तमिलनाडु के हस्तशिल्पियों ने शिल्प संग्रहालय का किया अवलोकन

वाराणसी, 23 नवम्बर (हि.स.)। ‘काशी-तमिल संगमम’ में तमिलनाडु से आये हस्त शिल्पियों ने बुधवार को बड़ालालपुर स्थित पं. दीनदयाल उपाध्याय हस्तकला संकुल में शिल्प संग्रहालय का अवलोकन किया। हस्तशिल्पियों ने हस्तकला संकुल परिसर में प्रदर्शित हथकरघा एवं हस्तशिल्प उत्पादों, लूमों के सजीव प्रदर्शन को भी देखा। इसके बाद संकुल के सभागार में आयोजित “काशी तमिलनाडु शिल्पी संबंध प्रौधिगिकी एकीकरण” विषयक सेमिनार में शामिल हुए। दो चरणों में सेमिनार में आये हस्तशिल्पियों को हथकरघा एवं हस्तशिल्प के विशेषज्ञों ने उत्पादों को बेहतर बनाने के लिए जानकारी दी।

बतौर मुख्य अतिथि प्रबन्ध निदेशक अद्वैत टेक्सटाइल प्राइवेट लिमिटेड और अध्यक्ष, दक्षिण भारतीय मिल्स संगठन रवि सैम ने दीप चलाकर सेमिनार का उद्घाटन किया। संयुक्त निदेशक, हथकरघा तन्जापुर एस. सेल्यम, जी.आई. विशेषज्ञ पद्मश्री रजनीकांत, पद्मश्री श्रीमाष चन्द्र सुपकार ने भी हथकरघा बुनकरों एवं हस्तशिल्पियों को सम्बोधित किया। इसके पहले तमिलनाडु से आये हस्तशिल्पियों को पुष्पवर्षा के बीच पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया गया। सेमिनार के द्वितीय चरण की अध्यक्षता टी राजकुमार, निदेशक, शक्ति ग्रुप तथा अध्यक्ष, भारतीय वस्त्र उद्योग महासंघ ने की। मुख्य वक्ता वेंकटेश राजा, तंजाउर पेंटिंग आर्टिस्ट तथा एस. भूपति, तंजाउर डाल उत्पादक ने भी आवश्यक जानकारी दी। सेमिनार का संचालन सी. मुथ्थूसामी क्षेत्रीय निदेशक (द.क्षे.) ने किया। सेमिनार में भारत सरकार/राज्य सरकार के अधिकारी उमेश कुमार सिंह, संयुक्त आयुक्त उद्योग, डॉ पी. थेन्नेरेस, निदेशक, भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान, संदीप पु. दुबरीकर उप निदेशक एवं कार्यालय प्रमख बुनकर सेवा केन्द्र अब्दुल्ला सहायक निदेशक (हस्तशिल्प), हस्तशिल्प सेवा केन्द्र, गोपेश कुमार मौर्य, सहायक निदेशक (हस्तशिल्प), दीनदयाल हस्तकला संकुल एवं अरूण कुमार कुरील आदि भी उपस्थित रहे।

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