इस राज्य के किसान अब करेंगे ऑर्गेनिक कॉफी की खेती, सरकार ने बनाया रोड मैप, आप भी उठाएं फायदा

ओडिशा के किसानों के लिए एक अच्छी खबर है। ओडिशा सरकार अगले पांच वर्षों में हजारों हेक्टेयर जैविक कॉफी उगाने की योजना बना रही है। इसकी पुष्टि खुद राज्य के कृषि उत्पादन आयुक्त प्रदीप कुमार जेना ने की है। उन्होंने कहा है कि ओडिशा सरकार अगले पांच साल में 10,000 हेक्टेयर में जैविक कॉफी उगाने की योजना बना रही है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में बड़े पैमाने पर कॉफी के बागान हैं। कॉफी के बागानों में भी हमने अच्छा काम किया है। ऐसे में हमें उम्मीद है कि जैविक कॉफी की खेती से किसानों की आय बढ़ेगी। 

उन्होंने कहा कि कोरापुट में हमें उच्च गुणवत्ता वाली अरेबिका कॉफी मिलती है। जेना ने कहा कि हमने अगले कुछ सालों में 10 हजार हेक्टेयर में कॉफी के बागान लगाने की कोशिश की है। सरकार ओडिशा को देश में जैविक कॉफी उत्पादक राज्य के रूप में मान्यता देने की कोशिश कर रही है। वहीं, कॉफी बोर्ड के अनुसार, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और उत्तर-पूर्व के गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में कुल कॉफी फसल क्षेत्र का लगभग 21% हिस्सा है। पारंपरिक क्षेत्रों में 3.68 लाख हेक्टेयर की तुलना में 2021-22 में गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में 99,380 हेक्टेयर में कॉफी लगाई गई थी।

डिजाइन के जरिए इन जगहों को ऑर्गेनिक बनाएं

आंध्र प्रदेश में 94,956 हेक्टेयर कॉफी भूमि है, जबकि ओडिशा में 4,424 हेक्टेयर और उत्तर-पूर्व में 4,695 हेक्टेयर है। ओडिशा में केवल अरेबिका कॉफी उगाई जाती है, जबकि आंध्र और उत्तर-पूर्व में रोबस्टा कॉफी की बड़े पैमाने पर खेती की जाती है। इसके साथ ही ओडिशा के आदिवासी समुदाय भी कॉफी की खेती करते हैं। अधिकांश आदिवासी क्षेत्र मूल रूप से जैविक खेती का पालन करते हैं। रासायनिक खाद का प्रयोग नहीं किया जाता है। हालांकि, हम कॉफी के विपणन लाभों का लाभ उठाने के लिए डिजाइन द्वारा इन स्थानों को जैविक बनाना चाहते थे, जेन्ना ने समझाया।

अब हम कृषि मशीनीकरण और स्वचालन पर जोर दे रहे हैं

उन्होंने कहा कि ओडिशा सरकार बड़े पैमाने पर कृषि को स्वचालित और यंत्रीकृत कर उत्पादन बढ़ाने की कोशिश कर रही है। दरअसल, 20 साल पहले हमारी प्रति व्यक्ति बिजली की खपत राष्ट्रीय औसत का बमुश्किल एक चौथाई थी। प्रदीप कुमार जेना ने कहा कि ओडिशा प्रति व्यक्ति 2.4 kWh बिजली की खपत करता है, जो राष्ट्रीय औसत 2.7 kWh से कम है। राज्य कृषि उत्पादन आयुक्त ने टिप्पणी की कि अब हम कृषि यंत्रीकरण और स्वचालन पर जोर दे रहे हैं।

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