सेब की खेती पर पाना चाहते हैं 50 प्रतिशत सब्सिडी तो जल्द करें आवेदन, आपके पास है सिर्फ 3 दिन का समय

भारत में सबे की खेती (Apple Farming) सामान्य तौर पर जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में होती है. धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ रहा है और उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों के किसान (Farmers) भी सेब की खेती कर रहे हैं. अन्य राज्यों में भी सेब की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकारें योजना चला रही हैं. बिहार सरकार (Bihar Government) भी सेब की खेती करने पर कुल खर्च का 50 प्रतिशत सब्सिडी के तौर पर देगी. अगर आप भी इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं तो जल्द ही आवेदन कर दें, क्योंकि सिर्फ तीन दिन का समय ही बचा है.

 

बिहार में सेब की खेती की संभावना को देखते हुए कृषि विभाग (Agriculture Department) ने इस साल विशेष उद्यानिक फसल योजना (Special Horticulture Cropping Scheme) के तहत पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 7 जिलों में सेब की खेती की योजना शुरू की है. विशेष उद्यानिक फसल योजना के तहत सरकार ने इस साल कुछ जिलों में सेब की खेती कराने का लक्ष्य रखा है. भागलपुर, वैशाली और बेगूसराय में 2-2 हेक्टेयर में खेती की जाएगी जबकि मुजफ्फरपुर, औरंगाबाद, वैशाली, कटिहार और समस्तीपुर में एक-एक हेक्टेयर में खेती की योजना है. इसके लिए किसानों से 15 जनवरी तक आवेदन मंगाए गए हैं. सेब की खेती की लागत इकाई प्रति हेक्टेयर 2 लाख 46 हजार 250 रुपए है. इसमें सरकार खर्च का तकरीबन 50 फीसदी सब्सिडी देगी.

किसानों के प्रयोग ने दिलाया भरोसा

सरकार कुछ किसानों की खेती से मिलने वाले सुखद परिणाम से उत्साहित है. वैशाली पातेपुर के खेसराही गांव के युवा किसान संजय सिंह ने 2014 में ग्राफ्ट वाले 800 सेब के पौधे लगाए. समय पर देखभाल, कटिंग और प्रोनिंग करते रहे और अब एक-एक पौधे में 20 से 40 किलो तक फल ले रहे हैं. उनके बागान में दिसंबर व जनवरी के महीनों में पौधों में फूल लगते हैं और मई और जून में फल तैयार होते हैं. भागलपुर के नौगछिया के किसान गोपाल प्रसाद सिंह ने भी 5 एकड़ में सेब के पौधे लगाए हैं. पिछले साल से उन्हें भी फल मिलने लगे हैं.

कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर एस के सिंह बताते हैं है कि यहां के मौसम के अनुसार बिहार में लगाई जाने वाली किस्मों में बेहतर फल के लिए 8 घंटे धूप जरूरी है. यहां की जमीन के हिसाब से ही किस्मों को तैयार किया गया है. इनके फल का रंग बेहतर होता है और बीमारी से बचाव भी. अगर स्वाद की बात करें तो हरे-पीले रंग वाला हरिमन 99 खट्टा मीठा स्वादिष्ट होता है.

बिहार सरकार के बागवानी विभाग के निदेशक नंद किशोर ने बताया कि बिहार की जमीन के हिसाब से ही सेब की किस्में तैयार की गई हैं. बिहार जैसे प्रदेशों के लिए हरिमन 99 सहित, अन्ना, डोरेसट गोल्डेन, माइकल और ट्रिपल स्वीट्स जैसी किस्में बेहतर हैं. ये 40 से 50 डिग्री तापमान में भी फल देती हैं.

पौधे लगाने का यही समय

15 नवंबर से 15 फरवरी पौधे लगाने का उपयुक्त समय है. पौधे लगने के दो वर्ष बाद इसमें फूल आते हैं. दिसंबर और जनवरी में फूल लगते हैं और मई व जून में फल तैयार हो जाते हैं. 5 साल बाद सेब के पेड़ में अधिक फल आते हैं. मई और जून में बाजार में इसकी कीमत 200 रुपए प्रति किलो तक मिलेगी.

हाजीपुर में होगी ट्रेनिंग

बागवानी विभाग के डायरेक्टर नंदकिशोर के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश से 8000 पौधे मंगाए गए हैं. सेब की खेती के लिए जो किसान आवेदन करते हैं, उनमें से चयनित किसानों को वैशाली के देसरी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में प्रशिक्षण दिया जाएगा. किसानों को हिमाचल प्रदेश से हरिमन 99 वेराइटी का पौधा दिलाया जाएगा. प्रशिक्षण सहित एक पौधे की लागत लगभग 200 रुपए होंगे. हिमाचल प्रदेश से ही किसानों को प्रशिक्षण देने के लिए विशेषज्ञ भी आएंगे, ताकि किसानों को पूरी जानकारी देने में आसानी होगी और उसपर संस्थान के वैज्ञानिकों की नजर भी रहेगी.

15 जनवरी तक ही आवेदन करें

15 जनवरी तक ऑनलाइन आवेदन बिहार सरकार के बागवानी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट (horticulture.bihar.gov.in) पर किया जा सकता है. इससे संबंधित विशेष जानकारी जिला के सहायक निदेशक उद्यान से ली जा सकती है. संबंधित सभी सात जिले के सहायक निदेशन उद्यान के पास अपेक्षित जानकारी दी गई है. इसमें सेलेक्टेड किसान को ही खेती करने के लिए पौधे दिए जाएंगे और सरकार सब्सिडी भी देगी.

Check Also

Whatsapp हुआ ज्यादा सुरक्षित, अब इस 6 अंकों के पिन के बिना कोई भी लॉग इन नहीं कर पाएगा

Whatsapp नया फीचर: WhatsApp अकाउंट को और भी सिक्योर बनाने के लिए अब इसमें एक …