वाणिज्य मंत्रालय के ONDC एडवाइजरी काउंसिल से प्रवीन खंडेलवाल का इस्तीफा, नैतिकता के आधार पर लिया फैसला

ट्रेडर्स संगठन CAIT के सेक्रेटरी जनरल प्रवीन खंडेलवाल (Praveen Khandelwal) ने ONDC एडवाइजरी काउंसिल से इस्तीफा दे दिया है. इस कमिटी का गठन सरकार को सलाह देने के लिए किया गया था. यह कमिटी डिजिटल कॉमर्स (OND) के मुद्दे पर व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार को सलाह देती है. बता दें कि डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटर्नल ट्रेड यानी DPIIT की तरफ से ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) का गठन किया गया था. इसका मकसद इस चेन को पूरी तरह डिजिटाइज करना था. इससे कंज्यूमर्स का अनुभव बेहतर होता. ONDC प्रोजेक्ट के तहत स्टैंडर्ड ऑपरेशन, सप्लायर्स, लॉजिटिक्स जैसे काम को डिजिटाइज किया जाता.

CAIT की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि प्रवीन खंडेलवाल ने कंफ्लिक्ट ऑफ इंट्रेस्ट से बचने के लिए ONDC एडवाइजरी काउंसिल से रिजाइन देने का फैसला किया है. नैतिक आधारों का हवाला देते हुए और हितों के टकराव से बचने के लिए, कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने आज ओएनडीसी सलाहकार परिषद से इस्तीफा दे दिया है, जो की ई कॉमर्स प्लैटफॉर्म को सशक्त बनाने के लिए वाणिज्य मंत्रालय की सबसे महत्वपूर्ण समिति में से एक है.

ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म के रूप में काम करेगा ONDC

खंडेलवाल ने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को भेजे अपने त्याग पत्र में, कहा है कि “चूंकि ओएनडीसी प्लैटफॉर्म कल लॉन्च किया गया था और अब यह जल्द ही एक ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म के रूप में संचालन करना शुरू कर देगा, मेरा विचार है कि मेरा सलाहकार परिषद के सदस्य के रूप में बना रहना नैतिकता के खिलाफ होगा और हितों के टकराव को जन्म देगा. उन्होंने कहा कि कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) जल्द ही अपना भी ई-कॉमर्स पोर्टल “भारत ई मार्केट” लॉन्च करने जा रहा है, जिसका टैगलाइन “मेरे लिए- मेरे देश के लिए” है और मैं बीईएम के लिए बाजार खंगालने और जमाने के लिए बाध्य हूं .

ONDC में शामिल रहना नैतिकता के खिलाफ

खंडेलवाल ने आगे कहा कि “नैतिक मूल्यों को कायम रखते हुए और एक हितधारक होने के नाते, मेरे लिए ओएनडीसी सलाहकार परिषद के सदस्य के रूप में जारी रहना नैतिक और उचित नहीं होगा, जिस प्रकार इंफोसिस के नंदन नीलकेनी जो एमेजॉन का समर्थन कर रहे हैं और आदिल जैनुभाई मौजूद हैं जो कि रिलायंस के बोर्ड मेंबर हैं. खंडेलवाल वाणिज्य मंत्रालय में कोविड के पहले दौर के दौरान 2020 में ओएनडीसी के अवधारणा के दिनों से ही साथ जुड़े हुए थे.

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