Rajasthan : प्रदेश में साल 2021 में दुष्कर्म के 6337 मामले दर्ज, पुलिस ने 43% मामले माने झूठे…पॉक्सो के 7000 मामले लंबित

राजस्थान (Rajasthan) के अलवर से एक मूकबधिर नाबालिग के साथ गैंगरेप (Alwar Gangrape Case) और बर्बरता ने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया है. बीते 4 दिनों में राजस्थान में इस तरह की तीसरी घटना सामने आने से जनता में सरकार के प्रति आक्रोश है. बता दें कि अलवर की गैंगरेप की मूकबधिर पीड़िता का ऑपरेशन बुधवार को जयपुर के जेके लॉन अस्पताल (jk loan hospital jaipur) में किया गया. डॉक्टरों के मुताबिक नाबालिग (Minor Girl Gangrape) को बेहद गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था और बच्ची उस समय लहुलुहान अवस्था में थी. अस्पताल में 7 डॉक्टरों की टीम के नेतृत्व में पीड़िता का दोपहर करीब ढाई घंटे तक ऑपरेशन चला.

ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची को आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया है और फिलहाल उसकी हालत नाजुक बनी हुई है. बच्ची का ऑपरेशन होने के बाद जेके लॉन अस्पताल के अधीक्षक डॉ अरविंद शुक्ला (jk loan dr arvind shukla) ने मीडिया को जानकारी दी कि बच्ची के अंदरूनी हिस्से में काफी गहरे जख्म मिले हैं और प्राइवेट पार्ट पर किसी नुकीली चीज से जबरदस्त प्रहार किया गया है. फिलहाल बच्ची डॉक्टरों की देखरेख में अस्पताल में भर्ती है.

वहीं इस घटना के सामने आने के बाद एक बार फिर राजस्थान में महिला अत्याचार और बालिकाओं के साथ बलात्कार की घटनाओं पर सरकार और पुलिसिया तंत्र पर सवाल उठने लगे हैं. मालूम हो कि अलवर में हुई इस वीभत्स घटना के 24 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ अभी खाली है. पुलिस ने बीते 24 घंटों में सैकड़ों सीसीटीवी फुटेज खंगाले लेकिन दरिंदों का कोई सुराग नहीं लगा है.

इसके अलावा बुधवार को पीड़िता के परिजनों से मिलने के लिए नेताओं का जमावड़ा लगा रहा. अस्पताल में महिला एवं बाल विकास मंत्री ममता भूपेश, बाल आयोग की अध्यक्ष संगीता बेनीवाल, मंत्री टीकाराम जूली, मंत्री शकुंतला रावत और स्वास्थ्य सचिव वैभव गलारिया पहुंचे. वहीं सरकार की तरफ से पीड़िता को 3.5 लाख की आर्थिक सहायता भी दी गई है.

राजस्थान हुआ शर्मसार : वसुंधरा राजे

वहीं इस घटना पर गहलोत सरकार की निंदा करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा कि अलवर में मूक-बधिर नाबालिग बालिका से दुष्कर्म के बाद पुलिया पर फेंकने की घटना ने ना सिर्फ राजस्थान को शर्मसार किया है, बल्कि कांग्रेस सरकार की लचर कानून व्यवस्था की पोल भी खोल दी है. प्रदेश में बेटियां आए दिन दरिंदों की हवस का शिकार हो रही हैं, लेकिन सरकार शून्य हो गई है.

 

राजे ने आगे लिखा कि, नारी स्वाभिमान के पर्याय राजस्थान में बेटियों पर हो रहे अत्याचार को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में देश में न.1 बन चुके राजस्थान को शोषण मुक्त बनाने के लिए कांग्रेस सरकार को सख्त कदम उठाने चाहिए.

इसके अलावा भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि अलवर में नाबालिग के गैंगरेप की घटना वीभत्स है और मानवता को शर्मसार करने वाली है, ईश्वरीय देन से नाबालिग तो मूकबधिर है, लेकिन राजस्थान की गहलोत सरकार नीति और नीयत से गूंगी बहरी है, जिसको पीड़िता की चीखें सुनाई नहीं दे रही हैं और दरिंदे पुलिस की पहुंच से बाहर हैं. राजस्थान भाजपा ने इस मामले में पीड़िता को न्याय दिलवाने के लिए एक कमेटी भी गठित की है.

 

साल 2021 में दुष्कर्म के 6337 मामले, 2020 की तुलना में 19 फीसदी बढ़ोतरी

निर्भया कांड के बाद देशभर में राज्यों की पुलिस ने बलात्कार के मामलों को दर्ज करने में फुर्ती दिखाई है लेकिन इन मामलों में दोषियों को सजा तक पहुंचाना अहम होता है. राजस्थान पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक साल 2021 में प्रदेश भर में महिलाओं के साथ बलात्कार के 6337 मामले दर्ज किए गए जो कि साल 2022 में दर्ज मामलों की तुलना में 19.3 फीसदी ज्यादा है. 2020 में बलात्कार 5310 मामले पुलिस ने दर्ज किए थे.

वहीं 2021 में पुलिस ने 2377 मामलों में एफआर लगाई यानि उन्हें सबूतों के अभाव या अन्य कारणों से झूठा माना गया. इसके अलावा 3125 मामलों में पुलिस ने चालान पेश किया जबकि 825 मामलों में अभी जांच जारी है. वहीं आंकड़ों पर पुलिस का यह तर्क रहता है कि हर मामले दर्ज किए जाने से आंकड़ों में इतना उछाल दिखाई देता है.

राजस्थान में पॉक्सो एक्ट के तहत 7000 मामले लंबित

बालिकाओं पर अत्याचार के मामले में स्पेशल पॉक्सो एक्ट के तहत भी राजस्थान काफी पीछे हैं. जहां पॉक्सो एक्ट के तहत एक साल में मामले की सुनवाई की जानी चाहिए वहीं एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान की पॉक्सो कोर्ट में फिलहाल 7000 मामले लंबित हैं जिन पर सुनवाई होनी बाकी है. इसके अलावा भरतपुर जैसे जिले में कुछ मामलों में 7-8 साल से सुनवाई हो रही है.

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