कोरोना की दूसरी लहर का असर:कठोर लॉकडाउन लगा तो नौकरियों में फिर होगी भारी छंटनी, बेरोजगारी की दर 8.6% पर पहुंची

  • पिछले साल की तरह इस साल भी सख्त लॉकडाउन लगाने की बात हर राज्य कर रहे हैं
  • नौकरियों की छंटनी शहरी क्षेत्रों में अधिक गंभीर समस्या है, जहां यह 10% के करीब है

अगर देश में कठोर लॉकडाउन लगता है तो नौकरियों में एक बार फिर भारी छंटनी हो सकती है। देश में 11 अप्रैल को समाप्त हफ्ते में बेरोजगारी दर भी बढ़ कर 8.6% पर पहुंच गई है। दो हफ्ते पहले यह दर 6.7% पर थी।

लॉकडाउन फिर बनेगा नौकरियों की छंटनी का बड़ा कारण

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) द्वारा तैयार रोजगार के नए आंकड़ों के अनुसार, वायरस संक्रमण में रिकॉर्डतोड़ वृद्धि को रोकने के लिए राज्यों द्वारा लगाए जा रहे एक-एक कर लॉकडाउन आने वाले दिनों में नौकरियों में छंटनी का एक बड़ा कारण बनने जा रहे हैं। नौकरियों की छंटनी शहरी क्षेत्रों में अधिक गंभीर समस्या है, जहां यह 10% के करीब है। कोरोना के संक्रमण को कंट्रोल करने के लिए पिछले साल की तरह इस साल भी सख्त लॉकडाउन लगाने की बात हर राज्य कर रहे हैं।

24 घंटे में कोरोना के 1.69 लाख मामले आए

देश में पिछले 24 घंटे में एक लाख 69 हजार 914 मामले सामने आए। इसमें टॉप पर महाराष्ट्र है जहां 63 हजार से ज्यादा मरीज आए हैं। इसके बाद दिल्ली, गुजरात, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश हैं। यानी देश की आर्थिक राजधानी के साथ बड़े राज्य भी कोरोना की चपेट में बुरी तरह आ गए हैं। महाराष्ट्र सहित कई राज्यों ने अभी आंशिक लॉकडाउन के उपाय किए हैं, पर इस हफ्ते में कई राज्यों में पूरा लॉकडाउन लग सकता है। इसमें महाराष्ट्र में आज या कल फैसला हो सकता है।

भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर

भारत अब कोरोना के मामले में ब्राजील को पीछे छोड़कर दूसरे स्थान पर आ गया है। यहां अब तक कुल 1.35 करोड़ लोग संक्रमित हो चुके हैं। कोरोना की इस दूसरी लहर की मार राज्यों के हेल्थ केयर सिस्टम पर पड़ी है। उन्हें ना चाहते हुए भी सख्त लॉकडाउन लगाने की तैयारियां करनी पड़ रही है। इससे भी रोजी-रोटी पर नया संकट पैदा हो गया है। कई शहरों से तो प्रवासी मजदूर ट्रेनों में खचाखच भर कर अपने गांव वापस लौटने लगे हैं, जो यह बताता है कि उनके समक्ष अब नौकरी का संकट उत्पन्न हो गया है।

महाराष्ट्र में पूरा लॉकडाउन लग सकता है

आर्थिक राजधानी महाराष्ट्र जो वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित है, अब वीकेंड लॉकडाउन के बाद और सख्त लॉक डाउन लगाने पर विचार कर रहा है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में रात का कर्फ्यू चल रहा है। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी है कि अगर इसकी मेडिकल सुविधाओं पर बोझ बढ़ता है तो और सख्त लॉकडाउन लगाया जा सकता है।

पिछले साल लोग घरों में कैद हो गए थे

गौरतलब है कि पिछले साल जब लॉकडाउन लगाया गया था तो लोग अपने-अपने घर में बंद हो गए थे और इससे करोड़ों लोगों को नौकरियों से हाथ धोना पड़ा था। इसमें प्रवासी मजदूर भी शामिल थे। वह ट्रेन से या पैदल चलकर घर लौट गए थे। हालांकि जब लॉकडाउन के प्रतिबंधों में धीरे-धीरे ढील देनी शुरू हुई तो अर्थव्यवस्था पटरी पर आती दिखी। जनवरी-फरवरी तक ऐसा लग रहा था कि कोरोना का सफाया हो चुका है। पर जिस तरह से पिछले 2 महीने से मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है लोगों को अब डर सता रहा है कि कहीं फिर से वही माजरा ना दोहराया जाए।

IHS Markit के एक सर्वे के अनुसार सितंबर 2020 से के बाद एक बार फिर से नौकरियां छोड़ने की रफ्तार काफी तेजी से बढ़ी है। लोगों में एक तरह का निराशा का माहौल पैदा हो रहा है। रिजर्व बैंक के कंज्यूमर कॉन्फिडेंस सर्वे में भी नौकरियों पर निराशावाद बढ़ता दिख रहा है ।

लंबे समय तक लॉकडाउन चला तो रिवर्स माइग्रेशन होगा

बेंगलुरु में सोसायटी जनरल जीएससी प्राइवेट लिमिटेड के अर्थशास्त्री कुणाल कुंडू ने कहा कि लंबे समय तक चलने वाला रात का कर्फ्यू संभवतः रिवर्स माइग्रेशन का एक और कारण बन सकता है। नौकरियों का निर्माण पहले भी एक चुनौती थी, अब भी एक चुनौती है। दरअसल पिछले 1 हफ्ते से मुंबई, पुणे, नासिक जैसे शहरों से प्रवासी मजदूरों का पलायन शुरू हो चुका है। बड़ी-बड़ी कंपनियों ने कर्मचारियों को फिर से घर से काम करने को कह दिया है। जो ऑफिसेस हाल में खुले थे, उन्होंने फिर से बंद कर दिया है। सबसे ज्यादा दिक्कत कंस्ट्रक्शन, रेहड़ी, ठेला और इस तरह के रोजाना वाले कामों पर हो रही है।

 

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