Modi-Trump Trade Deal : मोदी-ट्रंप की 'महाडील से बौखलाया ड्रैगन ट्रंप के टैरिफ वार में फंसा चीन
News India Live, Digital Desk: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत के बाद भारत के लिए टैरिफ दरों को 25% से घटाकर 18% कर दिया गया है। जहाँ भारत इस फैसले का स्वागत 'ऐतिहासिक' बताकर कर रहा है, वहीं चीन ने इसे अमेरिका की 'विभाजनकारी नीति' करार दिया है। चीन के सरकारी मीडिया और विशेषज्ञों ने ट्रंप के उन दावों पर भी सवाल उठाए हैं जिनमें भारत द्वारा रूसी तेल छोड़ अमेरिकी तेल खरीदने की बात कही गई है।
चीनी विशेषज्ञों की नजर: "अमेरिका की लेनदेन वाली कूटनीति"
चीन के सरकारी अखबार 'ग्लोबल टाइम्स' और बीजिंग के रणनीतिकारों ने इस डील को लेकर कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं:
अस्थिर गठबंधन: चीनी विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की नीतियां 'ट्रांसेक्शनल' (लेनदेन वाली) हैं। उनका तर्क है कि अमेरिका आज भारत को जो रियायतें दे रहा है, वह कल वापस भी ली जा सकती हैं।
रणनीतिक स्वायत्तता पर सवाल: चीन ने ट्रंप के उस दावे पर कटाक्ष किया है जिसमें कहा गया कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा। बीजिंग इसे भारत की संप्रभुता पर अमेरिकी दबाव के रूप में देख रहा है।
क्षेत्रीय असंतुलन: चीन को डर है कि भारत को मिलने वाली टैरिफ छूट (18%) उसे चीनी उत्पादों (जिन पर 34% टैरिफ है) के मुकाबले अमेरिकी बाजार में भारी बढ़त दिलाएगी।
टैरिफ का गणित: भारत 'इन', चीन 'आउट'
ट्रंप प्रशासन की नई नीति के बाद एशियाई देशों के लिए टैरिफ का अंतर अब काफी बढ़ गया है:
| देश | नया टैरिफ रेट (US द्वारा) | स्थिति |
|---|---|---|
| भारत | 18% | सबसे कम (बड़ी राहत) |
| पाकिस्तान | 19% | भारत से अधिक |
| इंडोनेशिया | 19% | मध्यम |
| चीन | 34% | सबसे अधिक (ट्रेड वार जारी) |
चीन की सबसे बड़ी चिंता: 'China + 1' स्ट्रेटेजी
भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन के अनुसार, इस डील से 'China + 1' नीति को फिर से पंख मिल गए हैं। चीन को डर है कि:
वैश्विक कंपनियां अब अपना मैन्युफैक्चरिंग बेस चीन से हटाकर तेजी से भारत शिफ्ट करेंगी।
सेमीकंडक्टर, एआई और फार्मा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारत, अमेरिका का मुख्य साझेदार बन जाएगा।
'पॉक्स सिलिका' (Pax Silica) जैसी अमेरिकी पहल चीन को तकनीक की दुनिया में अलग-थलग कर सकती है।