चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर रखनी चाहिए ‘लक्ष्मण रेखा’: केंद्र

नई दिल्ली: चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया पर सवाल उठाने और उसमें सुधार की बात को लेकर सुप्रीम कोर्ट और केंद्र के बीच टकराव की आशंका है.

 बिजली की गति से चुनाव आयुक्त अरुण गोयल की नियुक्ति पर जहां सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार किया है, वहीं केंद्र सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट को अपनी ‘लक्ष्मण रेखा’ दिखाई है.

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और मुख्य न्यायाधीश वाले पैनल के गठन की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए हाल ही में चुने गए नए चुनाव आयुक्त अरुण गोयल की नियुक्ति पर सवाल उठाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने आगे मुख्य न्यायाधीश की सदस्यता वाली एक समिति को चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए सर्वोत्तम विधि के रूप में सुझाया। हालांकि, केंद्र सरकार ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में न्यायपालिका की कोई भूमिका नहीं हो सकती है. उन्हें इन मामलों में दखल नहीं देना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के सुझाव पर केंद्र ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश को नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करना न्यायपालिका का अनावश्यक हस्तक्षेप है. अगर ऐसा होता है तो यह शक्तियों के बंटवारे का स्पष्ट उल्लंघन होगा। यह मानना ​​कि चयन प्रक्रिया में मुख्य न्यायाधीश को शामिल करने से प्रक्रिया पारदर्शी हो जाएगी, गलत है।

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