एफसीआई का दावा है कि अनाज के भंडार में पांच साल के निचले स्तर के बावजूद कोई खाद्य सुरक्षा जोखिम नहीं

नई दिल्ली: इस महीने की शुरुआत में भारतीय खाद्य निगम (FCI) और राज्य एजेंसियों के पास गेहूं और चावल का स्टॉक पांच साल के निचले स्तर 376 लाख टन पर आ गया है. जो पिछले साल 721 लाख टन था। 

1 नवंबर को एफपीआई का गेहूं स्टॉक 210 लाख टन था, जो अगले साल की शुरुआत के लिए 138 लाख टन के बफर स्टॉक की आवश्यकता के मुकाबले छह साल का निचला स्तर है। हालांकि, चावल का मौजूदा स्टॉक 166 लाख टन है, जो जनवरी 2023 के लिए 76 लाख टन के बफर स्टॉक की आवश्यकता का दोगुना है।

खाद्य मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि स्टॉक में कमी के बावजूद अगले दो महीनों में कुल स्टॉक की स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है। क्योंकि अभी मिलर्स से 176 लाख टन मिलना बाकी है।

एक अधिकारी ने कहा, हमारे पास राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना जैसी विभिन्न योजनाओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त स्टॉक है। 

उधर, रविवार को खरीफ धान की खरीद 242 लाख टन हुई। जो एक साल पहले के स्तर से थोड़ा ज्यादा है। इस समय पंजाब, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, हरियाणा और तमिलनाडु में धान की खरीद हो रही है।

खाद्य मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, एक अक्टूबर से खरीद शुरू होने के बाद 13.5 लाख किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के रूप में 47,700 करोड़ रुपये मिले हैं।

प्रमुख उत्पादक राज्यों ने खरीफ सीजन में 770 लाख टन धान की खरीद का लक्ष्य रखा है। रवी धान को शामिल करने के साथ, सरकारी एजेंसियों को 2022-23 सीज़न (अक्टूबर से सितंबर) के दौरान 900 लाख टन धान ख़रीदने की उम्मीद है। धान से चावल का रूपांतरण अनुपात 67 प्रतिशत है।

एफसीआई और राज्य एजेंसियों द्वारा किसानों से धान की खरीद के बाद इसे चावल में बदलने के लिए मिलरों को सौंप दिया जाता है। पिछले वर्षों में चावल की खरीद रिकॉर्ड 602 लाख टन हुई थी। फसल वर्ष 2021-22 में चावल का रिकॉर्ड 1302.90 लाख टन रहा। 

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