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April 14 2026 09:15 pm

Murder Case : अमित जोगी को उम्रकैद 23 साल पुराने रामावतार जग्गी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

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News India Live, Digital Desk: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड (2003) में सोमवार (6 अप्रैल 2026) को न्यायपालिका की ओर से एक ऐतिहासिक फैसला आया है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत जोगी के पुत्र और पूर्व विधायक अमित जोगी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास (Life Imprisonment) की सजा सुनाई है। हाई कोर्ट के इस फैसले ने निचली अदालत के 2007 के उस आदेश को पलट दिया है, जिसमें अमित जोगी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया था।

23 साल लंबी कानूनी लड़ाई का अंत

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के तत्कालीन कोषाध्यक्ष रामावतार जग्गी की 4 जून 2003 को रायपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस समय राज्य में अजीत जोगी की सरकार थी।

निचली अदालत का फैसला (2007): विशेष सीबीआई अदालत ने इस मामले में 28 आरोपियों को दोषी ठहराया था, लेकिन अमित जोगी को 'संदेह का लाभ' देते हुए बरी कर दिया गया था।

हाई कोर्ट का ताजा फैसला (2026): मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने सीबीआई (CBI) की अपील और मृतक के पुत्र सतीश जग्गी की पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए अमित जोगी को हत्या की साजिश रचने का दोषी पाया।

तीन हफ्ते के भीतर आत्मसमर्पण का आदेश

अदालत ने सजा सुनाने के साथ ही अमित जोगी को तीन सप्ताह (21 दिन) के भीतर संबंधित अदालत में आत्मसमर्पण (Surrender) करने का निर्देश दिया है। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मामले की गंभीरता और साजिश के पुख्ता प्रमाणों को देखते हुए निचली अदालत द्वारा बरी किए जाने का फैसला कानूनन सही नहीं था।

सतीश जग्गी का भावुक बयान: "पिता को मिली सच्ची श्रद्धांजलि"

रामावतार जग्गी के पुत्र सतीश जग्गी, जिन्होंने अपने पिता को न्याय दिलाने के लिए दो दशकों तक लंबी लड़ाई लड़ी, ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, "सत्य की जीत हुई है। आज मेरे पिता को सच्ची श्रद्धांजलि मिली है। हमने 23 सालों तक न्याय का इंतजार किया और अंततः कानून ने मुख्य आरोपी को सजा दी।"

अमित जोगी ने फैसले को बताया 'अन्याय', जाएंगे सुप्रीम कोर्ट

दूसरी ओर, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के अध्यक्ष अमित जोगी ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर पोस्ट कर इसे 'प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध' बताया। जोगी का आरोप है कि उन्हें हाई कोर्ट में अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया और महज 40 मिनट की सुनवाई में फैसला सुना दिया गया। उन्होंने कहा कि उन्हें देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) पर पूरा भरोसा है और वे इस आदेश को वहां चुनौती देंगे।

क्या था मामला?

तारीख: 4 जून 2003

स्थान: मौदहापारा, रायपुर (छत्तीसगढ़)

पीड़ित: रामावतार जग्गी (NCP नेता और विद्याचरण शुक्ल के करीबी)

आरोप: राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चलते हत्या की साजिश रची गई।

जांच: पहले राज्य पुलिस और फिर सीबीआई ने इस केस की जांच की थी।