IAS Success Story: कभी सफलता को तरसते थे अक्षत, फिर यूं तय किया आईआईटी से यूपीएससी तक का सफर

पढ़ी-लिखी एजुकेटेड फैमिली का होना, मां-पिता का अच्छे पदों पर होना किसी आशीर्वाद से कम नहीं. कम ही लोग होते हैं, जिन्हें ऐसी ब्लेस्ड जिंदगी नसीब होती है. पर जैसे सिक्के के दो पहलू होते हैं, वैसे ही इन स्थितियों का दूसरा पहलू यह होता है कि जब आपके घर में पहले से सफल लोग हों तो आपके ऊपर अच्छा ही नहीं श्रेष्ठ करने का दबाव पड़ने लगता है. आपके आसपास इतने सफल और इतने अच्छे पदों पर आसीन लोग होते हैं कि नेचुरली बचपन से ही आपके घरवालों से लेकर बाहरवाले तक यह मानने लगते हैं कि आपका अच्छा करना तो स्वाभाविक है. एक आईपीएस ऑफिसर पिता डी.सी जैन और आईआरएस ऑफिसर मां सिम्मी जैन के बड़े बेटे अक्षत जैन की जिंदगी का कुछ यही हाल था. जानते हैं अक्षत की सफलता की कहानी.

 

बचपन में नहीं थे पढ़ाई में अच्छे –

 

बचपन से ही कम अंक आना या सफल न होना जैसी बातें अक्षत के लिए बुरे सपने जैसी थीं. बावजूद इसके वे पढ़ाई में एक एवरेज स्टूडेंट थे. लेकिन छोटी सी उम्र से ही सफल न हो पाये तो क्या होगा जैसे विचारों का प्रेशर वे फील करने लगे थे. स्कूल लाइफ लगभग ऐसी ही कटी जब पहली बार अक्षत के हाईस्कूल में काफी अच्छे अंक आये. यहां से उन्हें अपना खोया कांफिडेंस कुछ हद तक वापस मिला और उन्हें लगा कि वे भी कुछ बड़ा हासिल करने का माद्दा रखते हैं. इसके बाद के अक्षत की जिंदगी के दो सालों को वे अपनी जिंदगी का सबसे खराब टाइम मानते हैं. उन्होंने जैसा कि हमेशा से इंजीनियर बनने का सोचा था इसलिए ग्यारहवीं में जेईई के लिए कोचिंग ज्वॉइन कर ली. इन दो सालों में अक्षत ने खूब मेहनत की पर कभी उनका परफॉर्मेंस नहीं सुधरा. वे खुद नहीं समझ पा रहे थे कि कहां गलती हो रही है पर वे बार-बार असफल हो रहे थे. ये वो समय था जब वे पूरी तरह टूट चुके थे. उनके आसपास वालों को भी लगने लगा था कि अक्षत जेईई क्रैक नहीं कर सकते.

 

जब एक टीचर ने कहा कि जेईई में 20 हजार रैंक भी आ जाए तो बड़ी बात –

 

अक्षत लगातार सफलता को तरस रहे थे, इधर उनके मां-बाप का हौंसला भी खो रहा था. वे भी निराश रहने लगे थे. इसी समय एक दिन आया जब अक्षत का प्रदर्शन देखकर उनके एक टीचर ने उनके पापा के सामने कहा कि जैसे तुम पढ़ रहे हो, जेईई में तुम्हारी रैंक 20 हजार भी आ जाए तो बड़ी बात. अक्षत के पिताजी और अक्षत खुद यह बात सुनकर बहुत दुखी हुए. यही वो दौर था जब अक्षत के पापा कोचिंग के टीचर्स से मिलकर रिक्वेस्ट कर रहे थे कि उनके बच्चे को देख लें, वह कोप-अप नहीं कर पा रहा. अक्षत इन बातों से मुख्यता अपने माता-पिता को परेशान देखकर बहुत परेशान थे. तभी अचानक उन्होंने एक दिन खुद को इस मेंटल प्रेशर से निकाल फेंका और खुद से प्रॉमिस किया कि भविष्य में जो होगा देखा जाएगा फिलहाल मुझे आने वाली परीक्षा पर फोकस करना है. रिजल्ट का डर मन से मिटाकर अक्षत ने एक नयी शुरुआत करी और उसका परिणाम भी जल्द ही सामने आने लगा. अक्षत ने 94 परसेंट मार्क्स के साथ जयपुर के इंडिया इंटरनेशनल स्कूल से बारहवीं पास की. इसके बाद अक्षत ने अपनी असफलताओं पर फोकस न करके जेईई भी दिया. अपनी उम्मीद से कुछ कम लेकिन अक्षत ने चार हजार के करीब रैंक के साथ जेईई निकाल लिया. अक्षत को मिला आईआईटी गुवाहटी.

 

फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा – 

 

आईआईटी में सेलेक्ट होने के बाद अक्षत ने जीवन के प्रति अपना नजरिया काफी हद तक बदल लिया था. इस नये अक्षत ने पूरे जोश के साथ ग्रेजुएशन के चौथे साल से सिविल सर्विसेस की तैयारी शुरू कर दी. अक्षत बचपन से अपने माता-पिता से प्रभावित थे और एक मैच्योरिटी लेवल आने पर उन्होंने तय किया कि वे भी इसी क्षेत्र में जाएंगे. अक्षत ने साल 2017 में अपना पहला अटेम्ट दिया, जोकि एक औपचारिकता मात्र थी क्योंकि अक्षत ने केवल तीन महीने ही तैयारी की थी. इसमें वे दो अंक से रह गए थे पर इसे वे एक अच्छा लर्निंग एक्सपीरियसं मानते हैं. इसके बाद अक्षत ने जान लगा दी और साल 2018 में न केवल यूपीएससी परीक्षा पास की बल्कि ऑल इंडिया रैंक 02 भी पायी. आखिरकार अक्षत को उनकी सालों की मेहनत का फल मिल गया. अक्षत को, चयन होगा, इस बात का यकीन तो था पर नंबर दो रैंक मिलेगी ये उन्होंने कभी नहीं सोचा था.

 

अक्षत दूसरे कैंडिडेट्स को सलाह देते हैं कि बाहर से मोटिवेशन तब काम करता है जब इंसान अंदर से मोटिवेटेड हो. परीक्षा की तैयारी करने के पहले खुद पर किसी प्रकार का डाउट न रखें. जब पढ़ाई करें तो केवल पढ़ाई करें, रिजल्ट क्या आएगा यह समय पर छोड़ दें. अपना बेस्ट परफॉर्मेंस देने की कोशिश करें और प्रयासों में कमी न करें. किसी भी परीक्षा की तैयारी से पहले स्ट्रेटजी बना लें और उसके अनुरूप ही चलें. अक्षत ने भी नोट्स बनाए जो उनके खूब काम आए.

 

अक्षत की कहानी हमे यह सिखाती है कि दबाव या परेशानियां केवल बाहरी नहीं होती, अंदरूनी भी होती हैं. जब तक हम अपने अंदर की जंग नहीं जीतते, बाहर की जीतना संभव नहीं. इसलिए पहले किसी भी परीक्षा में सफलता के दबाव से बाहर आएं उसके बाद कोशिश करें. खुद पर विश्वास रखें सफलता जरूर मिलेगी.

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