सीवान में जून माह में सामान्य वर्षापात से 52 प्रतिशत कम हुई बारिश , किसान परेशान

सीवान, 23 जून ( हि. स .)। जिले में रोहिणी एवं मृगडाह नक्षत्रों में सामान्य से भी कम बारिश होने और नहरों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंचाने से खेती पिछड़ रही है । खेतों में धान का बिचड़ा डालने का कार्य भी पिछड़ गया है । जून माह में सामान्य में वर्षापात की तुलना में जिले में 52 प्रतिशत कम बारिश हुई है । इससे किसान परेशान हैं । लक्ष्य की अपेक्षा अब तक 80 प्रतिशत धान का बिचड़ा ही डाला जा सका है । नहरों में भी जरूरत के मुताबिक पानी नहीं पहुंचाने से किसानों की समस्या बढ़ गई है ।

उल्लेखनीय है कि सीवान जिले में 91 हजार हेक्टेयर में धान की खेती होती है , वर्षा कम होने से धान की फसल प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है।जिले में जून माह में सामान्य बारिश 81.7 एमएम होनी चाहिए , जबकि 39.8 एमएम बारिश ही अब तक हुई है । इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है । जिले में 9100 हेक्टेयर में धान का बिचड़ा डालने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है । अब तक 80 फीसदी खेतों में ही बिचड़ा डाला गया है ।

रघुनाथपुर के सक्रिय किसान सलाहकार नवीन पाण्डेय ने बताया कि रोहिणी एवं मृगडाह नक्षत्र के बीत जाने के बाद बुधवार से आद्रा नक्षत्र की शुरुआत हो गयी । इस नक्षत्र में शत – प्रतिशत धान का बिचड़ा डाल दिया जाता है । वैसे किसान निजी बोरिंग से धान का बिचड़ा डालना महंगा सौदा साबित हो रहा है।बोरिंग से खेतों में डाले गए धान का बिचड़ा झुलस रहा है । चमकती धूप से नर्सरी का पानी गरम हो जा से रहा है । उसमें पैर रखना मुश्किल हो जा रहा है ।

उन्होंने कहा कि सीवान के अग्रणी किसानों ने रोहिणी नक्षत्र के शुरुआती दौर मे ही डीजल पंप एवं मोटर चलाकर खेतों में धान का बिचड़ा डाल दिए हैं , ताकि समय से बिचड़ा तैयार होने पर धान की रोपनी भी पहले निपट जाए लेकिन , तीखी धूप एवं लू के कारण झुलस रहे धान के बिचड़े को देखकर किसान चिंतित दिख रहे हैं ।

जिले के किसानों का कहना है कि अगर इसी तरह तीखी धूप एवं लू का कहर कुछ दिन और जारी रहा तो खेतों में डाला गया धान का बिचड़ा झुलसकर नष्ट हो जाएगा । तब हम किसानों को खरीफ की खेती के लिए दोबारा बिचड़ा डालना पड़ेगा , जिसे तैयार होने में विलंब होने के कारण धान की रोपनी का काम पिछड़ जाएगा । इससे उपज प्रभावित होगी ।

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