जर्दालू तो ड्राई फ्रूट का नाम है, फिर इसे भागलपुरी जर्दालू आम क्यों कहते हैं, दिलचस्प है वजह

गूगल पर हिंदी में जर्दालू टाइप करें तो आपको ड्राई फ्रूट खुबानी की असंख्या जानकारी और तस्वीरें मिलेंगी. अंग्रेजी में इसे एप्रीकोट Apricot भी कहते हैं. हालांकि वही गूगल जर्दालू को आम के साथ भी दर्शाता है जिसका रंग चटख पीला होता है. यह आम बिहार में मशहूर है और इसका पूरा नाम है भागलपुरी जर्दालू.

बिहार के भागलपुर जिले में जर्दालू बहुतायत में पाया जाता है. इसका व्यावसायिक उत्पादन होता है जो देश-विदेश में सप्लाई कर कमाई का जरिया बनता है. भागलपुर अगर अपने सिल्क के लिए मशहूर है तो वह जर्दालू के लिए भी उतना ही ख्याति प्राप्त है. देखने में हरे और पीले रंग के कॉम्बिनेशन का यह आम निचले हिस्से में थोड़ा नुकिला होता है. आम का नाम जर्दालू इसलिए पड़ा क्योंकि इसका आकार सूखे मेवे खुबानी की तरह होता है. खुबानी को जर्दालू भी कहते हैं. हालांकि जर्दालू आम हूबहू खुबानी की तरह नहीं होता लेकिन दोनों का आकार मेल खाता है. जिस तरह खुबानी टेस्ट और पोषकता में अव्वल है, उसी तरह का स्थान जर्दालू भी रखता है.

क्या है खुबानी या जर्दालू

दोनों में एक संयोग ये भी है कि आम में भी गुठली और खुबानी या जर्दालू में भी गुठली पाई जाती है. खुबानी अपनी पौष्टिकता और औषधीय गुणों के चलते आयुर्वेद में महत्वपूर्ण स्थान रखता है. खुबानी का छिलका थोड़ा खुरदुरा और और थोड़ा मुलायम होता है. यह मीठा और क्वालिटी के लिहाज से थोड़ा गर्म माना जाता है. दरअसल, खुबानी का नाम जर्दालू उसके कश्मीरी पहचान के कारण मिला. खुबानी को कश्मीर में गरडालू या जर्दालू के नाम से जाना जाता है. जैसे संस्कृत में उरुमाण और हिंदी में जरदालू, खुबानी या चिलू कहते हैं. पंजाबी में इसे हरी, सरी या चुली तो अंग्रेजी में कॉमन एप्रीकोट और अरबी में बिनकफक और किशनिश कहते हैं.

जर्दालू की खासियत

जर्दालू आम की खुशबू और टेस्ट अपने आप में खास है. भागलपुर का जर्दालू आम देश-विदेश में अपनी पहचान बना चुका है. कुछ यही कारण है कि कुछ साल पहले जर्दालू आम को जीआई टैगिंग दी गई और उसे एक तरह से संरक्षित करने का अवसर दिया गया. साल 2018 में ज्योग्राफिकल इंडिकेशन जर्नल की ओर से जर्दालू आम को बौद्धिक संपदा अधिकार के तहत जीआई टैग दिया गया. इससे आम को देश-दुनिया में एक खास पहचान मिलने में मदद मिलेगी.

 

दिल्ली तक आती है खुशबू

जर्दालू की खासियत की बात करें तो यह आम भागलपुर की शान है और यह 104-106 दिनों में पककर तैयार हो जाता है. एक आम का वजन 180-300 ग्राम तक हो सकता है. यह आम कम रेशे वाला है और पल्प काफी रसीला होता है. शुगर की मात्रा 16 परसेंट के आसपास होती है. इस मात्रा को ज्यादा नहीं मान सकते, इसलिए शुगर के मरीज भी इसका सेवन कर सकते हैं. इस आम की अहमियत इससे समझ सकते हैं कि 2006 से भेंट स्वरूप इसकी पेटी देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, रक्षा मंत्री, कृषि मंत्री, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सहित दिल्ली के मुख्यमंत्री को भेजा जाता है. ये गणमान्य लोग इस आम का स्वाद चखते आ रहे हैं.

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