कागज पर पचास बेड का कोविड अस्पताल, सुविधा नदारद

मीरजापुर : ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना से बढ़ रहे पीड़ित मरीजों की सुविधा के लिए शासन के आदेश पर आनन-फानन में मड़िहान स्थित सीएचसी को अभिलेखों में पचास बेड का अस्पताल बना दिया गया। लेकिन सुविधा के नाम पर सब कुछ नदारद है। गम्भीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए चिकित्सक को मंडलीय अस्पताल के लिए रेफर करना पड़ रहा है।
मड़िहान तहसील क्षेत्र के रामपुर तैतिस गांव निवासिनी कोरोना पाजिटिव रजवंती तथा जग्गनपुर निवासी राजनरायन का इलाज कराने परिजन गुरूवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मड़िहान पहुंचे। आक्सीजन सिलेंडर के अभाव में दोनों मरीजों को उपचार के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया। जब कि इसके पूर्व खंतरा गांव निवासिनी सुरसत्ती व पारसनाथ का इलाज मड़िहान में हुआ और ठीक होने पर दोनों को अस्पताल से छुट्टी दी गयी।
तीस बेड वाले मड़िहान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चार बेड वाल रोगियों के लिए और बाकी पर महिला पुरुष भर्ती किए जाते हैं। बेहतर सुविधा व चिकित्सक के अभाव में बेड खाली पड़े रहते हैं। यहां डिलेवरी वाले मरीज अधिकतर आते हैं लेकिन तीस बेड कोविड मरीजों को दे दिया गया तो यहां डिलेवरी कैसे होगी।
सीएचसी मड़िहान अधीक्षक डॉ. कौशल कुमार मौर्य ने बताया कि पांच आक्सीजन कंसन्ट्रेटर मिला है, पर ऑक्सीजन सिलेंडर एक भी नहीं आया है। ऐसी स्थिति में गम्भीर मरीजों को रोकना खतरे से खाली नहीं होगा।

 

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