शरीर पर हर गांठ फुंसी नहीं होती, कैंसर का भी हो सकता है संकेत, ऐसे समझें फर्क
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में खान-पान और लाइफस्टाइल की वजह से चेहरे या शरीर के किसी हिस्से पर फोड़े-फुंसी निकलना एक आम बात है. हम अक्सर इसे नजरअंदाज कर देते हैं, यह सोचकर कि यह एक-दो दिन में ठीक हो जाएगा. लेकिन हर बार ऐसा सोचना सही नहीं होता, क्योंकि कभी-कभी एक मामूली सी दिखने वाली गांठ किसी गंभीर बीमारी, यहां तक कि कैंसर का भी पहला संकेत हो सकती है.
चिंता की बात यह है कि शुरुआत में कैंसर की गांठ और सामान्य फुंसी दिखने में लगभग एक जैसे लग सकते हैं. लेकिन थोड़ी सी जागरूकता से आप इन दोनों के बीच के बड़े अंतर को आसानी से समझ सकते हैं. आइए, इसे आसान भाषा में समझते हैं.
सबसे पहले, जानें मामूली फोड़ा-फुंसी क्या है?
फोड़ा या फुंसी आमतौर पर त्वचा में होने वाला एक बैक्टीरियल इन्फेक्शन है. इसके लक्षण बहुत साफ होते हैं:
- यह लाल रंग का होता है और इसमें सूजन होती है.
- इसे छूने पर या दबाने पर तेज दर्द होता है.
- इसके अंदर मवाद (पस) भर जाता है, जो कुछ दिनों में पककर बाहर निकल सकता है.
- दर्द होना एक तरह से अच्छा संकेत है, क्योंकि यह बताता है कि आपका शरीर इन्फेक्शन से लड़ रहा है.
- कभी-कभी इसके साथ हल्का बुखार या कमजोरी भी महसूस हो सकती है.
यह कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है या उसका आकार बदलने लगता है.
कैंसर की गांठ को कैसे पहचानें?
चिंता की बात तब होती है जब कोई गांठ इन सामान्य लक्षणों से अलग व्यवहार करती है. कैंसर की गांठ के लक्षण कुछ इस तरह के होते हैं:
- दर्द नहीं होता: यह सबसे बड़ा और पहला अंतर है. कैंसर की गांठ में शुरुआत में बिल्कुल भी दर्द नहीं होता.
- सख्त होती है: यह त्वचा के नीचे एक सख्त और ठोस महसूस होती है, जबकि फुंसी मुलायम होती है.
- हिलती नहीं है: अगर आप इसे उंगली से दबाकर हिलाने की कोशिश करेंगे, तो यह अपनी जगह से नहीं हिलती, क्योंकि यह त्वचा के अंदर गहराई तक जुड़ी होती है.
- धीरे-धीरे बढ़ती है: फुंसी कुछ ही दिनों में बढ़कर पक जाती है, जबकि कैंसर की गांठ हफ्तों या महीनों तक धीरे-धीरे अपना आकार बढ़ाती रहती है.
- पस नहीं होता: इसमें फुंसी की तरह कोई मवाद या पस नहीं बनता.
कभी-कभी इसके आसपास की त्वचा का रंग बदल सकता है या वहां हल्की खुजली और जलन हो सकती है.
एक नजर में समझें दोनों का अंतर
| लक्षण | फोड़ा-फुंसी | कैंसर की गांठ |
| दर्द | शुरुआत से ही तेज दर्द होता है. | शुरुआत में दर्द नहीं होता. |
| बनावट | मुलायम होती है और दब सकती है. | सख्त, ठोस और पत्थर जैसी महसूस होती है. |
| गति | दबाने पर अपनी जगह से हिल सकती है. | अपनी जगह पर स्थिर रहती है, हिलती नहीं है. |
| बढ़ने की गति | कुछ ही दिनों में तेजी से बढ़ती है. | कई हफ्तों या महीनों में धीरे-धीरे बढ़ती है. |
| मवाद (Pus) | इसमें पस भरा होता है. | इसमें पस नहीं होता. |
| त्वचा का रंग | आसपास की त्वचा लाल और सूजी हुई दिखती है. | आमतौर पर त्वचा का रंग सामान्य रहता है. |
डॉक्टर के पास कब जाना है?
डरने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी बरतना बहुत जरूरी है. अगर आपको अपने शरीर पर कोई ऐसी गांठ दिखे जो:
- 2-3 हफ्तों से ज्यादा समय से बनी हुई है और ठीक नहीं हो रही.
- लगातार आकार में बड़ी हो रही है.
- जिसमें बिल्कुल भी दर्द नहीं है और जो छूने में सख्त है.
- जिसके आसपास की त्वचा का रंग बदल रहा है.
ऐसी किसी भी स्थिति में घरेलू नुस्खों पर समय बर्बाद करने के बजाय तुरंत डॉक्टर से सलाह लें. किसी भी बीमारी का अगर शुरुआती दौर में पता चल जाए, तो उसका इलाज बहुत आसान हो जाता है.