जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती सुधार की मांग को लेकर जामताड़ा पहुँची अभ्यर्थियों की न्याय यात्रा

जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती सुधार की मांग को लेकर जामताड़ा पहुँची अभ्यर्थियों की न्याय यात्रा

झारखंड के बेरोजगार युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों का सब्र अब धीरे-धीरे जवाब देता नजर आ रहा है। राज्य में पिछले कई वर्षों से लगातार लीक हो रहे प्रश्नपत्रों, अधर में लटकी भर्ती प्रक्रियाओं, जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) की परीक्षाओं में हो रही अंतहीन देरी से त्रस्त होकर अभ्यर्थियों ने अब सड़कों पर उतरकर आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। इसी कड़ी में राज्य भर में रोजगार और पारदर्शी भर्ती सुधार की मांग को लेकर निकाली जा रही एक विशेष छात्र न्याय यात्रा अपने सफर के दौरान ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नगरी जामताड़ा जा पहुँची। जामताड़ा पहुँचने पर स्थानीय युवाओं और छात्र संगठनों ने इस यात्रा का जोरदार स्वागत किया, जिसके बाद वहाँ एक विशाल जनसभा और विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया, जिसमें सरकार की नीतियों के खिलाफ युवाओं का भारी गुस्सा खुलकर सामने आया।

जामताड़ा में उमड़ी छात्रों की भीड़, सरकार पर बरसे युवा नेता

जामताड़ा जिले की धरती पर जैसे ही यह छात्र न्याय यात्रा दाखिल हुई, वैसे ही वहाँ हज़ारों की संख्या में प्रतियोगी छात्र और बेरोजगार युवा इकट्ठा हो गए। सभा को संबोधित करते हुए छात्र नेताओं और अभ्यर्थियों ने राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर तीखे हमले किए और आरोप लगाया कि चुनावी वादों के विपरीत सत्ता में आने के बाद युवाओं को सिर्फ झूठे आश्वासन मिले हैं। वक्ताओं ने कहा कि झारखंड का युवा आज डिग्री हाथ में लेकर दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है, क्योंकि यहाँ की चयन आयोग संस्थाएं परीक्षाएं आयोजित करने में पूरी तरह से विफल साबित हुई हैं। कभी पेपर लीक (Paper Leak) तो कभी कोर्ट कचहरी के चक्कर में फंसकर युवाओं के बहुमूल्य वर्ष बर्बाद हो रहे हैं, जिससे उनके भविष्य पर गहरा संकट मंडरा रहा है।

युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ और गंभीर प्रशासनिक लापरवाही के आरोप

अभ्यर्थियों का कहना है कि जेपीएससी और जेएसएससी जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं के माध्यम से होने वाली नियुक्तियों में पारदर्षिता का पूरी तरह से अभाव देखा जा रहा है। विज्ञापनों के निकलने से लेकर अंतिम परिणाम आने तक की प्रक्रिया इतनी लंबी और जटिल होती है कि एक छात्र की जवानी परीक्षा देते-देते ही निकल जाती है। जामताड़ा में प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार यदि सचमुच युवाओं की हितैषी होने का दावा करती है, तो उसे एक निश्चित समय-सीमा के भीतर सभी लंबित परीक्षाओं को पारदर्शिता के साथ पूरा कराना चाहिए और भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को जल्द अनसुना किया गया, तो यह आंदोलन सिर्फ जामताड़ा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे झारखंड के कोने-कोने में आग की तरह फैल जाएगा।

रोजगार और पारदर्शी नीतियों के बिना भविष्य अंधकारमय

झारखंड के इन युवा अभ्यर्थियों की यह यात्रा इस बात का स्पष्ट संदेश है कि अब राज्य का नौजवान अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो चुका है और वह सिस्टम की सुस्ती को और अधिक बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। शिक्षा और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों पर आधारित यह आंदोलन आने वाले समय में राज्य की राजनीति को भी गहरा प्रभावित कर सकता है। जब तक सरकार ठोस और जवाबदेह भर्ती नीतियां लागू नहीं करती, तब तक युवाओं का यह असंतोष थमता नजर नहीं आएगा। जामताड़ा से उठी इस बुलंद आवाज ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि झारखंड का युवा अब चुप बैठने वाला नहीं है, बल्कि वह अपने हक की लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक पूरी मजबूती के साथ लड़ने के लिए तैयार बैठा है।