झारखंड गठन के 25 साल बाद भी युवाओं के हाथ खाली! हजारों सरकारी पद पड़े हैं धूल फांकने को मजबूर
अलग राज्य के रूप में झारखंड के गठन को ढाई दशक यानी पूरे 25 साल का लंबा समय बीत चुका है। जल, जंगल और जमीन की इस समृद्ध धरती के युवाओं ने इस उम्मीद के साथ अलग राज्य आंदोलन का सपना देखा था कि उन्हें अपने ही प्रदेश में मान-सम्मान और रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे। लेकिन कूटनीतिक और प्रशासनिक नजरिए से देखें तो आज भी जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक बनी हुई है। सूबे के युवाओं को आज भी सरकारी नौकरियों और स्थायी रोजगार के लिए एक लंबा और थका देने वाला इंतजार करना पड़ रहा है। राज्य सरकार के विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों में हजारों की संख्या में स्वीकृत पद खाली पड़े हैं, लेकिन उनके लिए होने वाली भर्ती परीक्षाओं की रफ्तार बेहद सुस्त है। रोजगार के इस बड़े और संवेदनशील मुद्दे को लेकर अब मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) की सरकार के खिलाफ चौतरफा और तीखा हमला बोल दिया है, जिसने सूबे के सियासी पारे को एक बार फिर सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।
विभिन्न सरकारी विभागों में खाली पड़े हैं हजारों पद, फाइलों में अटकी हैं नियुक्तियां
झारखंड के प्रशासनिक गलियारों और विभिन्न कर्मचारी चयन आयोगों से छनकर आ रहे आंकड़ों के मुताबिक, शिक्षा विभाग, गृह विभाग (पुलिस भर्ती), स्वास्थ्य विभाग और राजस्व विभाग जैसे प्रमुख क्षेत्रों में लंबे समय से बड़े पैमाने पर पद रिक्त पड़े हैं। कई परीक्षाओं के नोटिफिकेशन जारी होने के बावजूद या तो वे कोर्ट-कचहरी के चक्करों में फंस जाती हैं, या फिर उनकी नियमावली (Recruitment Rules) के विवादों के कारण लटकी रहती हैं। राज्य के लाखों शिक्षित बेरोजगार युवा सालों-साल रांची के लॉजों और पुस्तकालयों में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन अंतिम चयन सूची (Final Merit List) जारी न होने और परीक्षा लीक (Paper Leak) जैसे गंभीर विवादों के कारण उनकी उम्र सीमा खत्म होती जा रही है, जिससे युवाओं में भारी हताशा और निराशा का माहौल देखा जा रहा है।
विपक्ष का हेमंत सरकार पर तीखा हमला, कहा- चुनाव में किए गए वादे निकले पूरी तरह खोखले
इस ज्वलंत मुद्दे को लेकर विपक्ष के नेताओं ने सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर ली है। भाजपा और उसके सहयोगी दलों के प्रवक्ताओं ने सरकार के रोजगार दावों पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने युवाओं को हर साल पांच लाख नौकरियां देने का जो लोकलुभावन और बड़ा वादा किया था, वह पूरी तरह से कागजी और खोखला साबित हुआ है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार केवल संविदा और आउटसोर्सिंग के जरिए काम चला रही है, जबकि नियमित बहाली करने में उसकी नीयत साफ नहीं है। विपक्षी नेताओं ने चेतावनी दी है कि वे युवाओं के हक की इस लड़ाई को केवल विधानसभा के भीतर ही नहीं, बल्कि सड़क से लेकर सदन तक पूरी मजबूती के साथ लड़ेंगे और सरकार की इस कछुआ चाल को जनता के सामने बेनकाब करेंगे।
झारखंड के युवाओं का आक्रोश सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक आ रहा नजर
रोजगार और समय पर परीक्षाएं आयोजित न होने का यह विवाद अब केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं रह गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आए दिन झारखंड के युवाओं द्वारा #JharkhandEmployment और #JSSC_Exam जैसे हैशटैग ट्रेंड कराए जा रहे हैं, जहां वे अपनी पीड़ा बयां कर रहे हैं। कई बार छात्रों के विभिन्न संगठनों ने रांची की सड़कों पर उतरकर शांतिपूर्ण मार्च और डिजिटल विरोध प्रदर्शन भी किए हैं। युवाओं का साफ कहना है कि उन्हें चुनावी वादों या आश्वासनों की घुट्टी नहीं चाहिए, बल्कि पारदर्शी तरीके से परीक्षाओं का आयोजन और समय सीमा के भीतर ज्वाइनिंग लेटर (नियुक्ति पत्र) चाहिए। युवाओं का यह बढ़ता असंतोष आने वाले चुनावों में किसी भी राजनीतिक दल के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।
डैमेज कंट्रोल में जुटी सरकार, अधिकारियों को भर्ती प्रक्रिया तेज करने के कड़े निर्देश
विपक्ष के बढ़ते दबाव और युवाओं के भारी आक्रोश को भांपते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) भी अब पूरी तरह से एक्शन मोड में नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हाल ही में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के आला अधिकारियों के साथ एक हाई-लेवल समीक्षा बैठक की है। इस बैठक में मुख्यमंत्री ने साफ लहजे में हिदायत दी है कि भर्ती प्रक्रियाओं में आ रही तमाम तकनीकी और कानूनी अड़चनों को तुरंत दूर किया जाए। सरकार का दावा है कि वे युवाओं के भविष्य को लेकर पूरी तरह गंभीर हैं और बहुत जल्द राज्य में बड़े पैमाने पर पारदर्शी नियुक्तियों का एक महा-अभियान शुरू किया जाएगा, ताकि युवाओं का भरोसा जीता जा सके। अब देखना यह होगा कि सरकार के इन कड़े निर्देशों का असर जमीन पर कितनी जल्दी दिखाई देता है।