राज्य के 3,700 जर्जर स्कूलों का होगा महा-सर्वे, बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने उठाया बड़ा कदम

राज्य के 3,700 जर्जर स्कूलों का होगा महा-सर्वे, बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने उठाया बड़ा कदम

राजस्थान के डूंगरपुर जिले में हाल ही में हुए दर्दनाक और झकझोर देने वाले स्कूल हादसे के बाद राज्य सरकार और शिक्षा विभाग पूरी तरह से हरकत में आ गए हैं। इस हृदयविदारक घटना से सबक लेते हुए, जिसमें स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया था, शिक्षा विभाग ने प्रदेशभर के सभी सरकारी स्कूलों की खस्ताहाल इमारतों की सुध लेना शुरू कर दिया है। विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, अब कल एक ही दिन में पूरे राजस्थान के भीतर चिन्हित किए गए लगभग 3,700 जर्जर और खतरनाक स्कूलों का एक 'सुपरफास्ट' महा-सर्वे किया जाएगा। इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आने वाले दिनों में किसी भी छात्र या शिक्षक को जर्जर कमरों या खतरनाक इमारतों के नीचे बैठकर पढ़ाई न करनी पड़े। शिक्षा मंत्री और उच्च अधिकारियों के निर्देश पर होने वाले इस बड़े सर्वे को लेकर जिला कलेक्टरों और शिक्षा अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए जा चुके हैं, ताकि बिना किसी कोताही के पूरी पारदर्शिता के साथ हर एक स्कूल की जमीनी हकीकत सामने आ सके।

डूंगरपुर की वह दर्दनाक घटना जिसने झकझोर दी सरकार और प्रशासन की नींद

कुछ ही दिन पहले डूंगरपुर जिले के एक सरकारी स्कूल में जो हादसा पेश आया, उसने पूरे राज्य के अभिभावकों और शिक्षा विभाग की रातों की नींद उड़ा दी थी। स्कूल संचालन के दौरान अचानक जर्जर भवन का हिस्सा भरभराकर ढह जाने के कारण वहां पढ़ाई कर रहे मासूम बच्चे इसकी चपेट में आ गए थे, जिससे एक बड़ा मानवीय संकट पैदा हो गया था। इस घटना के बाद से ही लगातार यह मांग उठ रही थी कि राज्य के ग्रामीण और शहरी इलाकों में जितने भी पुराने, सीलन भरे या जर्जर अवस्था में स्कूल संचालित हो रहे हैं, उनकी तत्काल प्रभाव से पहचान की जाए और उन्हें तुरंत खाली करवाया जाए। मुख्यमंत्री कार्यालय और शिक्षा निदेशालय ने इस मामले को सबसे उच्च प्राथमिकता देते हुए यह महसूस किया कि कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के बजाय अब मैदान में उतरकर ठोस कदम उठाने का समय आ गया है, ताकि भविष्य में इस तरह की किसी भी अनहोनी या दुर्घटना की पुनरावृत्ति को पूरी तरह से रोका जा सके।

कैसे होगा 3,700 जर्जर स्कूलों का यह सुपरफास्ट एक दिवसीय महा-सर्वे?

शिक्षा विभाग द्वारा तैयार की गई विशेष कार्ययोजना के तहत कल होने वाला यह सर्वे अपनी तरह का पहला सबसे बड़ा और तीव्र अभियान होगा। इसके लिए जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO), ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों (CBEO), कनिष्ठ अभियंताओं (JEン) और स्थानीय प्रशासनिक टीमों की विशेष कमेटियों का गठन किया गया है। कल सुबह से ही ये टीमें अपने-अपने क्षेत्रों के उन तमाम स्कूलों का भौतिक सत्यापन करने के लिए निकलेंगी जिन्हें पहले से ही असुरक्षित या जर्जर की श्रेणी में रखा गया है। इस सुपरफास्ट सर्वे के दौरान टीम यह जांच करेगी कि संबंधित विद्यालय भवन की दीवारें कितनी सुरक्षित हैं, छत की स्थिति कैसी है, बारिश के पानी से सीलन तो नहीं आ रही है और क्या उस भवन में बच्चों को बैठाना जान जोखिम में डालने के बराबर है या नहीं। यदि किसी स्कूल की स्थिति अत्यंत दयनीय पाई जाती है, तो उसे तुरंत प्रभाव से सील करने या कक्षाओं को वैकल्पिक सुरक्षित स्थानों जैसे कि पंचायत भवन या नजदीकी सामुदायिक हॉल में शिफ्ट करने का ऑन-द-स्पॉट आदेश दिया जाएगा।

बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि: सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति और वैकल्पिक व्यवस्थाएं

राजस्थान सरकार ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि बच्चों की सुरक्षा और उनके जीवन के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस महा-सर्वे के पूरा होने के बाद शाम तक सभी जिलों से एक समेकित रिपोर्ट राज्य मुख्यालय को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर इन खतरनाक भवनों को गिराने (Demolition) या नए सिरे से निर्माण करवाने (Reconstruction) के प्रस्तावों को त्वरित मंजूरी दी जाएगी। जिन स्कूलों के कमरे असुरक्षित पाए जाएंगे, वहां के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर टेंट लगाने या पास के स्कूलों में शिफ्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षाविदों और अभिभावक संघों ने सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए कहा है कि यदि यह सतर्कता पहले बरती जाती तो शायद डूंगरपुर जैसी त्रासदियों से बचा जा सकता था, लेकिन देर आए दुरुस्त आए की तर्ज पर उठाया गया यह कदम सराहनीय है।

इस बड़े प्रशासनिक अभियान का दूरगामी असर और भविष्य की रूपरेखा

यह सुपरफास्ट सर्वे केवल एक दिन की औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह राजस्थान की स्कूली शिक्षा के बुनियादी ढांचे को सुरक्षित और मजबूत बनाने की दिशा में एक नया मोड़ है। इस अभियान के जरिए राज्य सरकार यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि भविष्य में स्कूल भवनों के रखरखाव और मरम्मत के लिए फंड की कोई कमी आड़े न आए। जिला प्रशासन और स्कूल प्रबंधन समितियों (SMC) को भी अब पाबंद किया गया है कि वे समय-समय पर अपने भवनों की स्थिति की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को दें। जनता और मीडिया की निगाहें भी कल होने वाले इस महा-सर्वे पर टिकी हुई हैं कि आखिर जमीनी स्तर पर अधिकारी कितनी मुस्तैदी से काम करते हैं और कितने दिनों में इन जर्जर इमारतों को पूरी तरह से बदला जाता है। अंततः, इस पूरी कवायद का एकमात्र उद्देश्य यही है कि हमारे देश और राज्य का भविष्य यानी हमारे बच्चे जब स्कूल जाएं, तो वे पूरी तरह सुरक्षित माहौल में ज्ञान अर्जित कर सकें।