के राजनीतिक इतिहास में पहली बार कोई महिला राष्ट्रपति बनी। उन्होंने गुजरात विधानसभा के 30वें अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाली। उनसे पहले 29 विधानसभा अध्यक्ष रह चुके हैं लेकिन वह पहली महिला अध्यक्ष थीं। इससे पहले उन्हें प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया गया है।

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