नाटक ‘छोड़ो कल की बातें’ ने अतीत को भूलाकर आगे बढ़ने का दिया संदेश

लखनऊ, 13 मार्च (हि.स.)। नाटक ’छोड़ो कल की बातें’ ने अतीत को भूलकर जिंदगी आगे बढ़ने का संदेश दिया। उ.प्र. संगीत नाटक अकादमी की ओर से अपनी तरह का पहला साल दिवसीय नाट्य समारोह’ इन्द्रधनुष’ सोमवार से शुरू हुआ। समारोह की शुरुआत जयवर्धन के लिखे नाटक ‘छोड़ो कल की बातें’ से बाते हुई। नाटक का मंचन गाजियाबाद की संस्था रंगमण्डप की ओर हुआ। इसका निर्देशन जे.पी. सिंह ने किया। नाट्य ने लोगों को अतीत की छाया से मुक्त होकर आगे बढ़ने का संदेश दिया। 13 से 19 मार्च तक नाट्य समारोह का आयोजन गोमती नगर स्थित अकादमी के संत गाडगे जी महाराज प्रेक्षागृह में किया जा रहा है।

नाटक ’छोड़ो कल की बातें’ में तीन वृद्धजन अपने अतीत को भूलकर वर्तमान में जीना चाहते हैं। ऐसे में वह अपने में छिपे बच्चे को जिंदा कर दर्शकों को गुदगुदाते हैं तो कभी आपस में लड़ने लगते हैं। दूसरी ओर वह परिस्थितियों से जूझते भी नजर आते हैं। वास्तव में इन सब प्रयासों से वह अपनी ही मनस्थिति से संघर्ष करते दिखते हैं। इस संघर्ष में ऐसे मोड़ भी आते हैं जब उनकी जिंदगी महज छलावा लगती है। उनका अतीत भले ही उनके द्वारा दफन कर दिया गया हो पर वह गाहे बगाहे, सच प्रकट हो ही जाता है।

नाटक जहां एक ओर यह बताता है कि अतीत इंसान का पीछा नहीं छोड़ता है वहीं दर्शकों से यह प्रश्न भी करता है कि क्या बुढ़ापा अभिशाप है? क्या लोगों की संवेदना मरती जा रही है? आज क्या रिश्तों की डोर कमजोर पड़ गई है? मंच पर पर टप्पू की भूमिका पवन चैहान, घनश्याम की गौरव वर्मा, जगलाल की अरुण सोदे, महावीर की जे.पी.सिंह और उमाजी की नीता बत्रा ने प्रभावी रूप से अदा कर प्रशंसा हासिल की। संगीत नाटक का सशक्त पक्ष रहा। उसमें भारती डांग ने संगीत संकलन, अंश जयवर्धन ने संगीत संयोजन और रवि पारचा ने संगीत संचालन का दायित्व संभाला। वशिष्ठ उपाध्याय की प्रकाश परिकल्पना, भारती डांग के नृत्य निर्देशन और रवि पारचा की मुखसज्जा ने प्रस्तुति का आकर्षण बढ़ाया।

इस अवसर पर अकादमी के निदेशक तरुण राज ने बताया कि उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी ने पहली बार संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार से अनुदान दिए जाने का अनुरोध किया था। पहले ही अनुरोध पर संस्कृति मंत्रालय ने अपनी 44वीं बैठक में उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी को सात दिवसीय नाट्य समारोह कराने के लिए अनुदान स्वीकृत कर दिया था। इस प्रथम वृहद आयोजन को राष्ट्रीय नाट्य समारोह का स्वरूप देते हुए पूरे देश से हिन्दी नाट्य संस्थाओं को आमंत्रित किया गया है। हास्य और सामाजिक सरोकार की नाट्य प्रस्तुतियां सात दिनों तक इन्द्रधनुष के सात रंगों से इस समारोह को सजाएंगी। रंगमंच के रसिक इसका निःशुल्क आनंद उठा सकेंगे। इस नाट्य समारोह के दौरान मंचित किये जाने वाले सभी नाटकों की पूर्व प्रस्तुतियों से सम्बन्धित चित्रों की प्रदर्शनी भी लगायी जाएगी और सेल्फी प्वाइंट अन्य आकर्षण है। इस आयोजन को उत्तर प्रदेश संस्कृति के प्रमुख सचिव मुकेश कुमार मेश्राम, उत्तर प्रदेश संस्कृति के विशेष सचिव आनन्द कुमार, उत्तर प्रदेश संस्कृति के निदेशक शिशिर के मार्गदर्शन से आयोजित किया जा रहा है।

इस क्रम में मंगलवार 14 मार्च को डॉ.अखिलेश चन्द्र के लिखे ‘हंसुली’ नाटक का मंचन, आजमगढ़ की समूहन कला संस्थान की ओर से राजकुमार शाह के निर्देशन में किया जाएगा।

Check Also

प्रयागराज कोर्ट ने उमेश पाल केस में माफिया अतीक अहमद को उम्रकैद की सजा, भाई खालिद अजीम को बरी किया

प्रयागराज की एमपी-एमएलए कोर्ट ने माफिया से नेता बने अतीक अहमद को 2006 के उमेश …