Ghatasthapana Muhurat 2020: आज है मां दुर्गा का आगमन, जानें घटस्थापना मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र एवं महत्व

Ghatasthapana Muhurat 2020आज से शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ हो गया है। मां दुर्गा घोड़े पर सवार होकर भक्तों के घरों में आगमन करेंगी। उसके लिए भक्त भी सभी तैयारियां कर चुके हैं। शुभ मुहूर्त में घटस्थापना की जाएगी। इसके लिए सुबह से ही शुभ मुहूर्त बना हुआ है। घटस्थापना के साथ ही दुर्गा पूजा का पावन पर्व नवरात्रि का विधिवत प्रारंभ हो जाएगा। हिंदी पंचांग के अनुसार शारदीय नवरात्रि हर वर्ष आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को प्रारंभ होती है। आज नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरुप मां शैलपुत्री की विधि विधान से पूजा की जाती है। आइए जानते हैं ​कि घटस्थापना मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र एवं महत्व के बारे में

घटस्थापना मुहूर्त या कलश स्थापना मुहूर्त

आज सुबह से ही घटस्थापना मुहूर्त का मुहूर्त मिल गया है। सुबह 03 घण्टे 49 मिनट का मुहूर्त है। आप सुबह 06:23 बजे से 10:12 बजे तक कलश स्थापना कर सकते हैं। इसके अलावा दिन में 46 मिनट का अभिजीत मुहूर्त है। आप दिन में 11:43 बजे से 12:29 बजे के मध्य भी घटस्थापना कर सकते हैं।

 

विधि विधान से घटस्थापना के बाद आपको नवरात्रि व्रत एवं पूजा का संकल्प लेना चाहिए। मां दुर्गा का आगमन कराने के बाद आप मां शैलपुत्री की पूजा करें।

कौन हैं मां शैलपुत्री

मां दुर्गा की प्रथम स्वरुप देवी शैत्रपुत्री माता पार्वती को ही कहते हैं। वे पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं। हिमराज और मैना देवी ने कठोर तप किया था, जिससे प्रसन्न हो मां दुर्गा कन्या स्वरूप में उनके घर पर प्रकट हुई थीं।

 

शैलपुत्री पूजा का महत्व

मां शैलपुत्री की पूजा करने से शांति और उत्साह के साथ ही धन, विद्या, यश और कीर्ति तो मिलती ​ही है। व्यक्ति को मोक्ष भी मिलता है।

शैलपुत्री बीज मंत्र

ह्रीं शिवायै नम:।

मां शैलपुत्री स्तुति मंत्र

या देवी सर्वभू‍तेषु मां शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

 

मां शैलपुत्री प्रार्थना

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।

वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

नवरात्रि की पूजा विधि

नवरात्रि व्रत एवं पूजा का संकल्प लेने के बाद माता रानी को अक्षत्, धूप, गंध, सिंदूर, पुष्प, आदि अर्पित करें। फिर दिए गए मंत्रों का उच्चारण करें। पूजा के समय दुर्गा चालीसा तथा दुर्गा सप्तशती का पाठ भी कर सकते हैं। उसके बाद मां दुर्गा की आरती करें। इस दौरान शंख और घंटी बजाना शुभ होता है।

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