वैज्ञानिक विधि से की गई गेंदा की खेती से खुलेगा आर्थिक प्रगति का द्वार

21dl_m_36_21092022_1

बेगूसराय, 21 सितम्बर (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मंत्र को आत्मसात कर किसानों द्वारा परंपरागत खेती को छोड़ अब अंतर्वर्ती, आधुनिक और नई खेती शुरू कर मिसाल कायम किया जा रहा है। जिसके कारण बाजार कई मायनों में आत्मनिर्भर तथा लोकल फॉर वोकल हो रहा है।

इसी की एक कड़ी है गेंदा फूल, आज पूजा से लेकर सजावट तक में हर जगह गेंदा फूल की बड़ी डिमांड है। सिर्फ पूजा-पाठ नहीं अब तेजी से बढ़ रहे मुर्गा फार्म में भी गेंदा फूल की काफी डिमांड होने लगी है। भारत में फूल व्यवसाय के क्षेत्र में गेंदा फूल की खेती काफी महत्वपूर्ण स्थान रखती है। इस फूल का प्रयोग धार्मिक तथा सामाजिक अवसरों पर काफी बृहद रूप से किया जाता है।

ऐसे में किसान सितम्बर से दिसम्बर माह तक अपने खेतों में वैज्ञानिक तरीके से गेंदा फूल की खेती कर आने वाले त्योहार के मौसम में अच्छी कमाई कर सकते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक का कहना है कि गेंदा फूल का प्रयोग शादी, जन्मदिन, पूजा और त्योहार के अलावे सरकारी एवं निजी संस्थानों में आयोजित होने वाले विभिन्न समारोहों में काफी जोर-शोर से किया जाता है।

इतना ही नहीं इस फूल का प्रयोग आजकल मुर्गी के भोजन के रूप में भी बड़े पैमाने पर किया जाने लगा है। मुर्गियों को इस फूल का सेवन कराने से मुर्गी के अंडा की जर्दी का रंग काफी पीला हो जाता है और अंडा की गुणवत्ता बढ़ जाती हैं। किसान कोई भी खेती करते हैं तो नीलगाय और जंगली सूअर सहित अन्य जानवर मिलकर उसे बर्बाद कर देते हैं, जिससे किसानों की को बड़ी आर्थिक क्षति होती है। लेकिन गेंदा को कोई भी जानवर क्षति नहीं पहुंचाते हैं, जिससे इसकी खेती धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है।

गेंदा की खेती, पारंपरिक फसलों की तुलना में कई गुणा लाभ किसानों को दे सकता है। गेंदा फूल ना सिर्फ कम खर्च में अच्छा लाभ देता है, बल्कि जमीन की उपजाऊ शक्ति को बरकरार रखने में भी अहम भूमिका निभाता है, जिससे किसानों को दोहरा फायदा मिलता है। गेंदा फूल की खेती सर्दी, गर्मी और बरसात के सीजन में की जाती है तथा गेंदा फूल की खेती कोई भी किसान कर सकता है। अगर किसान हाईब्रिड किस्म के बीजों को लगाते हैं तो उसे करीब 30 से 35 हजार रुपए प्रति एकड़ खर्च आता है।

गेंदा फूल की मांग लोकल मार्केट में होने से किसानों को ज्यादा दौड़ धूप करने की भी जरूरत नहीं है। सितम्बर-अक्टूबर में की जाने वाली गेंदा फूल की खेती किसानों के लिए अत्यंत ही लाभकारी है। किसान गेंदा की उन्नत किस्में नारंगी पूसा, बसंती पूसा, शिराकोल आदि बेहतर उपज और आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। पूसा नारंगी 120 से 125 दिनों में फूल देने लगता है तथा यह 50 से 60 दिनों तक फूल देता रहता हैं।

इसकी उपज 25 से 30 टन प्रति हेक्टेयर होती है। इसके अलावे पूसा बसंती प्रभेद 140 से 45 दिनों में फूल देना शुरू करते हैं। किसान गेंदा के फूल की लड़ी बनाकर भी पर्व-त्योहार में अच्छी कमाई कर सकते हैं। गेंदा की रोपनी 40 गुणा 40 सेंटीमीटर की दूरी पर करना चाहिए। इसे टमाटर, बैंगन, परवल, मिर्च आदि सब्जियों के साथ भी मेढ़ पर लगाया जा सकता है।

Check Also

27dl_m_407_27092022_1

हत्या या आत्महत्या में उलझी पुलिस ने पति को भेजा जेल

बेगूसराय, 27 सितम्बर (हि.स.)। बेगूसराय में जुआ खेलने और जमीन बेचने से रोके जाने पर …