LAC: पैंगोंग सिर्फ एक शुरुआत, स्थिति सामान्य करने के लिए चीन को और बहुत कुछ करने की जरूरत

पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील (Pangong Lake) के किनारे भारत और चीन के बीच डिसइंगेजमेंट प्रक्रिया (LAC Disengagement) पूरी हो चुकी है. इसके बाद दोनों देशों के बीच 10वें दौर की कमांडर स्तर की बातचीत में LAC पर अन्य मुद्दों के समाधान के लिए हामी भरी गई है. लेकिन डिसइंगेजमेंट प्रक्रिया पर करीब से नजर रखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि पैंगोंग में पीछे हटना सिर्फ एक शुरुआत है और द्विपक्षीय संबंधों को पूरी तरह से सामान्य बनाने के लिए चीन को और अधिक प्रयास करने की जरूरत है.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक अधिकारी ने नाम ना बताने की शर्त पर कहा कि द्विपक्षीय या बहुपक्षीय स्तर पर भविष्य में चीन के अगले कदमों पर करीब से नजर रखा जाएगा. उन्होंने कहा, “ट्रेन ट्रैक से उतर गई थी. हमने इसे वापस ट्रैक पर लाने की प्रक्रिया शुरू की है. आगे देखते हैं कि चीजें कहां पहुंचती हैं.” दोनों देशों ने 10वें दौर की सैन्य बातचीत के बाद हालांकि बयान में कहा था कि दोनों पक्ष अपने नेताओं के बीच बनी सहमति, अपना संवाद और संपर्क जारी रखने, जमीन पर स्थिति को स्थिर और नियंत्रित करने तथा शेष मुद्दों का संतुलित और व्यवस्थित तरीके से समाधान करने पर भी सहमत हुए.

अधिकारी ने कहा कि कई चीजें गलत हो चुकी हैं और चीजों को सही करने की सिर्फ शुरुआत हुई है. आगे बढ़ने की बात करने से पहले चीजों को ट्रैक पर लाना होगा. उन्होंने कहा कि अभी इसके कोई संकेत नहीं मिल रहे कि चीन के साथ अगले दौर की बातचीत कब होगी, चाहे वह राजनयिक स्तर पर हो या सैन्य स्तर पर.

चीन ने हाल में ब्रिक्स समिट की मेजबानी के लिए भारत को समर्थन देने की बात कही, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि इसे ज्यादा सावधानी से देखने की जरूरत है. पूर्व राजदूत अशोक सज्जनहार ने कहा, “चीन को जानना चाहिए कि गलवान के बाद चीजें इतनी सामान्य नहीं हो सकती है.” हाल ही में चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा था कि वह पांच उभरती अर्थव्यवस्थाओं के संगठन ब्रिक्स में सहयोग को मजबूत करने के लिए नई दिल्ली के साथ मिलकर काम करेगा. हम सहयोग के लिए रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

सैन्य बातचीत का साझा बयान

भारत और चीन ने 10वें दौर की सैन्य वार्ता के बाद रविवार को एक संयुक्त बयान में कहा था कि पैंगोंग झील क्षेत्र से सैन्य वापसी, LAC पर अन्य मुद्दों के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. ऐसा माना जाता है कि इस बातचीत में भारत ने तनाव कम करने के लिए हॉट स्प्रिंग्स, गोगरा और डेपसांग क्षेत्रों से सैनिकों की जल्द वापसी पर जोर दिया. 16 घंटे तक चली 10वें दौर की बातचीत के बाद बयान में कहा गया कि पैंगोंग इलाके से सैनिकों की वापसी ने बातचीत के नए रास्ते खोले हैं.

क्या हुआ LAC डिसइंगेजमेंट समझौते में

भारत और चीनी सैन्य कमांडर के समझौते के मुताबिक, दोनों पक्ष सभी जगहों पर पुरानी स्थिति को कायम करेंगे जो मई 2020 में शुरू हुए विवाद से पहले की थी. 11 फरवरी को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में बताया था कि डिसइंगेजमेंट पर समझौते के तहत, चीन अपनी सेना की टुकड़ियों को पैंगोंग लेक के नॉर्थ बैंक में फिंगर-8 के पूरब की दिशा की तरफ रखेगा और इसी तरह भारत भी अपने सेना की टुकड़ियों को फिंगर-3 के पास अपने परमानेंट बेस धन सिंह राणा पोस्ट पर रखेगा. इसी तरह साउथ बैंक एरिया में भी दोनों पक्षों द्वारा डिसइंगेजमेंट की जाएगी.

राजनाथ सिंह ने कहा था कि यह भी तय हुआ है कि दोनों पक्ष नॉर्थ बैंक पर अपनी सेना की गतिविधियां जिसमें परंपरागत स्थानों की पैट्रोलिंग भी शामिल है, को अस्थायी रूप से स्थगित की जाएगी. पैट्रोलिंग तभी शुरू की जाएगी, जब सेना राजनयिक स्तर पर आगे बातचीत कर रास्ता बनेगा. पैंगोंग लेक के किनारे पहाड़ की आकृति कुछ इस तरह से है कि ये अंगुलियों की तरह दिखती है और इसीलिए इन्हें फिंगर कहा जाता है. इनकी संख्या आठ है.

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