Rajasthan Election 2023: राजस्थान चुनाव के मंच पर फिर उठेगा वो तिरंगा जिसे पंडित नेहरू ने लाल किला से फहराया था”

नई दिल्ली: आज देश 77वा स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार दसवीं बार ध्वजारोहण कर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने जो तिरंगा फहराया वह कहां से आया था। किसने इस तिरंगे को रंगीन किया और कैसे यह लालकिल तक पहुंचा, यह सब आज इस कहानी में व्यक्त है।

हमारी आजादी का प्रतीक और गर्व की बात तिरंगा है, जिसे खास तौर पर राजस्थान के दौसा जिले में तैयार किया गया था। कहा जाता है कि 15 अगस्त 1947 को पहली बार तिरंगा को पंडित नेहरू ने लाल किले पर फहराया था। यह जानकर दिलचस्प है कि पिछले 8 दशकों में दोष खड़ी समिति के सदस्यों ने सैकड़ों बुनकरों के साथ मिलकर तिरंगे का कपड़ा तैयार किया है।

तिरंगा जो लाल किले की प्राचीर पर फहराया जाता है, उसका आदर्श स्थान राजस्थान के दौसा जिले के आलूदा गांव में है। इसके पीछे भी एक विशेष कहानी है। उस समय अनुजा गांव में रहने वाले सैकड़ों बुनकर परिवार महात्मा गांधी के विचारों के प्रभाव में आकर चरखा काटने का काम करते थे। उनके हाथों से बुने गए कपड़े को तिरंगा काटकर दिल्ली ले जाया जाता था। जानकारी के मुताबिक, आलूदा के अलावा जयपुर जिले के गोविंदगढ़ गांव से भी एक तिरंगा लाल किले भेजा गया था। लेकिन रोचक बात यह है कि आजादी के पहले तिरंगे को दोसा के चौथमल बुनकर ने बनाया था।

दरअसल, इस दिन चौथमल बुनकर ने एक तिरंगा बनाया और उसे लाल किले पर फहराया गया था। इसके पीछे एक विशेष कारण भी है। उन्होंने गांव में रहकर महात्मा गांधी के आदर्शों का पालन करते हुए चरखा काटने का काम किया था। उनके कपड़े के कारण बने तिरंगे को दिल्ली भेजा गया था। चौथमल बुनकर एक देशभक्त और स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने अपने साहस और समर्पण से भारत को आजादी दिलाने में योगदान दिया। उनका तिरंगा आज भी हमारे लोगों के लिए एक प्रतीक है, जो हमें देशभक्ति, स्वतंत्रता, और समरसता का संदेश देता है। यह तिरंगा हमें याद दिलाता है कि हम एक हैं और एक साथ मिलकर कुछ भी कर सकते हैं।