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नौसेना को नहीं मिलेगा तीसरा विमानवाहक पोत

नई दिल्ली :  बजट की कमी के चलते सैन्य मामलों के विभाग ने नौसेना के लिए तीसरे विमानवाहक पोत निर्माण की योजना को टाल दिया है। बताया जा रहा है कि नौसेना की तरफ से लगातार चीन की चुनौती का जिक्र कर तीसरे पोत की मांग की जा रही थी। नौसेना के पास अभी एक विमानवाहक पोत आईएनएस- विक्रमादित्य है। इसे रूस से खरीदा गया था जिसका नाम वहां गोर्शकोव था। एक विमानवाहक पोत आईएनएस- विराट को कुछ समय पूर्व सेवानिवृत्त कर दिया गया है।

जबकि एक पोत आईएनएस- विक्रांत निर्माणाधीन है। अगले दो-तीन सालों में इसके संचालन में आने की उम्मीद है। नौसेना प्रमुख करमबीर सिंह का कहना हैं कि चीन के पास अगले कुछ वर्षो में कम से कम पांच विमानवाहक पोत हो जाएंगे और 2050 तक उसकी नौसेना के पास दस ऐसे विमानवाहक पोत होंगे। लेकिन भारत के पास सिर्फ दो पोत रहेंगे। वह चाहते हैं एक विमानवाहक पोत पश्चिमी तट पर और एक पूर्वी तट पर हमेशा तैनात रहे, एक अन्य समुद्र व अन्य अभियानों में सक्रिय रहे। दो पोत तभी तैनात रह सकते हैं, जब एक अतिरिक्त पोत हो।

क्योंकि जब किसी एक पोत की मरम्मत हो तो तीसरे का इस्तेमाल किया जा सके। सूत्रों के अनुसार का कहना है कि तीसरे प्रस्तावित पोत के निर्माण पर 70-80 हजार करोड़ की लागत आ रही है। फिर उसके लिए 50 लड़ाकू विमान भी खरीदे जाएंगे जिन्हें मिलाकर डेढ़ लाख करोड़ से भी अधिक लागत आएगी। एक पोत पर तीन-चार हजार कार्मिकों की भी तैनाती की जाती है। कुल मिलाकर यह परियोजना दो लाख करोड़ से भी ज्यादा महंगा है। मौजूदा बजट आवंटन में इस दिशा में बढ़ना संभव नहीं है। इसलिए इस परियोजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।

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