Rajasthan Agriculture : फसल बीमा योजना में बड़ा खेल बोया गेहूं और चना, लेकिन बीमा निकला सरसों का, किसानों के साथ हुई धोखाधड़ी
News India Live, Digital Desk: राजस्थान में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के क्रियान्वयन में एक बेहद हैरान करने वाला और गंभीर घोटाला सामने आया है। प्रदेश के कई जिलों से ऐसी शिकायतें मिली हैं जहां किसानों ने अपने खेतों में गेहूं (Wheat) और चना (Gram) की बुआई की थी, लेकिन कागजों में उनका बीमा सरसों (Mustard) की फसल का कर दिया गया। इस 'फसल बदलाव' (Crop Mismatch) के खेल के कारण अब हजारों किसानों का क्लेम फंस गया है, क्योंकि जब खराबे का सर्वे हुआ तो खेत की फसल और बीमा के कागजों में दर्ज फसल मेल नहीं खा पाई।
कैसे हुआ यह 'फसली हेरफेर'?
जांच में सामने आया है कि इस घोटाले के पीछे बीमा कंपनियों के नुमाइंदों, कुछ बैंक अधिकारियों और ई-मित्र संचालकों की मिलीभगत हो सकती है।
प्रीमियम का खेल: सरसों की फसल का बीमा प्रीमियम अन्य रबी फसलों के मुकाबले कम या अलग हो सकता है।
बिना जानकारी बदलाव: कई किसानों का आरोप है कि उन्होंने बैंक में गेहूं और चने की बुआई के दस्तावेज दिए थे, लेकिन पोर्टल पर एंट्री करते समय जानबूझकर या लापरवाही से उसे 'सरसों' दिखा दिया गया।
क्लेम से वंचित: जब ओलावृष्टि या शीतलहर से गेहूं और चने की फसल बर्बाद हुई, तो बीमा कंपनी ने यह कहकर क्लेम खारिज कर दिया कि "आपने तो सरसों का बीमा कराया था, जबकि खेत में गेहूं खड़ा है।"
मंत्री किरोड़ी लाल मीणा का कड़ा रुख: SOG करेगी जांच
राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने विधानसभा में इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए इसे 'संगठित अपराध' करार दिया है। उन्होंने घोषणा की है कि फसल बीमा योजना में हो रही इन धांधलियों की जांच अब एसओजी (SOG) करेगी। मंत्री ने बताया कि अकेले एक जिले (श्रीगंगानगर) में ही हजारों ऐसे फॉर्म मिले हैं जहां सर्वेयर ने किसानों की जगह खुद ही दस्तखत कर दिए थे। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि कुछ बीमा कंपनियों ने किसानों के करीब 128 करोड़ रुपये के क्लेम जानबूझकर रोक रखे हैं।
फर्जी बैंक खातों के जरिए करोड़ों की चपत
घोटाले की जड़ें इतनी गहरी हैं कि सालासर जैसे इलाकों में किसानों के नाम पर 71 फर्जी बैंक खाते खोलने का मामला भी प्रकाश में आया है। इन फर्जी खातों के जरिए प्रीमियम काटा गया और सरकार से मिलने वाली सब्सिडी व क्लेम की राशि हड़पने की कोशिश की गई। अनुमान है कि इस तरीके से सरकार को करीब 9 करोड़ रुपये का चूना लगाने की तैयारी थी।
किसानों को क्या करना चाहिए?
इस धोखाधड़ी से बचने और अपना हक पाने के लिए कृषि विभाग ने किसानों को कुछ सलाह दी हैं:
पॉलिसी की जांच: किसान तुरंत अपनी बीमा पॉलिसी (Insurance Policy) चेक करें कि उसमें फसल का नाम सही दर्ज है या नहीं।
शिकायत दर्ज करें: यदि फसल का नाम गलत है, तो तुरंत संबंधित बैंक और जिला कृषि अधिकारी को लिखित शिकायत दें।
आधार और बैंक लिंक: अपना आधार और बैंक खाता अपडेट रखें ताकि क्लेम की राशि सीधे आपके खाते में आए।