रामवीर उपाध्याय ने बसपा से दिया इस्तीफा:बोले-कांशीराम के सिद्धांतों और आदर्शों से भटक चुकी है पार्टी, इसलिए छोड़ा

 

पूर्व कैबिनेट मंत्री रामवीर उपाध्याय ने बसपा को बाय-बाय बोल दिया। - Dainik Bhaskar

पूर्व कैबिनेट मंत्री रामवीर उपाध्याय ने बसपा को बाय-बाय बोल दिया।

बसपा को बड़ा झटका लगा है। पूर्व कैबिनेट मंत्री रामवीर उपाध्याय ने बसपा से इस्तीफा दे दिया है। रामवीर आगरा और अलीगढ मंडल में बसपा का दिग्गज चेहरा थे। बसपा सरकार में वह कैबिनेट मंत्री भी रहे। बसपा सुप्रीमो मायावती के करीबियों में पार्टी महासचिव सतीश मिश्रा के बाद उनका दूसरा नम्बर था। वह हाथरस जनपद की सादाबाद विधानसभा क्षेत्र से बसपा से विधायक चुने गए थे।

सिद्धांतों से भटक गई बसपा

पूर्व कैबिनेट मंत्री रामवीर उपाध्याय ने कहा है कि वह बसपा से वर्ष 1996 में जुडे थे। 2007 में बसपा की सरकार बनाने में सहयोग किया था। सत्ता में रहने के बावजूद 2009 के लोकसभा चुनाव में एवं वर्ष 2012 विधानसभा चुनाव में तथा 2014 के लोक सभा चुनाव में पार्टी को उम्मीद के अनुसार सीट नहीं जीत पाई इसकी पार्टी ने कोई समीक्षा नहीं की। हार के कारण बताने पर उल्टे बसपा सुप्रीमो ने मुझ पर कार्रवाई कर मुझे निलंबित कर दिया था। इससे मेरे समर्थकों की भावनाएं आहत हुईं। बसपा कांशीराम साहब के सिद्धांतों और आदर्शों से भटक चुकी है इसलिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से वह त्याग पत्र दे रहे हैं।

2019 से बढ़ गए मतभेद

बता दें कि पूर्व कैबिनेट मंत्री रामवीर उपाध्याय 2019 लोकसभा चुनाव में अपनी पत्नी पूर्व सांसद सीमा उपाध्याय को एक बार फिर फतेहपुरसीकरी लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लडाने की तैयारी में जुटे थे, लेकिन चुनावी माहौल में बसपा का कैडर वोट खिसकते हुए देख उन्होंने आखिर में चुनाव लडने से मना कर दिया। बस यहीं से बसपा सुप्रीमो और पूर्व कैबिनेट मंत्री के बीच दूरी बढना शुरू हो गया।

इसके बाद रामवीर उपाध्याय को राजनीतिक रूप से परिवार में शुरू हुई कलह का सामना करना पडा। बसपा सरकार में दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री रहे उनके सगे भाई मुकुल उपाध्याय ने बसपा छोडकर भाजपा की सदस्यता ले ली। इसके बाद स्वयं रामवीर उपाध्याय के बेटे ने भी भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली।

एक वर्ष पहले ही बसपा सुप्रीमो मायावती ने रामवीर उपाध्याय को पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते निलम्बित कर दिया, लेकिन रामवीर उपाध्याय ने पार्टी की सदस्यता नहीं छोडी। पूर्व कैबिनेट मंत्री को उम्मीद थी कि बसपा सुप्रीमो अपने फैसलों और पार्टी की कमजोर होती स्थिति के कारणों पर विचार करेंगी लेकिन उन्हें कोई सकारात्मक पहल होते नहीं दिखाई दी और आज पार्टी छोड दी।

सादाबाद से भाजपा दे सकती है टिकट

बसपा छोडने के बाद पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वयं या अपने बेटे को सादाबाद विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतार सकते हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा के अप्रत्यक्ष सहयोग से ही उनकी पत्नी सीमा उपाध्याय हाथरस जिला पंचायत अध्यक्ष चुनी गईं थीं। बसपा छोडने के बाद भाजपा में शामिल होकर वह सादाबाद से चुनाव लड सकते हैं।

 

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