मां कामाख्या धाम जाने का है प्लान? इन 5 चमत्कारी जगहों पर जाना बिल्कुल न भूलें
पूर्वोत्तर भारत के सबसे प्रसिद्ध और चमत्कारी धार्मिक स्थलों में असम के गुवाहाटी में नीलांचल पहाड़ियों पर स्थित मां कामाख्या देवी मंदिर (Kamakhya Temple) का स्थान सबसे ऊपर आता है। यह पावन धाम माता के 51 शक्तिपीठों में से सबसे प्रमुख और तंत्र साधना का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। हर साल देश और दुनिया भर से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक मां कामाख्या के दर्शन करने और उनका आशीर्वाद लेने यहां पहुंचते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर आप सिर्फ कामाख्या मंदिर के मुख्य दर्शन करके वापस लौट आते हैं, तो आपकी यह धार्मिक यात्रा अधूरी मानी जाती है? पौराणिक मान्यताओं और स्थानीय गाइडों के अनुसार, कामाख्या धाम के आसपास 5 ऐसी बेहद पवित्र और ऐतिहासिक जगहें मौजूद हैं, जहां जाए बिना कामाख्या देवी की यात्रा का पूरा पुण्य फल प्राप्त नहीं होता है।
नीलांचल पहाड़ी पर स्थित मां भुवनेश्वरी का पावन मंदिर
मुख्य कामाख्या मंदिर से थोड़ी ही ऊंचाई पर नीलांचल पहाड़ी के सबसे ऊपरी शिखर पर माता भुवनेश्वरी का एक बेहद प्राचीन और भव्य मंदिर स्थित है। मां भुवनेश्वरी को दसों महाविद्याओं में से एक माना जाता है। पहाड़ी की चोटी पर होने के कारण इस मंदिर से नीचे बहने वाली विशाल ब्रह्मपुत्र नदी और पूरे गुवाहाटी शहर का जो विहंगम दृश्य दिखाई देता है, वह किसी का भी मन मोह लेता है। धार्मिक दृष्टि से मुख्य मंदिर के दर्शन के बाद मां भुवनेश्वरी के चरणों में शीश नवाना अनिवार्य माना गया है, क्योंकि इन्हें इस क्षेत्र की रक्षक देवी के रूप में पूजा जाता है।
अद्भुत और ऐतिहासिक उमानंद द्वीप और शिव मंदिर
ब्रह्मपुत्र नदी के ठीक बीचो-बीच स्थित उमानंद द्वीप (Umananda Island) दुनिया का सबसे छोटा नदी द्वीप (Smallest River Island) माना जाता है, जिसे 'पीकॉक आइलैंड' के नाम से भी जाना जाता है। इस द्वीप पर भगवान शिव को समर्पित उमानंद मंदिर स्थापित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी स्थान पर भगवान शिव ने कामदेव को अपनी तीसरी आंख खोलकर भस्म किया था। मां कामाख्या के दर्शन के बाद इस द्वीप पर जाने के लिए श्रद्धालुओं को नाव या फेरी की सवारी करनी होती है। नदी के बीच में स्थित इस शांत और अलौकिक जगह के दर्शन किए बिना गुवाहाटी की यात्रा पूरी तरह अधूरी लगती है।
शक्ति की प्रतीक मां छिन्नमस्ता और अन्य महाविद्याओं के मंदिर
कामाख्या मंदिर के विशाल परिसर और उसके आसपास ही मां छिन्नमस्ता, माता तारा, माता बगलामुखी और माता मातंगी जैसी अन्य नौ महाविद्याओं के बेहद जागृत और प्राचीन मंदिर स्थित हैं। कामाख्या धाम को तंत्र शास्त्र का गढ़ कहा जाता है और इन सभी अलग-अलग मंदिरों में साधना का अपना एक अलग और गहरा महत्व है। अक्सर आम तीर्थयात्री केवल मुख्य गर्भगृह के दर्शन करके निकल जाते हैं, लेकिन अगर आप यहां जा रहे हैं, तो परिसर में मौजूद इन सभी महाविद्याओं के दर्शन के लिए पर्याप्त समय जरूर निकालें ताकि आपको इस शक्तिपीठ की संपूर्ण ऊर्जा और आशीर्वाद मिल सके।
पवित्र सौभाग्य कुंड और इसकी धार्मिक मान्यताएं
कामाख्या मंदिर परिसर के भीतर ही स्थित 'सौभाग्य कुंड' (Saubhagya Kunda) एक बेहद पवित्र और ऐतिहासिक जलाशय है। ऐसी मान्यता है कि इस कुंड का निर्माण स्वयं देवताओं ने किया था और इसका जल कभी भी सूखता नहीं है। तीर्थयात्री मुख्य मंदिर में प्रवेश करने से पहले इस कुंड के पवित्र जल से आचमन करते हैं या इसके दर्शन करते हैं। मान्यता यह भी है कि इस कुंड की परिक्रमा करने और इसके जल को माथे से लगाने से व्यक्ति के जीवन के सभी पाप मिट जाते हैं और उसे सौभाग्य की प्राप्ति होती है, इसलिए इस स्थान को अपनी सूची में जरूर शामिल करें।
ऐतिहासिक वशिष्ठ आश्रम की शांति और प्राकृतिक सुंदरता
गुवाहाटी शहर के बाहरी इलाके में संध्याचल पहाड़ी पर स्थित वशिष्ठ आश्रम (Vashistha Ashram) एक बेहद शांत और ध्यान लगाने के लिए उत्तम स्थान है। माना जाता है कि इस आश्रम की स्थापना स्वयं महान वैदिक ऋषि वशिष्ठ ने की थी। यह स्थान तीन पवित्र नदियों- संध्या, ललित और कांता के संगम पर स्थित है, जो इस पूरे माहौल को बेहद सुरम्य और प्राकृतिक रूप से समृद्ध बनाते हैं। कामाख्या धाम की यात्रा के बाद अपने मन को असीम शांति और सुकून देने के लिए इस शांत वातावरण में कुछ समय बिताना आपकी पूरी यात्रा को एक बेहद सुखद और यादगार अनुभव में बदल देता है।