हाईकोर्ट का फैसला: बेटी से रेप से बड़ा जघन्य अपराध कोई नहीं हो सकता- हाईकोर्ट

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चंडीगढ़ : “एक पिता अपनी बेटी का रक्षक होता है। पिता के सानिध्य में बेटी अपने आप को सुरक्षित महसूस करती है। अगर कोई पिता अपनी बेटी के साथ बुरा करे तो इससे बड़ा अपराध कोई नहीं हो सकता।

हाईकोर्ट ने आगे कहा कि नाबालिग बेटी से रेप करना खजाने की रखवाली करने वालों के डाकू बनने या जंगल की रखवाली करने वालों के शिकारी बनने जैसा है. गौरतलब है कि हाईकोर्ट के जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर और जस्टिस नरेश शेखावत की बेंच ने यह आदेश जालंधर निवासी रूपलाल की सजा के खिलाफ दायर अपील को खारिज करते हुए दिया था. रूप को जालंधर की एक अदालत ने जनवरी 2010 में अपनी नाबालिग बेटी से बलात्कार के लिए दोषी ठहराया था। इसके बाद उन्हें 14 साल की सजा सुनाई गई थी।

शिकायत दर्ज होने के दो महीने पहले तक आरोपी बार-बार लड़की के साथ जबरन संबंध बना रहा था। 23 जुलाई 2008 को आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। सजा के खिलाफ अपील में कहा गया था कि 7 साल की नाबालिग बेटी के साथ संभोग असंभव था क्योंकि लड़की के अंग पूरी तरह से विकसित नहीं थे। इस मामले में चिकित्सा विशेषज्ञ ने भी अपनी राय रखी। अपनी रिपोर्ट में कहा गया था कि पीड़ित लड़की छोटी है. बेशक, उसके साथ संबंध स्थापित नहीं किया जा सकता है, लेकिन पीड़ित लड़की के बाहरी अंगों की जांच से कई सबूत मिल सकते हैं। हाईकोर्ट ने इस अपील को खारिज कर दोषी पिता को आईना दिखाया है।

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