पुरानी गाड़ियों की विदाई और सुरक्षाकर्मियों की बल्ले-बल्ले, नए साल से पहले राजस्थान कैबिनेट के 5 बड़े फैसले
News India Live, Digital Desk : आज 31 दिसंबर 2025 है और कल से हम 2026 में कदम रखने वाले हैं। इस खास मौके पर राजस्थान की भजनलाल सरकार ने प्रदेशवासियों के लिए 'गुड न्यूज़' का पिटारा खोल दिया है। मुख्यमंत्री आवास पर हुई कैबिनेट की अहम बैठक में उन मुद्दों पर मुहर लगी है, जिनका लोग लंबे समय से इंतज़ार कर रहे थे।
1. पुरानी गाड़ियों की 'कचरा' नहीं, मिलेगी सही कीमत
सरकार ने राजस्थान के लिए नई Vehicle Scrapping Policy (वाहन कबाड़ नीति) को हरी झंडी दे दी है। अब अगर आप अपनी पुरानी खटारा गाड़ी (15 साल से ज्यादा पुरानी) को स्क्रैप कराते हैं, तो सरकार आपको नई गाड़ी खरीदने पर टैक्स और रजिस्ट्रेशन में अच्छी-खासी रियायत देगी। यह न केवल प्रदूषण कम करेगा, बल्कि मध्यम वर्ग के उन परिवारों के लिए राहत बनेगा जो पुरानी गाड़ी के खर्च से परेशान हैं और नया वाहन खरीदना चाहते हैं।
2. रिफाइनरी: 2026 में खुलेगा किस्मत का ताला
बाड़मेर के पंचपदरा में बन रही HPCL राजस्थान रिफाइनरी को लेकर बड़ा अपडेट आया है। कैबिनेट ने साफ़ कर दिया है कि साल 2026 के मध्य तक इसका विधिवत उद्घाटन कर व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा। यह प्रोजेक्ट सिर्फ़ एक रिफाइनरी नहीं, बल्कि राजस्थान के लिए 'सोने की खदान' साबित होने वाला है। इससे हज़ारों युवाओं को रोज़गार मिलेगा और आसपास के इलाकों में औद्योगिक क्रांति आएगी।
3. जांबाज जवानों की 'स्पेशल' ख़ुशी
प्रदेश की सुरक्षा करने वाले ATS (Anti-Terrorist Squad) और SOG (Special Operations Group) के जवानों के लिए सरकार ने खज़ाना खोल दिया है। जोखिम भरे कामों में लगे इन जवानों के लिए 'स्पेशल एलाउंस' (विशेष भत्ते) में बढ़ोतरी का फैसला हुआ है। अब उनकी सैलरी का एक हिस्सा विशेष भत्ते के रूप में बढ़कर मिलेगा। सरकार का मानना है कि जो लोग अपनी जान हथेली पर रखकर आतंकियों और पेपर-लीक माफियाओं से लड़ते हैं, उनका ख्याल रखना शासन का धर्म है।
4. सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही
कैबिनेट मीटिंग में यह भी तय हुआ कि आने वाले साल यानी 2026 में सरकारी कामकाज को पूरी तरह 'डिजिटल और पेपरलेस' किया जाएगा। भर्ती प्रक्रियाओं में होने वाली गड़बड़ी को रोकने के लिए कुछ कड़े प्रशासनिक फेरबदल की भी मंजूरी दी गई है। मुख्यमंत्री का ज़ोर 'सुशासन' पर है ताकि योजनाएं अटके नहीं, बल्कि सीधे आम जनता तक पहुँचें।