मकर संक्रांति पर्व शुक्रवार को: बच्चों और युवाओं में पतंगबाजी का क्रेज, बाजार में सजी दुकानें

जयपुर, 13 जनवरी (हि.स.)। मकर संक्रांति पर्व का एक दिन शेष रह गया है। राजधानी जयपुर के मुख्य बाजारों सहित अन्य बाजारों में पतंगबाजी के लिए दुकानें पूरी तरह सज गई। दुकानदारों ने ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए नई-नई वैरायटी की पतंगें मंगवाई। साथ ही बच्चों व युवाओं की पसंद के अनुसार पतंगों को दुकान के बाहर सजाया गया है। पतंगबाजी के शौकीन पतंग और मजबूत मांझा खरीदने दुकानों पर पहुंच रहे हैं। वहीं इस बार तरह-तरह रंगीन पतंग खरीदी जा रही है। गत वर्ष से इस बार 10 से 15 प्रतिशत महंगाई देखने को मिल रही है।

राजधानी जयपुर में मकर संक्रांति के पूर्व ही युवाओं और बच्चों में उत्साह देखने को मिल रहा है और आसमान में रंग बिरंगी पतंगे नजर आने लगी हैं। वहीं मंदिरों सहित घरों में पर्व को लेकर तैयारियां की जा रही है। इधर मकर संक्रांति के पर्व पर फिल्मी सितारों, चिड़िया, जलपरी और झालर नुमा पतंगे युवाओं व बच्चों पसंद आ रही रही है। वहीं चांद, दिल भी नजर आ रहे है।

पतंग व्यापारियों ने बताया कि बाजार में बरेली के धागे के साथ प्रत्येक पतंग की दर 60 रुपए से 600 रुपये तक है। पतंग के साथ धागा नहीं लेने पर कीमत 5 से 50 रुपये है। फिल्मी स्टार सलमान खां,शाहरुख खान,अक्षय कुमार, प्रियंका चौपड़ा समेत कई अभिनेता के फोटो वाली पतंगे भी बाजार में बिक रही है, जो हर किसी को आकर्षण कर रहती है। वहीं पतंग बनाने वालों ने कोरोना महामारी से बचने के लिए पतंग भी बनाई है। ये पतंगें बहुत खास हैं।

चारदीवारी में सजा पतंगों का सबसे बड़ा बाजार

इधर शहर की चारदीवारी में पतंगों का सबसे बड़ा बाजार सजा है जहां पूरी रात पतंगे बिकती दिखेगी। बाजार में अंतिम दिन पतंगे सबसे ज्यादा बिकती है। शुक्रवार को पतंग की ब्रिकी बेहद कम रहेंगी। लोग आज रात में ही सुबह छतों पर होने वाले दंगल की तैयारी में जुट चुके है। मकर संक्रांति पर्व शुक्रवार को है। इस दिन अलसुबह से ही शहर छतों पर चढ़ दिखेगा। हर किसी के हाथ में डोर और निगाहें आसमान की ओर होगी। आसमान सुबह से रंग-बिरंगी पतंगों से सतरंगी नजर आएगा। वो काटा के शोर के साथ चहुंओर बॉलीवुड संगीत की धुनें गूंज लगेंगी।

उम्मीद से कम ब्रिकी: नोटबंदी, जीएसटी और मंदी का असर पतंग बाजार पर भी दिखा। चारदीवारी में थोक विक्रेताओं की उम्मीद से कम ब्रिकी हुई। थोक विक्रेता मांगीलाल ने बताया कि इस बार पहले से 30 प्रतिशत कम आर्डर दिया है तो उसमें भी अभी ब्रिकी परवान नहीं रही। शनिवार और रविवार को पतंग बिकने के बाद पता चलेगा कि मंदी की मार से इस व्यवसाय पर कितना असर पड़ा है। वहीं गली -माहौलों में ब्रिकी परवान नहीं दिखी। जेब में मंदी का असर पतंगों पर दिखा। पतंगों का क्रेज दंगल बाज और बच्चों में दिखा जो दुकानों पर खरीददारी करते दिखे।

चाय फीणी पकौड़ों के साथ शुक्रवार को दिखेगी धूम

शुक्रवार को सुबह से छतों पर अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा। जहां क्या बच्चा, क्या महिला, क्या बड़ा सभी हाथ में डोर लेकर पतंग उड़ाते दिखेंगे। वहीं गर्मागर्म पकौड़े, फणियों के साथ चाय दिनभर चलेंगी। शादी के बाद पहली संक्रांति मनाने वालों के लिए यह खास और यादगार रहेगा। वहीं उम्मीद उन गरीबों को भी है जो शुक्रवार को गुब्बार लेकर बाजारों सहित गली—मोहल्लों में आएंगे। इस दिन हवा के गुब्बारे भी लोग आकाश में छोड़ते है तो शाम बाद लालटेन आसमा को जगमगाएगी। वही संक्रांति पर रंग-बिरंगी आतिशबाजी के साथ पर्व का समापन होगा।

लुभा रहा है तिलकुट का बाजार

मकर संक्रांति पर व्यंजनों में शामिल रहने वाला तिलकुट लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। चौक-चौराहों से लेकर गली-मोहल्लों में ठेले पर इसकी जमकर बिक्री हो रही है। व्यापारियों ने बताया कि तिल से कई तरह के तिलकुट बनाये जाते हैं। उनमें चीनी व गुड़ से बने तिलकुटों के अलावे गजक, रेबरी व तिलकतरी मुख्य होते हैं। लोग स्वादानुसार अपनी पसंद के तिलकुट खरीद रहे हैं। उन्होंने बताया कि शीतलहर शुरू होते ही तिलकुट की बिक्री शुरू हो जाती है जो फरवरी माह तक बिकती है।

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