सोयाबीन एक ऐसा फूड है जो दुनिया के लगभग हर हिस्से में खाया जाता है। सोयाबीन की फलियां (Edamame) सेहत के लिए बहुत अधिक गुणकारी होती हैं। हालांकि इनका सेवन अधिकतर पूर्वी एशिया में ही किया जाता है। हां सोयाबीन से बने, टोफू, सोया सॉस, सोया प्रोटीन और सोयाबीन ऑइल जैसे प्रॉडक्ट्स दुनियाभर में उपयोग किए जाते हैं। यहां जानें सोयाबीन की फलियों के उन फायदों के बारे में जो आपने पहले शायद ही कभी पढ़ें हों…

-सोयाबीन की फलियां प्रोटीन से भरपूर होती हैं। जितने प्रोटीन की जरूरत हमारे शरीर को डेली डायट में होती है, उसकी बड़ी मात्रा एक कटोरी सोया सब्जी से पूरी की जा सकती है। क्योंकि मानकों के हिसाब से 100 ग्राम सोयाबीन्स में 36 ग्राम प्रोटीन होता है।
– हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, जो लोग कई घंटों तक एक जगह बैठे रहकर काम करते हैं, उनमें पुरुषों को प्रतिदिन 56 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है। जबकि ऐसी जीवशैली का हिस्सा बनी महिलाओं को प्रतिदिन 46 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है।

-सोयाबीन की फलियां जब कच्ची होती हैं यानी जब वे हरी होती हैं और उस स्थिति में होती हैं कि उनकी सब्जी बनाई जा सके, तब वे अलग खूबियों से भरपूर होती हैं और जब वे सूख जाती हैं तो अलग गुणों से युक्त होती हैं। ऐसी स्थिति में इनका असर भी काफी अलग होता है।
-जैसे, कच्ची सोयाबीन फली में करीब 78 प्रतिशत फोलेट होता है तो पकी हुई सोयाबीन में करीब 14 प्रतिशत। जबकि आयरन की बात करें तो कच्ची फली में 13 प्रतिशत होता है पकी हुई फली में 29 प्रतिशत। कच्ची फली में विटमिन-K करीब 33 प्रतिशत होता है तो पकी हुई फलियों में 24 प्रतिशत।

दुनियाभर में हार्ट अटैक के बढ़े हुए मामलों के पीछे सबसे बड़ी वजह होती है, शरीर में कोलेस्ट्रॉल का बढ़ जाना। इस संबंध में हुई एक स्टडी में सामने आया कि यदि हर दिन 47 ग्राम सोयाबीन्स का सेवन किया जाए तो यह शरीर के कुल कोलेस्ट्रॉल को करीब 9 प्रतिशत और बेड कोलेस्ट्रॉल के लेवल को 13 प्रतिशत तक कम कर देती है।

जबकि एक अन्य रिसर्च में सामने आया कि सोयाबीन्स की फलियों से बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) का स्तर मात्र 3 प्रतिशत तक कम होता है। यह कहना मुश्किल है कि एलडीएल की इस मात्रा के कम होने पर हार्ट डिजीज का खतरा कम होता है या नहीं। लेकिन यूएस स्थित फूड ऐंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की तरफ से यह कहा गया है कि सोया प्रोटीन हार्ट डिजीज का खतरा कम करता है।

-50 से 55 साल की उम्र के बीच ज्यादातर महिलाओं में पीरियड्स बंद होने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इसी को मेनोपॉज के नाम से जाना जाता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोयाबीन की फलियों को अपनी डायट में शामिल कर महिलाएं इस दौरान होनेवाली समस्याओं को काफी कम कर सकती हैं।
-मेनोपॉज के दौरान महिलाओं में हॉट फ्लैशेज, बहुत अधिक पसीना आना, मूड स्विंग्स, चिड़चिढ़ापन जैसी समस्याएं होना सामान्य है। लेकिन इन्हें सोयाबीन्स के उपयोग से काफी हद तक कम किया जा सकता है। महिलाओं के शरीर की जरूरतें पुरुषों से अलग होती हैं।
-हालांकि हेल्थ एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि ये फलियां मेनोपॉज की स्थिति में हर महिला के लिए लाभकारी सिद्ध हों ऐसा जरूरी नहीं है। क्योंकि इनका लाभ पाने के लिए सबसे अधिक जरूरी है कि महिला के शरीर में गट बैक्टीरिया की संख्या अच्छी हो। तभी इन फलियों का पूरा लाभ मिल पाता है।

महिलाओं को मेनोपॉज के दौरान इन फलियों का पूरा लाभ मिले, इसके लिए जरूरी है, गट बैक्टीरिया का सही मात्रा में होना। वे आइसोफ्लेवॉन्स (isoflavones) नामक कैमिकल कंपाउंड से इक्वॉल कैमिकल कंपाउंड बनाते हैं, जिसके जरिए हमारे शरीर को सोयाबीन्स के सभी गुण मिल पाते हैं। जिन लोगों में इस तरह के बैक्टीरिया पाए जाते हैं, उन्हें इक्वॉल प्रड्यूसर कहा जाता है।

सोयाबीन की फलियां हड्डियों को कमजोर होने से रोकती हैं। पुरुषों को हेल्दी रखने में अलग तरह से भूमिका निभाती हैं। महिलाओं के लिए जहां मेनोपॉज की स्थिति में फलियां खास लाभकारी हो सकती हैं, वहीं कई स्टडीज में यह भी सामने आया है कि सोयाबीन की फलियां ब्रेस्ट कैंसर जैसी घातक समस्या को भी पनपने से रोकती हैं।

-एशिया के ज्यादातर हिस्सों में जहां सोयाबीन की फलियों की सब्जी बनाई जाती है या दाल और करी के साथ पकाया जाता है, वहीं पश्चिम में इन्हें उबालने के बाद नमक के साथ बनाने का चलन है।
-एशिया के ज्यादातर हिस्सों में जहां सोयाबीन्स की फलियां सब्जी मंडी में टोकरियों और ठेलों पर बिकती हैं, वहीं पश्चिम के ज्यादातर देशों में ये फ्रोजन फॉर्म में किराना स्टोर्स पर उपलब्ध होती हैं।

सोयाबीन की फलियां सेहत के लिए फायदेमंद होती हैं या खतरनाक, यह सवाल अक्सर पूछा जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि कुछ लोगों में सोयाबीन के नियमित उपयोग से थायरॉइड की समस्या होना माना जाता है। यह हर किसी के लिए या किसी क्षेत्र विशेष के लिए नहीं है। बल्कि अलग-अलग व्यक्ति की हेल्थ पर निर्भर करता है।