Gaganyaan mission: गगनयान के लिए क्रायोजेनिक इंजन का परीक्षण सफल, इसरो ने कहा- अभी होंगे 4 और टेस्ट

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organisation) ने तमिलनाडु के महेंद्रगिरी में इसरो प्रणोदन परिसर (प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स) में गगनयान कार्यक्रम (Gaganyaan mission) के वास्ते 720 सेकंड की अवधि के लिए क्रायोजेनिक इंजन (Cryogenic Engine) का गुणवत्ता परीक्षण किया जो सफल रहा.

बेंगलुरु स्थित एजेंसी ने कहा कि बुधवार को हुआ इंजन का प्रदर्शन परीक्षण के उद्देश्यों के अनुरूप रहा. इसरो की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, ‘लंबी अवधि का यह सफल परीक्षण मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम- गगनयान के लिए एक बड़ी उपलब्धि है. यह गगनयान के लिए क्रायोजेनिक इंजन की विश्वसनीयता और मजबूती सुनिश्चित करता है.’

भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान 2023 में लॉन्च किया जाएगा. इस प्रक्षेपण के साथ, भारत संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और चीन के बाद मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन शुरू करने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा.

चार और परीक्षणों से गुजरेगा इंजन

बयान के अनुसार, यह इंजन चार और परीक्षणों से गुजरेगा जो 1810 सेकंड के होंगे. इसरो ने बताया कि इसके बाद एक और इंजन के दो छोटी अवधि के परीक्षण होंगे और गगनयान कार्यक्रम के लिए क्रायोजेनिक इंजन गुणवत्ता पर खरा उतरने के लिए एक लंबी अवधि का परीक्षण होगा. इसरो के अध्यक्ष के सिवन ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि भारत की महत्वाकांक्षी गगनयान परियोजना का, डिजाइन वाला चरण पूरा हो गया है तथा यह परीक्षण के चरण में प्रवेश कर गया है.

 

के सिवन ने कहा था, ‘भारत की आजादी (15 अगस्त 2022) की 75वीं वर्षगांठ से पहले पहला मानवरहित मिशन भेजने का निर्देश है और सभी पक्षकार इसके लिए सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रहे हैं. मुझे विश्वास है कि हम इस लक्ष्य का पूरा कर लेंगे.’

सिवन की जगह सोमनाथ होंगे इसरो के प्रमुख

इस बीच केंद्र सरकार ने कल बुधवार को वरिष्ठ रॉकेट वैज्ञानिक एस सोमनाथ (S Somanath) को भारतीय अंतरिक्ष और अनुसंधान संगठन (ISRO) का अगला प्रमुख नियुक्त कर दिया है. सोमनाथ अभी विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के निदेशक हैं. कार्मिक मंत्रालय की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि सोमनाथ की नियुक्ति तीन साल के लिए की गई है. सोमनाथ अब के. सिवन की जगह लेंगे. सिवन का कार्यकाल कल शुक्रवार 14 जनवरी को समाप्त होने जा रहा है.

सोमनाथ करियर के शुरुआती चरणों के दौरान पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) के एकीकरण के लिए टीम लीडर थे. उन्हें तीन साल के कार्यकाल के लिए अंतरिक्ष विभाग के सचिव और अंतरिक्ष आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया.

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