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12 महीने में 3200 हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण

भोपाल :  प्रदेश में एक ओर सरकार माफिया के खिलाफ अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर वन माफिया तेजी से पैर पसार रहा है। पिछले एक साल के भीतर माफिया ने वन विभाग की करीब 32 हेक्टेयर से ज्यादा भूमि पर कब्जा किया है। इसमें से ज्यादातर भूमि पर रसूखदारों ने वन्य संपदा को नष्ट किया है। वन भूमि पर अतिक्रमण हटाने में प्रशासन की उतरी रुचि नहीं है, जितनी रुचि इन दिनों बड़े शहरों में सरकारी जमीन से माफिया को बेदखल करने में है। वन माफिया राजनीतिक संरक्षण की वजह से पनप रहा है।

वन मुख्यालय भोपाल से मिले आंकड़े के अनुसार प्रदेश में 1 जनवरी 2019 से 31 दिसंबर 2019 तक 3201 हेक्टेयर भूमि पर नया अतिक्रमण किया है। जिसमें सबसे ज्यादा अतिक्रमण इंदौर वन वृत्त के अंतर्गत खंडवा, खरगौन, बुरहान जिले में हुए हैं। इंदौर वन वृत्त में 492 हेक्टेयर वन भूमि पर माफिया ने अतिक्रमण किया है। खास बात यह है कि सरकार सिर्फ 9 हेक्टेयर भूमि से ही कब्जा हटाने में कामयाब हो पाई है। इसी तरह इसी अवधि में खंडवा वन वृत्त में 801 हेक्टेयर, शिवपुरी वन वृत्त में 868 हेक्टेयर, बैतूल में 154 हेक्टेयर, सागर में 131 हेक्टेयर और ग्वालियर 108 हेक्टेयर वन भ्ूामि पर माफिया ने अतिक्रमण किया है। एक साल की अवधि में वन भूमि पर अतिक्रमण से जुड़े 1828 प्रकरण दर्ज किए गए हैं।
राष्ट्रीय उद्यानों में भी घुसा माफिया
प्रदेश में वन माफिया कितना ताकतवर है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि माफिया ने राष्ट्रीय उद्यानों में भी वन भूमि पर अतिक्रमण जमा लिया है। श्योपुर के कूना वन प्राणी अभ्यारंण, माधव राष्ट्रीय उद्यान शिवपुरी, पन्ना राष्ट्रीय उद्यान, कान्हा राष्ट्रीय उद्यान मंडला में भी अतिक्रमण हुआ है।

 

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