सिरसा के रोड़ी में फूटा ग्रामीणों का गुस्सा: राजकीय प्राथमिक पाठशाला में शिक्षक के डेप्यूटेशन के विरोध में स्कूल पर जड़ा ताला
सिरसा: हरियाणा के सिरसा जिले के अंतर्गत आने वाले रोड़ी गांव के राजकीय प्राथमिक पाठशाला में उस समय हालात पूरी तरह से तनावपूर्ण हो गए जब बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित ग्रामीणों का सब्र आखिरकार जवाब दे गया। स्कूल प्रशासन और शिक्षा विभाग द्वारा एक लोकप्रिय और काबिल शिक्षक के डेप्यूटेशन (प्रतिनियुक्ति) अन्यत्र किए जाने से ग्रामीण बुरी तरह भड़क उठे। बिना किसी देरी के सुबह-सुबह बड़ी संख्या में ग्रामीण, अभिभावक और महिलाएं स्कूल के मुख्य गेट पर एकत्र हो गए और शिक्षा विभाग के इस तानाशाही फैसले के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए गुस्साए ग्रामीणों ने तुरंत प्रभाव से स्कूल के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया और साफ शब्दों में चेतावनी दी कि जब तक इस डेप्यूटेशन के आदेश को पूरी तरह से रद्द नहीं किया जाता, तब तक स्कूल का ताला नहीं खोला जाएगा और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की जिम्मेदारी पूरी तरह प्रशासन की होगी।
अध्यापकों की भारी कमी और डेप्यूटेशन से बच्चों के भविष्य पर संकट
ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि रोड़ी गांव के इस राजकीय प्राथमिक पाठशाला में पहले से ही शिक्षकों के कई पद लंबे समय से खाली पड़े हुए हैं, जिसके कारण बच्चों की शिक्षा व्यवस्था पहले ही काफी बदहाल स्थिति में चल रही थी। स्कूल में जितने भी बच्चे अध्ययनरत हैं, उन्हें पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में शिक्षा विभाग द्वारा एक कार्यरत शिक्षक को डेप्यूटेशन पर किसी अन्य स्कूल में भेजे जाने का आदेश देना आग में घी डालने जैसा साबित हुआ। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग के अधिकारी जमीनी हकीकत से पूरी तरह बेखबर हैं और एसी कमरों में बैठकर ऐसे तुगलकी फरमान जारी कर रहे हैं जिससे ग्रामीण इलाकों के गरीब बच्चों का भविष्य अंधकार में डूब रहा है। अभिभावकों का यह साफ कहना है कि जब गांव के सरकारी स्कूलों में पहले से ही शिक्षकों की भारी कमी है, तो यहां से किसी भी शिक्षक को हटाने का कोई औचित्य ही नहीं बनता है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के खिलाफ ग्रामीणों का फूटा रोष
स्कूल पर ताला जड़ने के बाद प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। उनका कहना था कि वे पिछले कई दिनों से प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं और उनसे गुहार लगा रहे हैं कि स्कूल में शिक्षकों की संख्या बढ़ाई जाए ताकि उनके बच्चों की पढ़ाई सुचारू रूप से चल सके, लेकिन उनकी शिकायतों पर किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया। इसके विपरीत, जो शिक्षक पहले से बच्चों को अच्छी तरह पढ़ा रहे थे, उन्हें भी डेप्यूटेशन के नाम पर अन्य स्कूल में शिफ्ट किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने जल्दबाजी में लिए गए इस डेप्यूटेशन ऑर्डर को तुरंत प्रभाव से रद्द नहीं किया, तो उनका यह आंदोलन और अधिक उग्र हो जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की होगी।
प्रशासनिक दखल और भविष्य की चेतावनी के बाद बना तनावपूर्ण माहौल
हंगामे और प्रदर्शन की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन और शिक्षा विभाग के कुछ स्थानीय अधिकारी मौके पर पहुंचे और गुस्साए ग्रामीणों को समझाने-बुझाने का प्रयास शुरू किया। अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों और समस्याओं को उच्च स्तर पर पहुंचाया जाएगा तथा बच्चों की पढ़ाई का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक ग्रामीण अपनी इस जिद पर अड़े हुए थे कि जब तक लिखित रूप में डेप्यूटेशन रद्द करने का आदेश नहीं आ जाता, तब तक स्कूल का ताला नहीं खुलेगा। इस पूरी घटना ने एक बार फिर से ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों की लचर व्यवस्था और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां आज भी बच्चों को बुनियादी शिक्षा के लिए सड़कों पर उतरने और विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।