New Telecom Bill: कानून के दायरे में आएंगे WhatsApp, FB Messenger, Telegram कॉल्स, OTT मनमानी नहीं होगी

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दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि नया दूरसंचार विधेयक दूरसंचार उद्योग को पुनर्जीवित करने और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक रोडमैप प्रदान करेगा। बिल में दूरसंचार सेवा के हिस्से के रूप में ओटीटी शामिल है। सरकार ने बिल में टेलीकॉम और इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स की फीस और पेनल्टी माफ करने का प्रावधान प्रस्तावित किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और ओटीटी की मनमानी पर रोक लगाने के लिए सरकार एक नया टेलीकॉम ड्राफ्ट बिल लेकर आ रही है । इस बारे में दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि नया दूरसंचार अधिनियम दूरसंचार उद्योग को पुनर्जीवित करने और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक रोडमैप प्रदान करेगा।

पब्लिक अफेयर्स फोरम ऑफ इंडिया के एक कार्यक्रम में बोलते हुए, आईटी मंत्री ने कहा कि अगले डेढ़ से दो वर्षों में, सरकार डिजिटल नियामक ढांचे को पूरी तरह से बदल देगी। जिसका उद्देश्य सामाजिक उद्देश्यों को संतुलित करना है। वैष्णव ने यह भी कहा कि अगले 25 साल समावेशी विकास की अवधि होगी और निवेश विकास का प्राथमिक साधन होगा। नए बिल के अनुसार, व्हाट्सएप, जूम और गूगल डुओ जैसी कॉलिंग और मैसेजिंग सेवाएं प्रदान करने वाले ओटीटी को देश में काम करने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता हो सकती है।

नए कानून में ओटीटी भी शामिल है

बिल में दूरसंचार सेवा के हिस्से के रूप में ओटीटी शामिल है। अब तक सभी तरह के सोशल मीडिया ऐप और ओटीटी प्लेटफॉर्म फ्रेमवर्क में नहीं थे, जिससे मनमाने कंटेंट को आसानी से चलाया जा सकता था। लेकिन अब सरकार ने इसे नियंत्रित करने की पूरी तैयारी कर ली है. सरकार ने बिल में टेलीकॉम और इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स की फीस और पेनल्टी माफ करने का प्रावधान भी प्रस्तावित किया है। मंत्रालय ने यह भी प्रस्ताव किया है कि यदि कोई दूरसंचार या इंटरनेट प्रदाता अपना लाइसेंस सरेंडर करता है तो शुल्क की वापसी का प्रावधान है।

इन सेवाओं को और सख्त किया जाएगा

नए दूरसंचार अधिनियम के आने से, इंटरनेट आधारित संचार सेवा, इन-फ्लाइट और समुद्री कनेक्टिविटी, पारस्परिक संचार सेवा, वॉयस कॉल, वीडियो कॉल सहित कई प्रकार की सेवाएं अधिनियम के दायरे में आ जाएंगी। आपको बता दें कि व्हाट्सएप, सिग्नल और कई अन्य प्लेटफॉर्म ओवर टॉप सर्विस के अंतर्गत आते हैं।

व्हाट्सएप, फेसबुक मैसेंजर सहित कई ऐप इंटरनेट कॉलिंग और मैसेजिंग की सुविधा के लिए जाने जाते हैं। ये ऐप टेलीकॉम कंपनियों की तरह ही सेवाएं प्रदान करते हैं। टेलीकॉम कंपनियों को भारत सरकार से लाइसेंस लेना होता है। लेकिन अब सरकार प्रस्ताव दे रही है कि कॉलिंग और मैसेजिंग सेवाएं प्रदान करने वाले ऐप्स को भी लाइसेंस लेना पड़ सकता है। इसके लिए दूरसंचार विधेयक 2022 के मसौदे में ओटीटी को दूरसंचार सेवाओं के हिस्से के रूप में शामिल किया गया है। बुधवार को जारी मसौदा विधेयक के मुताबिक संबंधित कंपनियों को दूरसंचार सेवाओं और दूरसंचार नेटवर्क के लिए लाइसेंस लेना होगा।

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