30 दिन के अंदर सामने नहीं आए तो जब्त होगी भगोड़े मेहुल चोकसी की संपत्ति, कोर्ट ने लिया सख्त एक्शन

भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी के खिलाफ उद्घोषणा: मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा दायर एक याचिका पर यहां मजिस्ट्रेट कोर्ट ने भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी के खिलाफ उद्घोषणा जारी की है। चोकसी 13,000 करोड़ रुपये के पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) घोटाला मामले में नीरव मोदी के साथ सह-आरोपी है। पीएनबी घोटाले में नाम सामने आने के बाद ईओडब्ल्यू ने चोकसी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था।

अब कौन सा मामला आया सामने? 

मुंबई स्थित कंपनी, लक्ष्मी इंफ्रा डेवलपर्स लिमिटेड ने 2019 में मुनबाई पुलिस स्टेशन में मेहुल चोकसी के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज की थी। आरोप था कि मेहुल चोकसी ने देश से भागने से 15 दिन पहले अपना रियल एस्टेट प्रोजेक्ट शिकायतकर्ता कंपनी को बेच दिया था. पीएनबी घोटाले की जांच कर रही एजेंसी ने चोकसी के रियल एस्टेट प्रोजेक्ट को गलत तरीके से कमाई गई संपत्ति माना और जब्त कर लिया.

न्यायालय उद्घोषणा की प्रक्रिया क्या है? 

ईओडब्ल्यू ने अक्टूबर 2021 में एस्प्लेनेड मजिस्ट्रेट कोर्ट के समक्ष घोषणा के लिए यह याचिका दायर की। बाद में कोर्ट ने मेहुल चोकसी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया. हालांकि वारंट जारी होने के बावजूद वह कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए तो समन जारी करने की प्रक्रिया शुरू की गयी. उद्घोषणा एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें अदालत किसी व्यक्ति को आगे आकर अपनी बात रखने के लिए लगभग 30 दिन का समय देती है। यदि कोई व्यक्ति अपना मामला पेश करने के लिए अदालत में उपस्थित नहीं होता है, तो उसे अपराधी घोषित कर दिया जाता है और संपत्ति जब्त कर ली जाती है।