हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में मंचा हाहाकार! महिला आयोग की चेयरमैन से तीखे टकराव के बाद नर्सों की देशव्यापी हड़ताल
हरियाणा के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ी एक बेहद बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। हरियाणा राज्य महिला आयोग (Haryana State Commission for Women) की चेयरमैन रेणु भाटिया (Renu Bhatia) और प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में तैनात नर्सिंग स्टाफ (Nurses Association) के बीच हुआ विवाद अब एक बेहद उग्र मोड़ ले चुका है। चेयरमैन रेणु भाटिया के साथ हुए तीखे टकराव और कथित रूप से की गई अपमानजनक टिप्पणी के विरोध में हरियाणा की तमाम सरकारी नर्सों ने सामूहिक रूप से काम बंद कर अनिश्चितकालीन हड़ताल (Strike) का एलान कर दिया है। इस बड़ी हड़ताल के कारण सूबे के छोटे-बड़े अस्पतालों में मरीजों की देखभाल और स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से चरमरा गई हैं। वहीं दूसरी तरफ, अपने अड़ियल और कड़े रुख के लिए जानी जाने वाली महिला आयोग की चेयरमैन रेणु भाटिया ने नर्सों के भारी विरोध के बावजूद अपने बयान पर कायम रहते हुए माफी मांगने से पूरी तरह इंकार कर दिया है, जिससे यह गतिरोध और ज्यादा गहरा गया है।
आखिर किस बात पर भड़का नर्सों का गुस्सा और क्यों शुरू हुई हड़ताल
विवाद की शुरुआत एक औचक निरीक्षण और जनसुनवाई के दौरान हुई, जहां महिला आयोग की टीम और अस्पतालों के नर्सिंग स्टाफ के बीच किसी प्रशासनिक मुद्दे को लेकर तीखी बहस हो गई। नर्सिंग एसोसिएशन का आरोप है कि चेयरमैन रेणु भाटिया ने ऑन-ड्यूटी नर्सों के साथ बेहद अभद्र व्यवहार किया और उनके पेशे को लेकर ऐसी टिप्पणियां कीं जिससे पूरे नर्सिंग समाज के आत्मसम्मान को ठेस पहुंची है। इस घटना का वीडियो और जानकारी जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुई, हरियाणा नर्सिंग वेलफेयर एसोसिएशन ने तुरंत आपातकालीन बैठक बुलाई और चेयरमैन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। नर्सों का साफ कहना है कि जब तक रेणु भाटिया अपने शब्दों को वापस लेकर सार्वजनिक तौर पर माफी नहीं मांगतीं, तब तक वे काम पर वापस नहीं लौटेंगी।
चेयरमैन रेणु भाटिया के तीखे तेवर, कहा- 'गलत बात पर झुकने और माफी मांगने का सवाल ही नहीं'
नर्सिंग एसोसिएशन के अल्टीमेटम और हड़ताल के बाद जब मीडिया ने महिला आयोग की चेयरमैन रेणु भाटिया से उनका पक्ष जानना चाहा, तो उन्होंने बेहद कड़े और आक्रामक अंदाज में अपनी बात रखी। रेणु भाटिया ने साफ तौर पर कहा कि वे अपने कर्तव्यों का पालन पूरी ईमानदारी से कर रही हैं और महिलाओं के हक के लिए आवाज उठाना उनका काम है। उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकारी अस्पतालों में लापरवाही और मरीजों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार को वे मूकदर्शक बनकर नहीं देख सकतीं। भाटिया ने दोटूक लहजे में कहा कि उन्होंने कुछ भी गलत या अमर्यादित नहीं कहा है, इसलिए माफी मांगने का तो कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। उनके इस बयान ने जलती आग में घी डालने का काम किया है।
अस्पतालों में ओपीडी और इमरजेंसी सेवाएं ठप, बेहाल हो रहे हैं मरीज
चाहे रोहतक पीजीआई हो, अंबाला का सिविल अस्पताल हो या गुरुग्राम और फरीदाबाद के सरकारी मेडिकल संस्थान, हर जगह इस हड़ताल का बेहद बुरा और सीधा असर देखने को मिल रहा है। अस्पतालों के ओपीडी (OPD) वॉर्डों में ताले लटके नजर आ रहे हैं और ऑपरेशन थियेटर्स में रूटीन सर्जरी को टालना पड़ा है। हालांकि, एसोसिएशन ने कुछ जगहों पर आवश्यक इमरजेंसी सेवाओं में आंशिक छूट देने की बात कही थी, लेकिन ग्राउंड जीरो पर स्टाफ की भारी कमी के कारण गंभीर मरीजों के तीमारदार अपनों को लेकर दर-दर भटकने को मजबूर हैं। डॉक्टरों पर भी काम का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से वेंटिलेटर पर आती दिख रही है।
सरकार और स्वास्थ्य मंत्री के सामने खड़ी हुई बड़ी प्रशासनिक चुनौती
हरियाणा के मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के लिए यह विवाद इस समय गले की हड्डी बन चुका है। एक तरफ राज्य महिला आयोग की संवैधानिक गरिमा और उसकी चेयरमैन का रसूख है, तो दूसरी तरफ कोरोना काल से लेकर हर मुश्किल वक्त में अग्रिम मोर्चे पर डटने वाली नर्सों की सामूहिक शक्ति है। स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी लगातार नर्सिंग एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ बैठकें कर रहे हैं ताकि कोई बीच का रास्ता निकाला जा सके और अस्पतालों में काम दोबारा शुरू हो। लेकिन दोनों पक्षों की तरफ से दिखाई जा रही जिद के कारण फिलहाल समाधान की कोई गुंजाइश नजर नहीं आ रही है। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि सरकार इस संकट से उबरने के लिए क्या सख्त कदम उठाती है।