संगीत के एक युग का अंत, दुनिया को अलविदा कह गईं प्रो. कमला श्रीवास्तव

लखनऊ, 05 फरवरी (हि.स.)। राजधानी से संगीत के एक युग का अंत हो गया। शास्त्रीय एवं लोक संगीत की साधिका प्रो. कमला श्रीवास्तव अब नहीं रहीं। रविवार रात 92 वर्ष की उम्र में उन्होंने आखिरी सांस ली। वे अपने पीछे पुत्र रवीश, पुत्रवधू डा. रुपाली और पौत्री रवीशा को छोड़ गई हैं। उनके निधन पर साहित्य एवं संगीत जगत में शोक की लहर है। वे पिछले कुछ दिनों से बीमार थीं। उनके निधन की सूचना पर सोमवार की सुबह से ही उनके आवास पर लोग जुटने लगे।

अपने जीते-जी प्रो. कमला श्रीवास्तव दीदी ने देहदान की इच्छा व्यक्त की थी। मध्याह्न में उनका पार्थिव शरीर किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय लखनऊ को सौंप दिया गया। इसके पूर्व साहित्यकार पद्मश्री डा. विद्या विन्दु सिंह, वरिष्ठ लोक गायिका पद्मा गिडवानी, विमल पन्त, लोक संस्कृति शोध संस्थान की सचिव सुधा द्विवेदी, डा. पूनम श्रीवास्तव, नीरा मिश्रा, रेखा अग्रवाल, नीलम वर्मा, इन्दु सारस्वत, अर्चना गुप्ता, मधु श्रीवास्तव, कनक वर्मा, ज्योति किरन रतन सहित संगीत, कला और साहित्य से जुड़े लोगों ने उनके अंतिम दर्शन किए। सजल नयन के साथ भजन गाते हुए संगीत विदुषी को विदाई दी।

प्रो. कमला मीरजापुर में रह चुकीं हैं प्रवक्ता

लखनऊ के जानकीपुरम् निवासी प्रो. कमला श्रीवास्तव का जन्म एक सितंबर 1933 को हुआ था। वे मीरजापुर में आर्यकन्या इंटर कालेज में भूगोल, संगीत व आर्ट की प्रवक्ता रह चुकी हैं। बाल भारती स्कूल लखनऊ की प्रिंसिपल व भातखंडे संगीत संस्थान लखनऊ में भी सहायक प्राध्यापक रहीं। वहीं आकाशवाणी एवं दूरदर्शन द्वारा प्रो. कमला श्रीवास्तव की शास्त्रीय सुगम, लोक संगीत तथा कविताओं का प्रसारण विविध पत्र-पत्रिकाओं में लेख एवं कविताएं प्रकाशित हुई हैं।

ये सम्मान प्रो. कमला के नाम

बेगम अख्तर मानद जन पुरस्कार 1994 प्रो. कल्चरल आर्गनाइजेशन लखनऊ, संगीत श्री-1998 ब्रजपर्व संस्कृत शोध संस्थान, सरस्वती सम्मान-1999 शरण संस्था लखनऊ, संगीत-साहित्य सम्मान-2000 उप्र सरकार महिला कल्याण एवं राष्ट्रीय महिला संस्थान लखनऊ, लोक संगीत अवार्ड-2001 संगीत नाटक अकादमी उप्र शासन लखनऊ, स्वर साम्राज्ञी-2006 संस्कृत निलियम संस्था लखनऊ आदि अनेक संस्थाओं द्वारा प्रो. कमला श्रीवास्तव को सम्मान से अलंकृत किया गया है।