Indian Railways : उत्तराखंड को रेलवे की बड़ी सौगात, कोरोना संकट के बीच 4 धाम रेल नेटवर्क का काम युद्धस्तर पर जारी

देहरादून. उत्तराखंड को रेलवे की तरफ से जल्द ही बड़ी सौगात मिलने वाली है. राज्य में ऋषिकेश से कर्णप्रयाग के बीच रेल लाइन बनाने का काम तेजी से चल रहा है. 125 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन पर 12 स्टेशन होंगे जिनमें शिवपुरी, ब्यासी, देवप्रयाग, श्रीनगर, धारी देवी, रुद्रप्रयाग, गोचर और कर्णप्रयाग स्टेशन शामिल है. यह रेल लाइन ऋषिकेश, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली और कर्णप्रयाग से होकर गुजर रही है. इस रेल लाइन का 105 किलोमीटर भाग 17 सुरंगों और 16 पुल से होकर गुजर रहा है.

चार धाम परियोजना का पहला चरण जारी
प्राकृतिक तौर पर दुर्गम राज्य उत्तराखंड में ऋषिकेश में चंद्रभागा नदी पर देव प्रयाग में गंगा नदी परजबकि लक्षमौली, श्रीनगर और गोचर में अलकनंदा नदी पर पुल बन रहा है. यहां भारतीय रेल की सबसे लंबी रेल सुरंग भी तैयार हो रही है. जिसकी लंबाई 14.7 किलोमीटर है. यह प्रोजेक्ट चार धाम परियोजना का पहला चरण है, जिसमें रेल लाइन से केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री को जोड़ा जाना है. फिलहाल ऋषिकेश -कर्णप्रयाग रेल लाइन पर काम जारी है.16000 करोड़ रुपये की इस परियोजना में रेलकर्मी युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं. ऋषिकेश से कर्णप्रयाग जाने में सड़क के रास्ते 6 घंटे का वक्त लगता है, लेकिन रेल लाइन बनने के बाद इस दूरी को 3 घंटे में पूरा कर लिया जाएगा.

 

100 किलोमीटर प्रति घंटे की होगी ट्रेनों की रफ्तार
इस रूट पर ट्रेनों की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटे की होगी. उम्मीद की जा रही है कि साल 2023- 24 तक इस रेल लाइन को पूरा कर लिया जाएगा. उसके बाद 74000 करोड़ की लागत से चार धाम के अगले चरण का काम शुरू होगा. चार धाम प्रोजेक्ट के लिए कुल 281 किलोमीटर लंबी रेल लाइन बिछाई जानी है. जिनमें कर्ण प्रयाग से जोशीमठ के बीच 68 किलोमीटर कर्णप्रयाग से सोनप्रयाग के बीच 91 किलोमीटर लंबी लाइन, गंगोत्री और यमुनोत्री को जोड़ने के लिए डोईवाला से उत्तरकाशी के बीच 102 किलोमीटर लंबी और उत्तरकाशी से बड़कोट के बीच करीब 20 किलोमीटर लंबी रेल लाइन तैयार की जानी है.

 

रुकेगा पलायन
खास बात यह है कि उत्तराखंड राज्य चीन के साथ 345 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है. इस लिहाज से यह परियोजना सैन्य साजों सामान और सैनिकों के मूवमेंट के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण है. यहां उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जिले चीन की सीमा पर बसे हुए हैं. इसके अलावा बात करें तो इस रेल प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद उत्तराखंड में रोजगार, पर्यटन, तीर्थाटन, उद्योग और राफ्टिंग को बड़ा बढ़ावा मिलेगा और उससे भी ज्यादा जरूरी कि इस पहाड़ी राज्य से लगातार हो रहे पलायन को भी रोका जा सकेगा.

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