कई बड़े नेताओं ने पीएफआई को निशाना बनाया; युवाओं को सेना, अलकायदा, आईएसआईएस से जोड़ना था काम!

PFI-protest

पूरे देश में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर NIA की कार्रवाई के बाद PFI के प्लान B का पर्दाफाश हो गया है. इस खुलासे में इस्लामिक संगठन के नापाक मंसूबों का खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि, उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में पीएफआई ने एजेंसियों की कार्रवाई से बचने के लिए नए नामों से कई विंग तैयार की हैं. इनमें शामिल हैं- सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया, राष्ट्रीय महिला मोर्चा, कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया, अखिल भारतीय इमाम परिषद, ऑल इंडिया लीगल काउंसिल, रिहैब इंडिया फाउंडेशन और नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन। ये संगठन सरकारी एजेंसियों के नियंत्रण से बचने और एजेंडा फैलाने के लिए बनाए गए हैं।

पीएफआई ने अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए इन संस्थानों को पहले ही तैयार कर लिया था, जिसके जरिए वह देश में अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखता है। हालांकि एजेंसियों को इस बारे में पता चलते ही उन्होंने इसका खुलासा कर दिया। एनआईए की तैयारियों से साफ है कि साजिशकर्ता इस संगठन का कोई कोना नहीं छोड़ना चाहते। जब भी पीएफआई से निपटा जाता है तो यह अपने आप में एक और चेहरा लेकर आता है।

सूत्रों के मुताबिक इस कार्रवाई की जानकारी सभी पीएफआई नेताओं को पहले से ही थी। इसलिए उसी के अनुरूप तैयारी की गई। पीएफआई नेताओं ने भारतीय जांच एजेंसियों को गुमराह करने के लिए कई अन्य शाखाएं शुरू की थीं। इसका पुख्ता सबूत TV9 भारतवर्ष के पास मौजूद है। एक सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक इन तमाम अलग-अलग विंगों के जरिए पीएफआई जांच एजेंसियों की आंखों में धूल झोंककर अपनी राष्ट्रविरोधी योजनाओं को अंजाम देने में लगा हुआ है.

युवाओं का ब्रेनवॉश

रिपोर्ट के मुताबिक, पीएफआई सामाजिक कार्यों के नाम पर फंड इकट्ठा करता है और उसका इस्तेमाल असामाजिक और राष्ट्र विरोधी प्रचार के लिए करता है। यह स्कूलों, कॉलेजों, मदरसों और मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में युवाओं का ब्रेनवॉश करने और उनके कट्टरपंथी विचारों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबंधित संगठनों में भर्ती करने का भी काम करता है। पीएफआई न केवल अपने सदस्यों को कट्टरपंथी बनाता है बल्कि उन्हें हिंसा फैलाने का प्रशिक्षण भी देता है।

संगठन ने गैर-मुसलमानों के खिलाफ दंगों के दौरान उन्हें मानव मिसाइल के रूप में इस्तेमाल करने के उद्देश्य से दक्षिण भारत में 200 से अधिक आतंकवादियों को प्रशिक्षित किया है। आपको बता दें कि यूएपीए मामले के आरोपियों की मदद के लिए पीएफआई विभिन्न तरीकों से जमा राशि का इस्तेमाल कर रहा था। जानकारी के मुताबिक पीएफआई ने कई बड़े नेताओं को निशाने पर लिया था. इस संगठन का उद्देश्य युवाओं को लश्कर-ए-तैयबा, AQIS (भारतीय उपमहाद्वीप में अल कायदा) और ISIS (इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया) जैसे आतंकवादी संगठनों से जोड़ना था।

एनआईए की कार्यवाही के खिलाफ प्रदर्शन की संभावनाएं

पीएफआई पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी की कार्रवाई के खिलाफ आज देश के कई हिस्सों में दंगे होने की आशंका है। इसे देख सुरक्षा एजेंसियां ​​के साथ-साथ पुलिस भी काफी सतर्क हो गई है और कई शहरों में सुरक्षा व्यवस्था तेज कर दी गई है. बता दें कि एजेंसी ने देश के 15 राज्यों में पीएफआई के 93 ठिकानों पर छापेमारी कर बड़ी संख्या में आतंकी गतिविधियों में शामिल लोगों को गिरफ्तार किया है. छापेमारी के दौरान कई जगहों से धारदार हथियार बरामद किए गए हैं.

पीएफआई प्रभावित राज्यों में बढ़ाई गई सुरक्षा

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी PFI पर NIA ने छापा मारा है. उनके साथ जुड़े लोगों द्वारा कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन किए जाने की संभावना है। पीएफआई प्रभावित राज्यों में विरोध प्रदर्शन की आशंका के बीच सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पुलिस-प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतने के आदेश दिए गए हैं। इस बीच पीएफआई ने एनआईए की कार्रवाई को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि एजेंसियों की ओर से उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश की जा रही है.

अधिकारियों के अनुसार, आतंकवादियों को धन मुहैया कराने, उनके लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था करने और प्रतिबंधित संगठनों में शामिल होने के लिए लोगों को लुभाने की गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों के ठिकानों पर छापेमारी की गई है।

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