NIA ने बांग्लादेश से हो रहे नकली नोट की तस्करी मामले में ISI की भूमिका की जांच शुरू की, पकड़ाया था 7.35 करोड़ रुपये की नकली नोट

भारत में आईएसआई के समर्थित तस्करों की मदद से पाकिस्तान में छपे नकली भारतीय मुद्रा (Indian currency) की अवैध शिपमेंट को रोकने के लिए एनआईए (NIA) ने जांच शुरू कर दी है. एनआईए अधिनियम 2008 के तहत दी गई शक्तियों के आधार पर विदेशी धरती पर जाकर मामले की जांच करेगी. गुवाहाटी शाखा कार्यालय में तैनात एनआईए के इंस्पेक्टर अर्पण साहा (Inspector Arpan Saha) को मामले की जांच के लिए मुख्य जांच अधिकारी (सीआईओ) के रूप में नियुक्त किया गया है. माना जा रहा है कि भारत की आर्थिक स्थित अस्थिर करने के लिए पाकिस्तान की इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (Inter Services Intelligence) की यह योजना है. अपराध की भयावहता और इसके अंतरराष्ट्रीय संबंधों का संज्ञान लेते हुए गृह मंत्रालय ने पिछले महीने एनआईए को अधिनियम 2008 के तहत मामले की जांच करने का निर्देश दिया है.

26 नवंबर 2021 को बांग्लादेश पुलिस दो तस्करों को किया गिरफ्तार

गृह मंत्रालय के आदेश के बाद एनआईए ने पिछले साल 30 दिसंबर को मामला दर्ज किया और साहा को मामले की जांच शुरू करने का निर्देश दिया. 26 नवंबर 2021 को बांग्लादेश पुलिस ने भारतीय मुद्रा (एफआईसीएन) की तस्करी करने वाले फातिमा अख्तर आपी और उनके सहयोगी एसके एमडी अबू तालेब से पकड़कर पूछताछ की. जिसके बाद मामले का खुलासा हुआ था. चूंकि मामला भारत से जुड़ा था, इसलिए बांग्लादेश के अधिकारियों ने भारत से संपर्क किया और जानकारी साझा की. बांग्लादेशी अधिकारियों ने भारत को बताया कि  उन्होंने बांग्लादेश में कस्बा के निवासी आपी से 500 के नोट का 7.35 करोड़ रुपये का नकली भारतीय मुद्रा जब्त किया है. इसके बाद आपी और तालेब को बांग्लादेश पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. दोनों आरोपियों से पूछताछ के बाद पता चला कि दो पाकिस्तानी नागरिक सुल्तान और सफी ने नकली नोट बांग्लादेश भेजा था.

मामले की गहन जांच शुरू

एनआईए ने प्राथमिकी में उल्लेख किया है कि यह संदेह है कि भारत की अर्थव्यवस्था को अस्थिर करने के लिए पाकिस्तान में स्थित अंतरराष्ट्रीय तस्करों द्वारा भारत में तस्करी के लिए पड़ोसी देश में नकली नोट को छापा गया है. वहीं बांग्लादेश पुलिस ने पिछले साल 26 नवंबर को बांग्लादेश के स्पेशल पावर एक्ट 1974 की धारा 2 (एस) ए (बी) के तहत मामला दर्ज किया था. एनआईए ने कहा कि उसने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत बांग्लादेश पुलिस द्वारा साझा किए गए इनपुट के आधार पर मामला दर्ज किया है और मामले की गहन जांच शुरू की गई है.

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