भारत विरोधी आख्यानों को बेअसर करने के लिए जेएनयू सही जगह : उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली, 02 फरवरी (हि.स.)। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने छात्रों से गहन प्रश्न पूछने और भारत विरोधी बयानों को बेअसर करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भारत विरोधी आख्यानों को बेअसर करने के लिए जेएनयू सही स्थान है। वह शुक्रवार को यहां जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के सातवें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे।

यह देखते हुए कि समाज के लिए सबसे बड़ी चुनौती लोगों की अज्ञानता का फायदा उठाने वाले सुविज्ञ लोगों द्वारा उत्पन्न की जाती है, उपराष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि जेएनयू इसे नष्ट करने में संलग्न होने के लिए सही जगह है। उन्होंने कहा कि ऐसे झूठे आख्यान भारत और विदेशों में हमारे संवैधानिक संस्थानों को कलंकित करने, बदनाम करने और अपमानित करने की कोशिश करने वाले लोगों द्वारा फैलाए गए हैं।

उपराष्ट्रपति ने छात्रों से कहा कि वे ऐसे समय में बड़ी दुनिया में कदम रख रहे हैं, जहां देश में संपूर्ण शासन, सकारात्मक नीतियां और एक ऐसी अर्थव्यवस्था है, जो विश्व स्तर पर सम्मानित और मजबूत है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस प्रकार छात्रों के पास एक सक्षम प्रणाली होगी, जो उन्हें प्रतिभा और क्षमता का दोहन करने, महत्वाकांक्षाओं और सपनों को साकार करने की अनुमति देगी।

देश की मौजूदा स्थिति जहां किसी भी व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं माना जाता है, उपराष्ट्रपति ने कहा कि सत्ता के गलियारों को भ्रष्ट तत्वों से मुक्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा, “भ्रष्टाचार को अब पुरस्कृत नहीं किया जाता, कानून का सम्मान लागू किया जाता है।” समावेशी विकास के लिए सरकार की पहलों को ध्यान में रखते हुए धनखड़ ने कहा कि समाज तभी बदलेगा जब आप अंतिम व्यक्ति की देखभाल करेंगे।

22 जनवरी को अयोध्या में ‘राम लला’ के प्रतिष्ठा समारोह का जिक्र करते हुए, उपराष्ट्रपति ने “देश में जश्न के माहौल” की ओर ध्यान आकर्षित किया। यह कहते हुए कि 500 वर्षों का दर्द अभिषेक समारोह से दूर हो गया है, उन्होंने कहा, “महत्वपूर्ण बात यह है कि इसे कानून की स्थापित प्रक्रिया के माध्यम से धार्मिकता के प्रति प्रतिबद्धता के साथ पूरा किया गया।”

उपराष्ट्रपति ने भारत की ‘फ्रैजाइल फाइव’ अर्थव्यवस्थाओं में से एक होने से लेकर शीर्ष पांच वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में शुमार होने तक की यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि अब, आईएमएफ ने संकेत दिया है कि बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत की वृद्धि सबसे अधिक है। उपराष्ट्रपति ने जी-20 के अध्यक्ष के रूप में भारत के नेतृत्व की सराहना की।

इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुभाष सरकार, जेएनयू के चांसलर कंवल सिब्बल, जेएनयू की कुलपति प्रोफेसर शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित, जेएनयू संकाय सदस्य, छात्र और अन्य गण्यमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।