रूपाणी की पतंग कटी, पटेल की उड़ी:पूर्व सीएम ने बहुत कोशिश की, फिर भी पतंगक कटने से नहीं बचा सके, सीएम की पतंग ऊंचाई पर भी भरती रही हिलोरे

 

पतंग उड़ाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी (बायीं ओर) और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल। - Dainik Bhaskar

पतंग उड़ाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी (बायीं ओर) और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल।

आज पूरे देश में मकर संक्रांति (उत्तरायण) का पर्व मनाया जा रहा है। मकर संक्रांति का पर्व हो तो सबसे पहले गुजरात की पतंगबाजी की ही बात होती है। लेकिन गुजरात में दो राजनीतिक दिग्गजों की पतंगबाजी चर्चा में है। इनमें एक हैं मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और दूसरे हैं पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी। सोशल मीडिया में ऐसे वीडियो और फोटो जमकर वायरल हो रहे हैं, जिसमें विजय रूपाणी की पतंग जल्द ही कट जाती है। वहीं, भूपेंद्र पटेल की पतंग काफी देर तक आसमान में उड़ान भरती नजर आती है। भूपेंद्र पटेल ने अहमदाबाद के नारणपुरा में तो विजय रूपाणी ने अपने गृहनगर राजकोट में सेलिब्रेशन किया।

कोरोना और ठंड के चलते त्योहार फीका
लगातार दूसरे साल भी कोरोना के चलते पर्व का मजा फीका है। वहीं, पतंगबाजी के लिए मशहूर गुजरात में भी कोरोना की तीसरी लहर की दस्तक के चलते लगातार दूसरे साल वह रौनक नहीं, जो हर साल रहती है। इसके अलावा रही-सही कसर राज्य में पड़ रही कड़कड़ाती ठंड ने निकाल दी है। ठंड के चलते लोग सुबह बाहर निकलने से बचते रहे जिसके चलते आसमान में गिनती की ही पतंगें उड़ती नजर आईं। हालांकि, दोपहर को धूप खिलने पर आसमान पतंगों से भर गया।

अहमदाबाद शहर का कोट इलाका।

अहमदाबाद शहर का कोट इलाका।

अहमदाबाद में उत्तराययण का उत्साह
गुजरात में मकर संक्रांति बहुत धूमधाम के साथ मनाई जाती है। खासतौर पर अहमदाबाद शहर का कोट इलाका तो पूरे शहर की विशेष पहचान है। यहां रहने वाले लोग पतंगबाजी में उस्ताद हैं। 7 वर्ष के बच्चे से लेकर 70 वर्षीय काका-काकी तक को पूरी मस्ती के साथ पतंग को तुक्की मारते हुए देखा जा सकता है। यहां के पतंगरसिया तो उत्तरायण के दिन दिवाली की तरह सज-धजकर… नए कपड़े, गॉगल्स, सन कैप, नई अंगूठियां पहने हुए सुबह से ही छत पर नजर आते हैं।

उत्तरायण का स्पेशल मेनू
उत्तरायण पर छत पर भोजन करने की प्रथा तो अहमदाबादियों को विरासत में मिली हुई है। महिलाएं दो दिन पहले से ही उत्तरायण का स्पेशल मेनू तैयार कर लेती हैं और रात से ही इनकी तैयारी में लग जाती हैं। वैसे ऊंधिया, ढोकला और तिल के लड्डू उत्तरायण की खास रेसिपी हैं। पतंग उड़ाने के साथ-साथ स्वादिष्ट पकवानों के स्वाद उठाने का मजा क्या होता है, यह तो आप सिर्फ अहमदाबादियों से ही पूछ सकते हैं।

विदेशों में बसने वाले अहमदाबादी अगर सबसे ज्यादा किसी त्योहार को मिस करते हैं तो वह ‘उत्तरायण’ ही है।

विदेशों में बसने वाले अहमदाबादी अगर सबसे ज्यादा किसी त्योहार को मिस करते हैं तो वह ‘उत्तरायण’ ही है।

पड़ोसियों से ही होती है पतंगबाजी की स्पर्धा
अहमदाबाद की संकरी और भीड़-भाड़ वाली गलियों में रहने वाले लोगों के लिए वैसे तो पड़ोसी परिवार के सदस्य ही हैं। लेकिन उत्तरायण पर इनके बीच ही पतंगबाजी की जबर्दस्त स्पर्धा होती है। किसी की भी पतंग कटी नहीं कि पूरे परिवार की…‘काप्यो ज छे..काप्यो ज छे…’ की आवाज से छत गूंज उठती है। कई बार तो इसे लेकर छोटी-मोटी तकरार भी हो जाती है, लेकिन शाम ढलते ही फिर ये एक साथ मिलकर नाश्ते का लुत्फ उठाते हुए नजर आते हैं।

NRI तो विशेष तौर पर पतंगबाजी के लिए आते हैं:
विदेशों में बसने वाले अहमदाबादी अगर सबसे ज्यादा किसी त्योहार को मिस करते हैं तो वह ‘उत्तरायण’ ही है। पतंगबाजी के शौकीन एनआरआई तो पतंगबाजी के लिए खासतौर पर अहमदाबाद आते हैं। ऊंची-ऊंची छतों पर चढ़कर पेंच लड़ाने का मजा अब भला विदेशों में कहां मिल सकता है। इस बारे में तो एनआरआई का कहना है कि ‘उत्तरायण’ तो अहमदाबाद की विशेष पहचान है। ‘उत्तरायण’ का असली मजा अहमदाबाद के अलावा कहीं मिल ही नहीं सकता।

अंधेरा होते ही शहर का आसमान तुक्कल-गुब्बारे से जगमगा उठता है।

अंधेरा होते ही शहर का आसमान तुक्कल-गुब्बारे से जगमगा उठता है।

रात में तुक्कल-गुब्बारों का मजा
शाम ढलने के बाद पतंग तो उड़ाई नहीं जा सकती, लेकिन अहमदाबादियों ने इसका भी रास्ता खोज निकाला है। और यह है तुक्कल-गुब्बारा (लालटेन वाली पतंग)। अंधेरा होते ही शहर का आसमान तुक्कल-गुब्बारे से जगमगा उठता है। तुक्कल-गुब्बारे उड़ाने के साथ छत पर ही पारंपरिक म्युजिक तले डांस करने की प्रथा भी वर्षों से चली आ रही है। छत पर ही मस्ती का यह सिलसिला देर रात तक चलता है। सिर्फ इतना ही नहीं, ठीक ऐसा ही उत्साह दूसरे दिन भी दिखाई देता है। इसीलिए तो इसे कहा जाता है ‘अहमदाबादी उत्तरायण’।

देश-विदेश के पतंगबाजों से भरा होता है साबरमती रिवरफ्रंट
वर्ष 2003 से अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट में ‘इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल’ का आयोजन हो रहा है। इस दौरान यहां देश-विदेश से सैकड़ों की संख्या में विदेशों तक से नामी-गिरानी पतंगबाज पहुंचते हैं। गुजरात सरकार द्वारा आयोजित इस काइट फेस्टिवल में विजेताओं को आकषर्क पुरस्कार भी दिए जाते हैं। लेकिन, कोरोना को चलते लगातार दूसरे साल भी इस आयोजन की अनुमति नहीं है।

 

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