Navratri 2020:19 साल बाद शारदीय नवरात्र पर बन रहा है दुर्लभ संयोग, जानें कब से शुरु हो रहे है मां दुर्गा के शुभ दिन

हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व होता है। साल में नवरात्रों की संख्या चार होती है, जिनमें दो प्रमुख नवरात्रे — चैत्र नवरात व शारदीय नवरात्र कहलाते हैं, जबकि दो गुप्त नवरात्रि होतीं हैं। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा आराधना की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना के साथ ही नवरात्रि आरंभ हो जाते हैं। साथ ही विभिन्न पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर मां शक्ति की आराधना की जाती है।

नवरात्रि पर मां दुर्गा के धरती पर आगमन का विशेष महत्व होता है। देवीभागवत पुराण के अनुसार नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा का आगमन भविष्य में होने वाली घटनाओं के संकेत के रूप में भी देखा जाता है। हर वर्ष नवरात्रि में देवी दुर्गा का आगमन अलग-अलग वाहनों में सवार होकर आती हैं और उसका अलग-अलग महत्व होता है। वहीं जानकार देवी के प्रस्थान के वाहन को भी काफी महत्वपूर्ण मानते हैं।

नवरात्र के दिन बन रहे है शुभ संयोग

पंडितों के अनुसार इस बार शारदीय नवरात्र सर्वार्थसिद्ध योग के साथ शुरू हो रहे हैं। ये योग 17 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 52 मिनट से 18 अक्टूबर सुबह 6 बजकर 24 मिनट तक रहेगा। इसके साथ ही दूसरे दिन त्रिपुष्कर योग भी रहेगा।

किस दिन होता है कौन सा वाहन
– अगर नवरात्रि का आरंभ सोमवार या रविवार के दिन होता है तब इसका अर्थ होता है माता हाथी पर सवार होकर आएंगी।
– अगर शनिवार और मंगलवार के दिन नवरात्रि का पहला दिन होता है तो माता घोड़े पर सवार होकर आती हैं।
– वहीं गुरुवार या शुक्रवार के दिन नवरात्रि आश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि पर मां का आगमन होता तो माता डोली की सवारी करते हुए भक्तों को आशीर्वाद देने आती हैं।
– बुधवार के दिन नवरात्रि का पहला दिन होने पर माता नाव की सवारी करते हुए धरती पर आती हैं।

शारदीय नवरात्रि 17 अक्टूबर से आरंभ
इस वर्ष शारदीय नवरात्रि करीब एक महीने की देरी से शनिवार 17 अक्टूबर से आरंभ हो रहे हैं। शनिवार के दिन नवरात्रि का पहला दिन होने के कारण इस दिन मां दुर्गा घोड़े की सवारी करते हुए पृथ्वी पर आएंगी। देवी भागवत पुराण के अनुसार जब माता दुर्गा नवरात्रि पर घोड़े की सवारी करते हुए आती हैं।

बांग्ला पंचांग के अनुसार इस साल मां दुर्गा का आगमन घोड़े पर हो रहा है। इसका अर्थ ‘छत्रभंग स्तुरंगमे’ बताया गया है. इससे शासन और शासकों के लिए उथल-पुथल की स्थिति और शासन परिवर्तन का योग बनता है। इसके अलावा घोड़े पर आती हैं तो पड़ोसी देशों से युद्ध की आशंका बढ़ जाती है।

वहीं ज्योतिष के जानकारों के अनुसार भी 23 सितंबर को हुआ राहु का परिवर्तन सामरिक दृष्टि से भारत के लिए कुछ परेशानी वाला हो सकता है। क्यों वृषभ का राहु हमेशा ही भारत को युद्ध की स्थिति में ले जाता है। ऐसे में इस बार भी राहु का वृषभ में आना पाकिस्तान से युद्ध चाहे वह लिमिटेड वॉर ही क्यों न हो, कि ओर इशारा करता दिख रहा है। पूर्व में भी राहु के वृषभ में आने पर भारत का पाकिस्तान से युद्ध हो चुका है। भले ही युद्ध में जीत भारत की ही होगी, लेकिन युद्ध होना ही परेशानी का कारण रहेगा।

शारदीय नवरात्रि 2020 : देवी मां का भैंसे पर होगा प्रस्थान, जानिये भैंसे पर वापसी का अर्थ…
एक ओर जहां शारदीय नवरात्रि 2020 में मां दुर्गा का अश्व पर आगमन होगा वहीं देवी मां दुर्गा पूजा के पूरे कार्यक्रम के बाद भैंसे पर प्रस्थान करेंगी। रविवार या सोमवार को देवी भैंसे की सवारी से जाती हैं, ऐसे में जानकारों के अनुसार देवी मां की वापसी का अर्थ कई तरह से समझा जा सकता है।

शशि सूर्य दिने यदि सा विजया महिषागमने रुज शोककरा।
शनि भौमदिने यदि सा विजया चरणायुध यानि करी विकला।।
बुधशुक्र दिने यदि सा विजया गजवाहन गा शुभ वृष्टिकरा।
सुरराजगुरौ यदि सा विजया नरवाहन गा शुभ सौख्य करा॥

देवा मां का भैंसे पर प्रस्थान के संबंध में मान्यता है कि यह देश में रोग और शोक बढ़ता है। इस लिहाज से माता का आगमन अति शुभ और गमन अशुभ होगा।
नवरात्रि में भैंसे की बलि : मान्यता है कि जिस महिषासुर को देवी दुर्गा ने लड़ाई में मार गिराया, वो भैंसे से दुनिया घूमता था. महिषासुर पर जीत के उपलक्ष्य में कुछ जगहों पर उसकी सवारी की बलि देने की प्रथा है। ज्योतिष में भैंसे को असूर माना गया है, ऐसे में देवी मां का भैंसे पर गमन रोग और शोक के साथ ही कुछ हद तक युद्ध की ओर भी इशारा करता है।

कलश स्थापना शुभ मुहूर्त 

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 58 मिनट से लेकर 9 बजे तक है।

जानें किस दिन की जाएगी किस देवी की पूजा

17 अक्टूबर, प्रतिपदा – बैठकी या नवरात्र का पहला दिन- घट/ कलश स्थापना – शैलपुत्री
18 अक्टूबर, द्वितीया – नवरात्र 2 दिन तृतीय- ब्रह्मचारिणी पूजा
19 अक्टूबर, तृतीया – नवरात्र का तीसरा दिन- चंद्रघंटा पूजा
20 अक्टूबर, चतुर्थी – नवरात्र का चौथा दिन- कुष्मांडा पूजा
21 अक्टूबर, पंचमी – नवरात्र का 5वां दिन- सरस्वती पूजा, स्कंदमाता पूजा
22 अक्टूबर, षष्ठी – नवरात्र का छठा दिन- कात्यायनी पूजा
23 अक्टूबर, सप्तमी – नवरात्र का सातवां दिन- कालरात्रि, सरस्वती पूजा
24 अक्टूबर, अष्टमी – नवरात्र का आठवां दिन-महागौरी, दुर्गा अष्टमी ,नवमी पूजन
25 अक्टूबर, नवमी – नवरात्र का नौवां दिन- नवमी हवन, नवरात्र पारण, दुर्गा विसर्जन, विजयादशमी 

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